फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   बच्चे समेत दो मरीजों की मौत, परिजनों ने जाम लगाकर किया हंगामा

बच्चे समेत दो मरीजों की मौत, परिजनों ने जाम लगाकर किया हंगामा

Mon, 23 Apr 2018 01:17 AM IST
Updated Mon, 23 Apr 2018 01:17 AM IST
विज्ञापन
बच्चे समेत दो मरीजों की मौत, परिजनों ने जाम लगाकर किया हंगामा
बच्चे समेत दो मरीजों की मौत, परिजनों ने जाम लगाकर किया हंगामा
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
शहर के राजेश पालयट चौक स्थित एक अस्पताल में रविवार को डेढ़ वर्षीय बच्चे समेत दो मरीजों की मौत हो गई। बच्चे को रविवार सुबह ही इलाज के लिए लाया गया था। दूसरे मरीज को शनिवार रात सड़क हादसे में घायल होने के बाद दाखिल कराया गया था। परिजनों का आरोप था कि अस्पताल प्रबंधन ने पैसा जमा तो करा लिया लेकिन चिकित्सकों ने मरीज को संभाला तक नहीं। मौत की सूचना भी सुबह हंगामे के बाद दी गई। इसके बाद गुस्साए परिजनों ने राजेश पायलट चौक पर जाम लगा दिया। जाम की सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों से शिकायत लेकर चिकित्सकों के बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही पुलिस कार्रवाई करेगी। उधर अस्पताल प्रबंधन ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि डेढ़ वर्षीय बच्चा अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था जबकि सड़क दुर्घटना में घायल मरीज का सिर पूरी तरह से फटा था। उसके बचने की कोई संभावना ही नहीं थी।
घटनाक्रम के अनुसार धारूहेड़ा निवासी 40 वर्षीय बलवान सिंह शनिवार रात को सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। परिजन उसे उपचार के लिए निजी अस्पताल में लेकर आए। परिजनों ने बताया कि मरीज को भर्ती कराने के तुरंत बाद ही अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें दो लाख रुपये जमा कराने को कहा। उन्होंने किसी तरह इधर-उधर से पैसों की व्यवस्था कर पैसे जमा करा दिए। परिजनों का आरोप है कि पैसे जमा कराने के बाद भी रातभर कोई चिकित्सक मरीज को संभालने नहीं आया। देर रात तक वहां मौजूद कर्मचारी हालत में सुधार बताते रहे। इसके बाद सुबह जब उन्होंने मरीज से मिलने की बात कही तो उन्हें मिलने तक नहीं दिया गया। इसके बाद उनको अनहोनी का शक हुआ। परिजनों के ज्यादा दबाव देने पर कर्मचारियों ने बताया कि बलवान की मौत हो गई है। इतना सुनने के बाद परिजन भड़क गए।
विज्ञापन

इससे पूर्व सुबह के समय ही बावल के झाबुआ निवासी और इस समय शहर की विजय नगर कॉलोनी में रहने वाला कृष्ण कुमार भी अपने बच्चे को लेकर पहुंचा था। पिता कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया कि उसके बेटे की हालत गंभीर थी। उससे 30 हजार रुपये जमा कराने के बाद भी इलाज नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि उसका डेढ़ वर्षीय बेटा यूसान कई दिनों से बीमार था। 18 अप्रैल को अस्पताल में बच्चे को भर्ती कराया गया। 20 अप्रैल को छुट्टी दे दी थी। रविवार सुबह बच्चे की तबीयत फिर से खराब हो गई। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया। पिता ने आरोप लगाया कि अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने बच्चे को समय पर उपचार नहीं दिया। चिकित्सक परिजनों से इलाज के लिए पहले रुपये जमा कराने को कहते रहे। 30 हजार रुपये जमा नहीं कराने तक बच्चे का इलाज नहीं किया। आरोप है कि इसी वजह से बच्चे की मौत हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

दोनों मृतकों के परिजनों द्वारा हंगामा करने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को बुलाकर उनको अस्पताल से बाहर कर दिया। इससे परिजनों को गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने राजेश पायलट चौक पर अवरोधक डालकर और वाहनों को आड़ा-तिरछा लगाकर जाम लगा दिया। इससे चौक पर चारों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई। जाम की सूचना के बाद मॉडल टाउन थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह ने गुस्साए परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन परिजनों लापरवाह चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने तक जाम नहीं खोलने पर अड़े रहे। करीब आधा घंटे बाद पहुंचे डीएसपी गजेंद्र सिंह ने परिजनों को काफी समझाने का प्रयास किया। इसके बाद भी डेढ़ घंटे तक मौके पर ही शिकायत लेने के बाद परिजनों ने जाम खोला।

करीब चार घंटे बाद हुआ पोस्टमार्टम
मॉडल टाउन पुलिस द्वारा करीब साढे़ बजे शव को पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल भेज दिया गया। रविवार होने के कारण चिकित्सक नहीं मिले। पीड़ित और पुलिस पोस्टमार्टम के लिए चिकित्सकों के पास चक्कर काटते रहे। करीब चार घंटे बाद चिकित्सकों का बोर्ड गठित कर शव का पोस्टमार्टम किया गया।
------
चिकित्सकों द्वारा मेरे बेटे को समय पर उपचार नहीं दिया गया। बेटा स्ट्रेचर पर पड़ा तड़फता रहा और चिकित्सक इलाज से पूर्व पैसे जमा कराने पर अड़े रहे। चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। - अनुराधा, मृतक बच्चे की मां
----
चिकित्सकों ने मेरे बच्चे का समय पर उपचार नहीं किया, जिसके कारण उसे अपनी जान गंवानी पड़ी। दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। चिकित्सक तो भगवान के समान होता है, लेकिन इस अस्पताल में तो रुपया सबसे बड़ा भगवान है। - कृष्ण कुमार, मृतक बच्चे का पिता
---
दोनों शवों का पोस्टमार्टम चिकित्सकों के बोर्ड से कराया गया है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों पक्षों की शिकायत मिल गई है। - गजेंद्र सिंह डीएसपी

--------------------------
अस्पताल प्रबंधन की सफाई, मृत अवस्था में लाए थे बच्चा
उधर अस्पताल प्रबंधन ने पत्रकारों से बातचीत कर अपना पक्ष रखा। प्रबंध निदेशक डॉ. एसपी यादव, निदेशक डॉ. एसके शर्मा और आईएमए प्रधान डॉ. करतार सिंह यादव ने अस्पताल पर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया। डॉ. एसपी यादव ने कहा कि जब बच्चे को लाया गया था तब वह मृत हालत में था। परिजन उसको भर्ती करने पर अड़े रहे। वहीं धारूहेड़ा के मृतक के परिजनों का यह आरोप पूरी तरह से गलत है कि पहले दो लाख रुपये जमा कराए थे। बलवान की सिर में चोट के कारण हालत काफी गंभीर थी। इसके बाद हमने उसी समय परिजनों को बता दिया था कि इसके बचने की संभावना बेहद कम है। इसके बावजूद भी परिजन जरूरतमंद होने की दुहाई देकर इलाज के लिए गुहार लगाते रहे। इसके बाद ही उसको भर्ती किया गया। इनका खर्चा महज 30 हजार रुपये का था। दोनों घटनाएं एक साथ होने के कारण परिजनों ने दबाव बनाने के लिए यह हंगामा किया है। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन हर जांच को तैयार है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed