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महिला प्रोफेसर को बुरी नीयत से देखने व वीडियो वायरल करने का आरोपी प्रोफेसर गिरफ्तार
Updated Sat, 08 Sep 2018 12:37 AM IST
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रेवाड़ी। आईजीयू के इतिहास विभाग के निलंबित प्रोफेसर डॉ. बलकार सिंह को धारूहेड़ा पुलिस ने ज्वाइनिंग के लिए आई दो महिला सहायक प्रोफेसरों को बुरी नीयत से घूरकर वीडियो बनाने के मामले में वीरवार रात को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने प्रोफेसर पर 4 सितंबर को विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर किया था। वहीं प्रो. बलकार सिंह दर्ज कराए गए मामले को पहले ही साजिश बता चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि 13 जून को प्रो. बलकार सिंह ने एमबीए विभाग में ज्वाइनिंग के लिए आए चार सहायक प्रोफेसरों के चयन पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि इन सहायक प्रोफेसरों को कार्यकारी परिषद की बैठक से पहले ही कैसे पता चला गया कि उनका चयन हो गया है। इस आधार पर उन्होंने चयनित सहायक प्रोफेसरों के कार्यकारी परिषद की बैठक से पहले ही पहुंचने पर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल थी जिसमें उन्होंने चयन पर सवाल उठाए थे। हालांकि इस मामले की अभी जांच चल रही है। इसी बीच सहायक प्रोफेसर के खिलाफ गत जुलाई माह में विवि के रजिस्ट्रार डॉ. मदनलाल गोयल ने भी रोहतक के कैंप थाना में घर में घुसकर मारपीट सहित अन्य आरोपों के तहत मामला दर्ज कराया था। इस मामले में उनको गिरफ्तार कर लिया गया था और जेल भेज दिया गया था। जेल जाने के आधार पर विवि प्रबंधन ने उनको निलंबित कर दिया था। इसके बाद वे अभी तक निलंबित चल रहे थे। इसी बीच 20 अगस्त को विवि प्रबंधन ने उन पर यौन उत्पीड़न की मिली शिकायत पर नोटिस जारी किया था। इस मामले में 24 अगस्त को उनको बुला लिया गया था लेकिन शिकायतकर्ता की कापी नहीं दी गई थी। इस मामले में उनको जब दोबारा 30 अगस्त को बुलाया गया तो उन्होंने एक बार फिर से विवि प्रबंधन पर बुलाकर कार्यालय के बाहर बैठाने का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल किया था। इसके बाद 4 सितंबर को दो सहायक महिला प्रोफेसरों ने 13 जून की घटना के आधार पर उनको गलत नीयत से घूरकर वीडियो बनाकर छवि धूमिल करने का मामला दर्ज करा दिया था। इसके बाद पुलिस ने उनको वीरवार रात को गिरफ्तार कर लिया।
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उल्लेखनीय है कि 13 जून को प्रो. बलकार सिंह ने एमबीए विभाग में ज्वाइनिंग के लिए आए चार सहायक प्रोफेसरों के चयन पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि इन सहायक प्रोफेसरों को कार्यकारी परिषद की बैठक से पहले ही कैसे पता चला गया कि उनका चयन हो गया है। इस आधार पर उन्होंने चयनित सहायक प्रोफेसरों के कार्यकारी परिषद की बैठक से पहले ही पहुंचने पर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल थी जिसमें उन्होंने चयन पर सवाल उठाए थे। हालांकि इस मामले की अभी जांच चल रही है। इसी बीच सहायक प्रोफेसर के खिलाफ गत जुलाई माह में विवि के रजिस्ट्रार डॉ. मदनलाल गोयल ने भी रोहतक के कैंप थाना में घर में घुसकर मारपीट सहित अन्य आरोपों के तहत मामला दर्ज कराया था। इस मामले में उनको गिरफ्तार कर लिया गया था और जेल भेज दिया गया था। जेल जाने के आधार पर विवि प्रबंधन ने उनको निलंबित कर दिया था। इसके बाद वे अभी तक निलंबित चल रहे थे। इसी बीच 20 अगस्त को विवि प्रबंधन ने उन पर यौन उत्पीड़न की मिली शिकायत पर नोटिस जारी किया था। इस मामले में 24 अगस्त को उनको बुला लिया गया था लेकिन शिकायतकर्ता की कापी नहीं दी गई थी। इस मामले में उनको जब दोबारा 30 अगस्त को बुलाया गया तो उन्होंने एक बार फिर से विवि प्रबंधन पर बुलाकर कार्यालय के बाहर बैठाने का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल किया था। इसके बाद 4 सितंबर को दो सहायक महिला प्रोफेसरों ने 13 जून की घटना के आधार पर उनको गलत नीयत से घूरकर वीडियो बनाकर छवि धूमिल करने का मामला दर्ज करा दिया था। इसके बाद पुलिस ने उनको वीरवार रात को गिरफ्तार कर लिया।
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