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जल संकट: 280 फीट नीचे गया भूजल, कैसे बुझे प्यास, कई लोग छोड़ चुके गांव, देखिए ग्राउंड रिपोर्ट
Sun, 12 Jun 2022 01:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी (हरियाणा)
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jun 2022 01:28 AM IST
सार
जल संकट के चलते कई लोग गांव छोड़कर बाहर रहने को मजबूर हैं। हरियाणा और राजस्थान के सीमा पर स्थित यह गांव डार्क जोन घोषित हो चुका है। किसान लंबे समय से फसलों की सिंचाई के लिए जल की कमी से जूझ रहे हैं।
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नहाते हुए पानी की बर्बादी होने से रोकता ग्रामीण।
- फोटो : Rewari
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विस्तार
हरियाणा के रेवाड़ी में अरावली पर्वतमाला से लगे हरियाणा और राजस्थान की सीमा पर स्थित गांव कुंडल में भूजल 280 फीट नीचे चले जाने से गंभीर पेयजल संकट पैदा हो गया है। जिला प्रशासन इस गांव को पहले ही डार्क जोन घोषित कर चुका है। गांव के किसान लंबे समय से फसलों की सिंचाई के लिए जल की कमी से जूझ रहे हैं।
पेयजल के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसकी वजह से कई लोग गांव छोड़ कर बाहर रहने को मजबूर हैं। हालांकि जन स्वास्थ्य विभाग गर्मी के दिनों में टैंकर से पेयजल आपूर्ति कराता है लेकिन लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो पाती हैं। ग्रामीणों के इस समस्या के ठोस समाधान का इंतजार है।
गांव कुंडल में पेयजल की समस्या दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है। ग्रामीणों की मानें तो अगर यह समस्या यूं ही बढ़ती रही तो उनको अपना आधा समय आसपास के कुंओं से साइकिल, बाइक या अन्य साधन से पेयजल लाने पर समय और पैसे खर्च करने पड़ेंगे। सरकार ने यहां वाटर लाइन बिछवाई है लेकिन तीन-चार दिन में एक बार पानी बहुत कम मात्रा में आता है।
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ऐसे में मनुष्य के साथ पशु और पक्षी भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीण पानी बचाने के लिए चारपाई पर बैठकर उसके नीचे बड़ा बर्तन रखकर नहाने के बाद वह पानी किसी काम या पशुओं को पिलाने में इस्तेमाल करते हैं। महिलाएं मुख्य जलापूर्ति पाइप लाइन को पंक्चर करके बने छेदों के गड्ढों से पीने का पानी एकत्रित करती हैं। वही पानी पीने को लोग मजबूर होते हैं।
कुंडल गांव में लगभग 650 घर है 3500 से अधिक आबादी है। इस गांव में 1600 से अधिक मतदाता हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव की इस समस्या के समाधान के लिए कई बार आला अधिकारियों और संबंधित विभाग से गुहार लगाई गई लेकिन समस्या दूर नहीं हुई। पेयजल की समस्या हल नहीं होने की वजह से काफी परिवार इस गांव से निकलकर बाहर रहने को मजबूर हो गए हैं।
लोग बोले
पानी की समस्या के चलते दिन में 4 से 6 घंटे हमें दूर दराज से पानी लाने में खर्च करने पड़ते हैं। ऐसा करने पर भी पूरा पानी नहीं मिल पाता और समय भी नष्ट हो जाता है। - उदयवीर।
उम्र 70 के पार हो चुकी है। बच्चे कंपनियों में या अपने रोजगार पर चले जाते हैं, पानी जुटाना भारी पड़ रहा है। - बहाल सिंह।
पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल रहा। जहां तहां से प्रदूषित पानी जुटाकर प्रयोग करना मजबूरी है। सरकार को ध्यान देना चाहिए। - संजय।
एक बेटा है, जो पढ़ाई कर रहा है, सेवानिवृत्त होने के बाद गार्ड की नौकरी कर रहा था, मजबूरन छोड़नी पड़ी। - ईश्वर सिंह पूर्व सैनिक।
दिल की बीमारी का मरीज होते हुए दूर से नहीं ला पाता था। बेटे की प्राइवेट जॉब छुड़वानी पड़ी। - विजेंद्र सिंह।
भाई नौकरी संभालता है। घर में बूढ़ी मां और मैं खुद अस्वस्थ रहने के साथ अपाहिज हूं। पानी की व्यवस्था करना बड़ा भारी पड़ रहा है।- राजकुमार प्रधान।
अधिकारिक पक्ष
गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए पंचायत की ओर से लगभग 9 से 10 बोरवेल करा चुके हैं। धीरे-धीरे सबका पानी खत्म हो गया। अभी 3 बोरवेल चालू हैं लेकिन उनमें भी पानी नहीं होने की वजह से बहुत कम पानी देते हैं। बोरवेल से पानी का दबाव कम होने की वजह से हर जगह पानी नहीं पहुंच पाता। अधिकारियों और विभाग को कई बार समस्या से अवगत कर चुके हैं। - मनोज पहलवान, पूर्व सरपंच।
