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डेयरियों और लावारिस पशुओं से श्ाहर की हालात बदतर
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Wed, 21 Dec 2016 12:06 AM IST
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uttarakhand badri cow in NBAGR list
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नगर परिषदीय क्षेत्र में पाबंदी के बावजूद खुलेआम पशु डेयरियां खुली हुई हैं। खुद का लाभ लेने के बाद सड़कों पर छोड़े पशु से राहगीरों के साथ ही स्थानीय लोग भी परेशान रहते हैं। कई इलाकों की संकरी सीवर लाइन भी आए दिन इनकी वजह से ही चोक रहती है। इसके अलावा लोगों को जलभराव की समस्या से आए दिन दो-चार होना पड़ता है। बावजूद इसके विभाग ने इस मसले पर चुप्पी साधी हुई है। इसके बावजूद नप प्रशासन इस मामले में पूरी तरह अनभिज्ञ बना हुआ है। नगर परिषद के नियम के अनुसार परिषदीय क्षेत्र में पशु डेयरी खोलने के अनुमति नहीं है। बावजूद इसके कई क्षेत्रों में पशु डेयरियां चल रही हैं। यही नहीं अधिकांश पशुपालक अपने दुधारू पशुओं का दूध निकालने के बाद उन्हें खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में दूध तो पशुपालक बेचते हैं लेकिन शहर की गलियों और सड़कों पर खुले पशु परेशानी का सबब अन्य लोगों के लिए बनते हैं।
वैद्यवाड़ा-गुर्जरवाड़ा की गलियों में चोक रहते हैं सीवर
वैद्यवाड़ा और गुर्जरवाड़ा मोहल्लों की बात करें तो पशुओं के गोबर को निस्तारित करने की उचित व्यवस्था नहीं है। इस कारणयहां के सीवर और नालियां आए दिन चोक रहती हैं। ऐसे में बिन बारिश के भी इन मोहल्लों की कई गलियां दूषित पानी से भरी रहती हैं। बारिश के मौसम में तो यहां से निकलना भी दूभर हो जाता है।
अधिवक्ता सुनील भार्गव डाल चुके हैं पीआईएल
लावारिस जानवरों और बेसहारा पशुओं से होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए अधिवक्ता और समाजसेवी सुनील भार्गव पूर्व में एक जनहित याचिका (पीआईएल) पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट में डाल चुके हैं। याचिका में अधिवक्ता ने कहा था कि शहर में लावारिस पशुओं को जंगल और गोशाला में भेजने के आदेश दिए जाएं। नगर परिषद के सेक्रेट्री को पार्टी बनाकर 2010 में डाली गई याचिका पर कोर्ट ने संज्ञान लेकर कार्रवाई के आदेश दिये थे।
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सरकारी गाड़ी हो चुकी है कोर्ट में अटैच
कोर्ट के आदेश के बावजूद पशुओं को जंगल या गोशाला न भेजने पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाकर नगर परिषद की सरकारी गाड़ी को अटैच करने के आदेश दिए थे। गाड़ी कुछ दिन कोर्ट कैंपस में भी रही। बाद में तत्कालीन नगर परिषद अधिकारी ने गाड़ी का प्रयोग जनता के कामकाज के संदर्भ में होने की बात कहकर रिलीज करने की मांग की थी। इसके बाद कोर्ट ने पशुओं को हटाने की तत्काल कार्रवाई की शर्त पर गाड़ी छोड़ी थी। इसके बाद कुछ दिन पशु गोशाला में छोड़े गए लेकिन अब हालात जस के तस हैं। अब इस मामले में अगले साल 23 जनवरी की तारीख लगी है।
600 से ज्यादा पशु हैं शहर में लावारिस
एक अनुमान के मुताबिक रेवाड़ी नगर परिषद क्षेत्र में 600 से ज्यादा लावारिस पशु हैं। ये पशु शहर में दिन-रात घूमते और सड़कों पर जमावड़ा लगाए दिखाई दे जाते हैं। बावजूद इसके नगर परिषद इस तरफ पूरी तरह निष्क्रिय है। शहर में लावारिस और बेसहारा पशुओं का जमावड़ा शिव चौक, गुर्जरवाड़ा चौक, नई सब्जी मंडी के पास, ऑटो मार्केट चौराहे के आसपास, अनाज मंडी की पिछली सड़क के आसपास दिखाई देना आम बात है।
