{"_id":"5aecb5cf4f1c1b9f098b828d","slug":"11525462479-rewari-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"देरी से सूचना देने पर रेवाड़ी के डीइटीसी पर साढ़े सात हजार जुर्माना-------फोटो","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
देरी से सूचना देने पर रेवाड़ी के डीइटीसी पर साढ़े सात हजार जुर्माना-------फोटो
Updated Sat, 05 May 2018 01:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देरी से सूचना देने पर रेवाड़ी डीईटीसी पर साढ़े सात हजार जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
राज्य सूचना आयोग ने शराब ठेके के बारे में मांगी गई सूचना छह माह तक भी नहीं देने को गंभीरता से लिया है। आयोग ने इसे सूचना के अधिकार कानून का उल्लंघन मानकर शुक्रवार को रेवाड़ी के आबकारी एवं कराधान आयुक्त (डीईटीसी) की खुली लापरवाही माना है। आयोग ने देरी से सूचना देने पर डीईटीसी पर साढ़े सात हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। गुरुग्राम निवासी शीशपाल यादव ने रेवाड़ी के डीईटीसी एवं सूचना अधिकारी से एक गांव में शराब के ठेके के बारे में जानकारी मांगी थी। इसमें महज इतना जानकारी मांगी गई थी कि संबंधित गांव में मौजूद शराब का ठेका वैध है या अवैध? क्या उसकी कोई अनुमति ली गई है। अगर हैं तो ठेके का लाइसेंस तथा साइट प्लान की कापी उपलब्ध कराई जाए। वित्तीय वर्ष 31 मार्च को खत्म होता है, इसलिए मांगी गई सूचना की जानकारी देने की प्रासंगिकता इस तिथि से पहले थी। शीशपाल यादव के अनुसार कानून के मुताबिक एक माह के भीतर सूचना नहीं दी गई तो राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया गया। राज्य सूचना आयुक्त हेमंत अत्री ने पूरे केस की सुनवाई की और 19 मार्च को दस दिन के भीतर डीईटीसी को शीशपाल यादव को सूचना उपलब्ध कराने के आदेश दिए। डीइटीसी ने निर्धारित समय अवधि में शीशपाल को सूचना नहीं दी। उन्हें 13 अप्रैल को तब सूचना दी गई, जब वित्तीय वर्ष खत्म हो चुका था। इस अवधि के बाद शराब ठेके का लाइसेंस खुद ब खुद खत्म माना जाता है। राज्य सूचना आयुक्त के निर्देश पर संबंधित व्यक्ति को मांगी गई सूचना तो मिल गई, लेकिन देरी से सूचना दिए जाने को आयोग ने गंभीरता से लेते हुए साढ़े सात हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
राज्य सूचना आयोग ने शराब ठेके के बारे में मांगी गई सूचना छह माह तक भी नहीं देने को गंभीरता से लिया है। आयोग ने इसे सूचना के अधिकार कानून का उल्लंघन मानकर शुक्रवार को रेवाड़ी के आबकारी एवं कराधान आयुक्त (डीईटीसी) की खुली लापरवाही माना है। आयोग ने देरी से सूचना देने पर डीईटीसी पर साढ़े सात हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। गुरुग्राम निवासी शीशपाल यादव ने रेवाड़ी के डीईटीसी एवं सूचना अधिकारी से एक गांव में शराब के ठेके के बारे में जानकारी मांगी थी। इसमें महज इतना जानकारी मांगी गई थी कि संबंधित गांव में मौजूद शराब का ठेका वैध है या अवैध? क्या उसकी कोई अनुमति ली गई है। अगर हैं तो ठेके का लाइसेंस तथा साइट प्लान की कापी उपलब्ध कराई जाए। वित्तीय वर्ष 31 मार्च को खत्म होता है, इसलिए मांगी गई सूचना की जानकारी देने की प्रासंगिकता इस तिथि से पहले थी। शीशपाल यादव के अनुसार कानून के मुताबिक एक माह के भीतर सूचना नहीं दी गई तो राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया गया। राज्य सूचना आयुक्त हेमंत अत्री ने पूरे केस की सुनवाई की और 19 मार्च को दस दिन के भीतर डीईटीसी को शीशपाल यादव को सूचना उपलब्ध कराने के आदेश दिए। डीइटीसी ने निर्धारित समय अवधि में शीशपाल को सूचना नहीं दी। उन्हें 13 अप्रैल को तब सूचना दी गई, जब वित्तीय वर्ष खत्म हो चुका था। इस अवधि के बाद शराब ठेके का लाइसेंस खुद ब खुद खत्म माना जाता है। राज्य सूचना आयुक्त के निर्देश पर संबंधित व्यक्ति को मांगी गई सूचना तो मिल गई, लेकिन देरी से सूचना दिए जाने को आयोग ने गंभीरता से लेते हुए साढ़े सात हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।