जिले के कुछ गांवों में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है। पहाड़ी क्षेत्र वाले गांवों में यह समस्या है। नहरी पानी पर आधारित योजना से पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयास जारी है। जहां अधिक समस्या है, वहां पानी के टैंकर भी भिजवाते हैं। गांव कुंडल में भी बेहतर जलापूर्ति के प्रयास जारी हैं। - विनय प्रकाश चौहान, अधिशासी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग।
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पेयजल के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसकी वजह से कई लोग गांव छोड़ कर बाहर रहने को मजबूर हैं। हालांकि जन स्वास्थ्य विभाग गर्मी के दिनों में टैंकर से पेयजल आपूर्ति कराता है लेकिन लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो पाती हैं। ग्रामीणों के इस समस्या के ठोस समाधान का इंतजार है।
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गांव कुंडल में पेयजल की समस्या दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है। ग्रामीणों की मानें तो अगर यह समस्या यूं ही बढ़ती रही तो उनको अपना आधा समय आसपास के कुंओं से साइकिल, बाइक या अन्य साधन से पेयजल लाने पर समय और पैसे खर्च करने पड़ेंगे। सरकार ने यहां वाटर लाइन बिछवाई है लेकिन तीन-चार दिन में एक बार पानी बहुत कम मात्रा में आता है।
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ऐसे में मनुष्य के साथ पशु और पक्षी भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीण पानी बचाने के लिए चारपाई पर बैठकर उसके नीचे बड़ा बर्तन रखकर नहाने के बाद वह पानी किसी काम या पशुओं को पिलाने में इस्तेमाल करते हैं। महिलाएं मुख्य जलापूर्ति पाइप लाइन को पंक्चर करके बने छेदों के गड्ढों से पीने का पानी एकत्रित करती हैं। वही पानी पीने को लोग मजबूर होते हैं।
कुंडल गांव में लगभग 650 घर है 3500 से अधिक आबादी है। इस गांव में 1600 से अधिक मतदाता हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव की इस समस्या के समाधान के लिए कई बार आला अधिकारियों और संबंधित विभाग से गुहार लगाई गई लेकिन समस्या दूर नहीं हुई। पेयजल की समस्या हल नहीं होने की वजह से काफी परिवार इस गांव से निकलकर बाहर रहने को मजबूर हो गए हैं।
लोग बोले
पानी की समस्या के चलते दिन में 4 से 6 घंटे हमें दूर दराज से पानी लाने में खर्च करने पड़ते हैं। ऐसा करने पर भी पूरा पानी नहीं मिल पाता और समय भी नष्ट हो जाता है। - उदयवीर।
उम्र 70 के पार हो चुकी है। बच्चे कंपनियों में या अपने रोजगार पर चले जाते हैं, पानी जुटाना भारी पड़ रहा है। - बहाल सिंह।
पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल रहा। जहां तहां से प्रदूषित पानी जुटाकर प्रयोग करना मजबूरी है। सरकार को ध्यान देना चाहिए। - संजय।
एक बेटा है, जो पढ़ाई कर रहा है, सेवानिवृत्त होने के बाद गार्ड की नौकरी कर रहा था, मजबूरन छोड़नी पड़ी। - ईश्वर सिंह पूर्व सैनिक।
दिल की बीमारी का मरीज होते हुए दूर से नहीं ला पाता था। बेटे की प्राइवेट जॉब छुड़वानी पड़ी। - विजेंद्र सिंह।
भाई नौकरी संभालता है। घर में बूढ़ी मां और मैं खुद अस्वस्थ रहने के साथ अपाहिज हूं। पानी की व्यवस्था करना बड़ा भारी पड़ रहा है।- राजकुमार प्रधान।
अधिकारिक पक्ष
गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए पंचायत की ओर से लगभग 9 से 10 बोरवेल करा चुके हैं। धीरे-धीरे सबका पानी खत्म हो गया। अभी 3 बोरवेल चालू हैं लेकिन उनमें भी पानी नहीं होने की वजह से बहुत कम पानी देते हैं। बोरवेल से पानी का दबाव कम होने की वजह से हर जगह पानी नहीं पहुंच पाता। अधिकारियों और विभाग को कई बार समस्या से अवगत कर चुके हैं। - मनोज पहलवान, पूर्व सरपंच।
जिले के कुछ गांवों में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है। पहाड़ी क्षेत्र वाले गांवों में यह समस्या है। नहरी पानी पर आधारित योजना से पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयास जारी है। जहां अधिक समस्या है, वहां पानी के टैंकर भी भिजवाते हैं। गांव कुंडल में भी बेहतर जलापूर्ति के प्रयास जारी हैं। - विनय प्रकाश चौहान, अधिशासी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग।