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आंधी से बिजली निगम को ढाई करोड़ का नुकसान.
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Sat, 04 Jun 2016 01:01 AM IST
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22 मई को जिले में आई आंधी से बिजली निगम को भारी नुकसान हुआ है। आंधी में निगम के 2500 बिजली पोल एवं 150 से ज्यादा ट्रांसफार्मर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए थे। निगम के अनुसार एक पोल को दोबारा से खड़ा करने में लगभग चार हजार का खर्च आता है, वहीं एक टांसफार्मर पर आने वाला खर्च 25 हजार से लेकर डेढ़ लाख तक आता है।
निगम के नुकसान का औसत जोड़ा जाए तो निगम को अचानक आई इस आफत से लगभग ढाई करोड़ का नुकसान हुआ है। निगम के अधिकारियों की मानें तो इतने रुपयों में एक बड़ी कॉलोनी या गांव को नए सिरे से जगमग किया जा सकता था। जिले में आंधी से हुए व्यापक स्तर के नुकसान के चलते जिले के कईं गांवों में बिजली व्यवस्था अभी तक पटरी पर नहीं आ पाई है।
जनसंख्या घनत्व पर निर्भर करती है ट्रांसफार्मर की क्षमता
जिले के पांच ब्लॉकों में 351 से अधिक गांवों मेें निगम की ओर से पूरी तरह से विद्युतीकरण किया हुआ है। गांव, ढाणी एवं कॉलोनियों में लोड के हिसाब से ट्रांसफार्मर लगाया जाता है। एक ट्रांसफार्मर को इंस्टॉल करने में निगम को 25 हजार से लेकर डेढ़ लाख तक खर्च करने पड़ते हैं। निगम के अनुसार 22 मई को आई आंधी में 150 ट्रांसफार्मर पूरी तरह से डैमेज हो गए। यदि औसतन खर्च मानें तो 150 ट्रांसफार्मरों को एक बार फिर से इंस्टाल करने में निगम को 75 हजार के हिसाब से कुल 1.125 करोड़ रुपये का खर्च करने पड़ेंगे। वहीं जिले मेें 2500 से ज्यादा डेमेज पोल को एक बार फिर से लगाना होगा। इसके लिए प्रति पोल 4 हजार रुपये का खर्च आता है। इस हिसाब से पोल को खड़ा करने के लिए निगम को एक करोड़ से रुपये खर्च करने पड़ेंगे। निगम की मानें तो सारी व्यवस्था को पटरी पर लगाने के लिए पचास लाख से ज्यादा मैन पावर पर खर्च करने पड़ेंगे। इस लिहाज से निगम को आंधी से हुए नुकसान के लिए ढाई करोड से ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे।
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नुकसान की भरपाई में लगे पैसे से हो सकता था एक गांव जगमग
निगम के एसडीओ ने बताया कि निगम को अंाधी से भारी-भरकम नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि ढाई करोड़ की राशि से शहर की एक कॉलोनी या फिर एक बड़े गांव को नए सिरे से जगमग किया जा सकता था। निगम अधिकारियों का कहना है कि आंधी आने के बाद से निगम के सभी कर्मचारी एवं अधिकारी व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए दिन-रात लगे हुए हैं। फिलहाल व्यवस्था पूरी तरह सुचारू होने में अभी भी कुछ समय लग सकता है।
गांव में एग्रीकल्चर ट्रांसफार्मरों से की जा रही है बिजली सप्लाई
जिले में आंधी ने जिस तरह से कहर बरपाया था,उससे आम से लेक्चर खास तक सभी प्रभावित हुए थे। शहरों के घरों में जहां विंडो-दरवाजों को भारी नुकसान आंधी से हुआ था। वहीं गांवों में पोल एवं ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने के चलते व्यवस्था अभी तक पटरी पर नहीं आ पाई है। निगम अधिकारियों के अनुसार जिन गांवों में व्यवस्था नहीं सुधरी हैं,वहां पर खेतों में लगे एग्रीकल्चर ट्रांसफार्मरों से सप्लाई की जा रही है। जिले में बावल मेें राजस्थान सीमा से सटे मंगलेशर माजरी, सहित अनेग गांवों में बिजली नहीं आने के कारण लोग पानी संकट से जूझ रहे हैं।
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वर्जन-जिले में 2500 से ज्यादा पोल एवं 150 से ज्यादा ट्रांसफार्मर आंधी में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए थे। शहर में आपूर्ति सुचारु रूप से चल रही है, वहीं गांवों में निगम के कर्मचारी दिन-रात जुटकर सुचारु करने में लगे हुए हैं।
-इंद्रजीत यादव, एससी, डीएचबीवीएन, रेवाड़ी
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निगम के नुकसान का औसत जोड़ा जाए तो निगम को अचानक आई इस आफत से लगभग ढाई करोड़ का नुकसान हुआ है। निगम के अधिकारियों की मानें तो इतने रुपयों में एक बड़ी कॉलोनी या गांव को नए सिरे से जगमग किया जा सकता था। जिले में आंधी से हुए व्यापक स्तर के नुकसान के चलते जिले के कईं गांवों में बिजली व्यवस्था अभी तक पटरी पर नहीं आ पाई है।
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जनसंख्या घनत्व पर निर्भर करती है ट्रांसफार्मर की क्षमता
जिले के पांच ब्लॉकों में 351 से अधिक गांवों मेें निगम की ओर से पूरी तरह से विद्युतीकरण किया हुआ है। गांव, ढाणी एवं कॉलोनियों में लोड के हिसाब से ट्रांसफार्मर लगाया जाता है। एक ट्रांसफार्मर को इंस्टॉल करने में निगम को 25 हजार से लेकर डेढ़ लाख तक खर्च करने पड़ते हैं। निगम के अनुसार 22 मई को आई आंधी में 150 ट्रांसफार्मर पूरी तरह से डैमेज हो गए। यदि औसतन खर्च मानें तो 150 ट्रांसफार्मरों को एक बार फिर से इंस्टाल करने में निगम को 75 हजार के हिसाब से कुल 1.125 करोड़ रुपये का खर्च करने पड़ेंगे। वहीं जिले मेें 2500 से ज्यादा डेमेज पोल को एक बार फिर से लगाना होगा। इसके लिए प्रति पोल 4 हजार रुपये का खर्च आता है। इस हिसाब से पोल को खड़ा करने के लिए निगम को एक करोड़ से रुपये खर्च करने पड़ेंगे। निगम की मानें तो सारी व्यवस्था को पटरी पर लगाने के लिए पचास लाख से ज्यादा मैन पावर पर खर्च करने पड़ेंगे। इस लिहाज से निगम को आंधी से हुए नुकसान के लिए ढाई करोड से ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे।
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नुकसान की भरपाई में लगे पैसे से हो सकता था एक गांव जगमग
निगम के एसडीओ ने बताया कि निगम को अंाधी से भारी-भरकम नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि ढाई करोड़ की राशि से शहर की एक कॉलोनी या फिर एक बड़े गांव को नए सिरे से जगमग किया जा सकता था। निगम अधिकारियों का कहना है कि आंधी आने के बाद से निगम के सभी कर्मचारी एवं अधिकारी व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए दिन-रात लगे हुए हैं। फिलहाल व्यवस्था पूरी तरह सुचारू होने में अभी भी कुछ समय लग सकता है।
गांव में एग्रीकल्चर ट्रांसफार्मरों से की जा रही है बिजली सप्लाई
जिले में आंधी ने जिस तरह से कहर बरपाया था,उससे आम से लेक्चर खास तक सभी प्रभावित हुए थे। शहरों के घरों में जहां विंडो-दरवाजों को भारी नुकसान आंधी से हुआ था। वहीं गांवों में पोल एवं ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने के चलते व्यवस्था अभी तक पटरी पर नहीं आ पाई है। निगम अधिकारियों के अनुसार जिन गांवों में व्यवस्था नहीं सुधरी हैं,वहां पर खेतों में लगे एग्रीकल्चर ट्रांसफार्मरों से सप्लाई की जा रही है। जिले में बावल मेें राजस्थान सीमा से सटे मंगलेशर माजरी, सहित अनेग गांवों में बिजली नहीं आने के कारण लोग पानी संकट से जूझ रहे हैं।
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वर्जन-जिले में 2500 से ज्यादा पोल एवं 150 से ज्यादा ट्रांसफार्मर आंधी में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए थे। शहर में आपूर्ति सुचारु रूप से चल रही है, वहीं गांवों में निगम के कर्मचारी दिन-रात जुटकर सुचारु करने में लगे हुए हैं।
-इंद्रजीत यादव, एससी, डीएचबीवीएन, रेवाड़ी