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सावन के पहले सोमवार को शिवालयों में उमड़ी भक्तों की भीड़

Mon, 26 Jul 2021 11:00 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 26 Jul 2021 11:00 PM IST
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Crowd of devotees gathered in the temples on the first Monday of Sawan
शिवालय में जलाभिषेक करते श्रद्धालु। - फोटो : Rewari
रेवाड़ी। कोरोनाकाल के बीच सावन माह के पहले सोमवार को पीतल नगरी के शिवालयों में भक्तों की खासी भीड़ उमड़ी। हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की। कुछ लोग जहां मास्क व सामाजिक दूरी का ध्यान रख रहे थे। वहीं अधिकतर लोगों में इसकी को कोई परवाह नहीं दिखाई दी।
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मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। श्रद्धालुओं ने शिवालयों में गंगाजल, दूध, दही से जलाभिषेक कर बेल पत्र, चावल और पुष्प से भगवान शिव की पूजा की। घंटेश्वर मंदिर में में जलाभिषेक को लेकर सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। शिवालयों में इसके निमित्त पहले से सारी तैयारी पूरी कर ली गई थी। रंग- रोगन के साथ शिव मंदिरों को आकर्षक तरीके से सजाया भी गया था। शिवलिंग की आकर्षक साज-सज्जा करने के साथ ही देर रात से ही भजन कीर्तन शुरू हो गए थे। मंदिरों में भोले शंकर के जयकारों से गूंज रही।
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भगवान शिव को प्रिय है श्रावण मास
ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के मुताबिक श्रावण मास व शिव का भारतीय संस्कृति से गहरा मेल है। श्रावण के आते ही शिव भक्तों में पूजा- अर्चना के लिए नई उमंग का संचार हो जाता है। शास्त्रों और पुराणों का कहना है कि श्रावण मास भोले बाबा को अत्यंत प्रिय है। इस माह में शिव अर्चना के लिए प्रमुख सामग्री बेल पत्र और धतूरा सहज सुलभ हो जाता है। शिव ऐसे देवता हैं जिनकी पूजा-अर्चना की सामग्री के लिए किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होती।
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श्रावण के सोमवार व्रत की विधि
श्रावण मास में सोमवार को शिव का व्रत करने के दौरान भगवान श्री गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी देव की पूजा करनी चाहिए। पूजन सामग्री में जल, दूध, दही, चीनी, घी, शहद, पंचामृत, मोली और वस्त्र समेत जनेऊ, चंदन, रोली, चावल, फूल, बेल पत्र, भांग, धतूरा, कमल गट्ठा, प्रसाद, पान-सुपारी, लौंग, इलायची, मेवा व दक्षिणा अर्पित किए जाते हैं।

शिव पूजन में बेल पत्र जरूरी
भगवान शिव की पूजा जब बेल पत्र से की जाती है तो वे अपने भक्त की कामना बिना कहे पूरी कर देते है। बेल पत्र के संबंध में मान्यता है कि बेल के पेड़ को जो भी भक्तगण पानी या गंगाजल से सींचता है, उसे सभी तीर्थों की प्राप्ति होती है।
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