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लावारिस और बेसहारा पशुओं को शहर से बाहर और गोशालाओं में भिजवाने के लिए नगर परिषद का रवैया बेहद सुस्त रहा है। इसी के चलते कोर्ट में याचिका डाली गई थी। मामले में अगली तारीख 23 जनवरी को है। - सुनील भार्गव, एडवोकेट
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नगर परिषद क्षेत्र में पशु डेयरियां पूरी तरह अवैध हैं। इस संदर्भ में जल्द ही कार्रवाई करने की तैयारी की जाएगी। पशु डेयरी चलाने वालों के चालान भी किए जाएंगे। - मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
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वैद्यवाड़ा-गुर्जरवाड़ा की गलियों में चोक रहते हैं सीवर
वैद्यवाड़ा और गुर्जरवाड़ा मोहल्लों की बात करें तो पशुओं के गोबर को निस्तारित करने की उचित व्यवस्था नहीं है। इस कारणयहां के सीवर और नालियां आए दिन चोक रहती हैं। ऐसे में बिन बारिश के भी इन मोहल्लों की कई गलियां दूषित पानी से भरी रहती हैं। बारिश के मौसम में तो यहां से निकलना भी दूभर हो जाता है।
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अधिवक्ता सुनील भार्गव डाल चुके हैं पीआईएल
लावारिस जानवरों और बेसहारा पशुओं से होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए अधिवक्ता और समाजसेवी सुनील भार्गव पूर्व में एक जनहित याचिका (पीआईएल) पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट में डाल चुके हैं। याचिका में अधिवक्ता ने कहा था कि शहर में लावारिस पशुओं को जंगल और गोशाला में भेजने के आदेश दिए जाएं। नगर परिषद के सेक्रेट्री को पार्टी बनाकर 2010 में डाली गई याचिका पर कोर्ट ने संज्ञान लेकर कार्रवाई के आदेश दिये थे।
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सरकारी गाड़ी हो चुकी है कोर्ट में अटैच
कोर्ट के आदेश के बावजूद पशुओं को जंगल या गोशाला न भेजने पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाकर नगर परिषद की सरकारी गाड़ी को अटैच करने के आदेश दिए थे। गाड़ी कुछ दिन कोर्ट कैंपस में भी रही। बाद में तत्कालीन नगर परिषद अधिकारी ने गाड़ी का प्रयोग जनता के कामकाज के संदर्भ में होने की बात कहकर रिलीज करने की मांग की थी। इसके बाद कोर्ट ने पशुओं को हटाने की तत्काल कार्रवाई की शर्त पर गाड़ी छोड़ी थी। इसके बाद कुछ दिन पशु गोशाला में छोड़े गए लेकिन अब हालात जस के तस हैं। अब इस मामले में अगले साल 23 जनवरी की तारीख लगी है।
600 से ज्यादा पशु हैं शहर में लावारिस
एक अनुमान के मुताबिक रेवाड़ी नगर परिषद क्षेत्र में 600 से ज्यादा लावारिस पशु हैं। ये पशु शहर में दिन-रात घूमते और सड़कों पर जमावड़ा लगाए दिखाई दे जाते हैं। बावजूद इसके नगर परिषद इस तरफ पूरी तरह निष्क्रिय है। शहर में लावारिस और बेसहारा पशुओं का जमावड़ा शिव चौक, गुर्जरवाड़ा चौक, नई सब्जी मंडी के पास, ऑटो मार्केट चौराहे के आसपास, अनाज मंडी की पिछली सड़क के आसपास दिखाई देना आम बात है।
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लावारिस और बेसहारा पशुओं को शहर से बाहर और गोशालाओं में भिजवाने के लिए नगर परिषद का रवैया बेहद सुस्त रहा है। इसी के चलते कोर्ट में याचिका डाली गई थी। मामले में अगली तारीख 23 जनवरी को है। - सुनील भार्गव, एडवोकेट
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नगर परिषद क्षेत्र में पशु डेयरियां पूरी तरह अवैध हैं। इस संदर्भ में जल्द ही कार्रवाई करने की तैयारी की जाएगी। पशु डेयरी चलाने वालों के चालान भी किए जाएंगे। - मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद