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Rewari News: कोर्ट ने सड़क हादसे में घायल पिता-पुत्र को 3 लाख मुआवजा देने के आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के अध्यक्ष विकास गुप्ता ने एक ही सड़क हादसे में घायल हुए पिता और पुत्र को कुल तीन लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया। यह फैसला दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के बाद सुनाया गया। अदालत के समक्ष दर्ज संयुक्त बयान के अनुसार प्रत्येक मामले में 1.50 लाख रुपये की एकमुश्त राशि पर सहमति बनी। इस आधार पर न्यायाधिकरण ने दोनों याचिकाएं स्वीकार कर लीं।
न्यायाधीश ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी यह राशि 60 दिनों के भीतर अदा करे। निर्धारित समय में भुगतान न होने पर बीमा कंपनी को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह हादसा 9 जनवरी 2025 को हुआ था। गांव कालाका निवासी 50 वर्षीय देवेंद्र और उनका 15 वर्षीय पुत्र टैंपो की टक्कर से घायल हो गए थे। संबंधित टैंपो बीमा पॉलिसी से कवर था। दुर्घटना के बाद दोनों ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मुआवजे का दावा दायर किया था।
करीब आठ महीने से लंबित इस मामले का निपटारा आपसी समझौते से हुआ। अदालत ने देवेंद्र को सीधे मुआवजा दिलाने का आदेश दिया, जबकि नाबालिग पुत्र के लिए उसकी पूरी राशि राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा कराने के निर्देश दिए। यह राशि बालिग होने पर ही उसे उपलब्ध होगी।
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अदालत ने कहा कि इस व्यवस्था से नाबालिग के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। साथ ही न्यायाधिकरण अध्यक्ष ने टिप्पणी की कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर राहत मिलना बेहद जरूरी है ताकि वे अपने जीवन को बेहतर ढंग से आगे बढ़ा सकें।
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रेवाड़ी। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के अध्यक्ष विकास गुप्ता ने एक ही सड़क हादसे में घायल हुए पिता और पुत्र को कुल तीन लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया। यह फैसला दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के बाद सुनाया गया। अदालत के समक्ष दर्ज संयुक्त बयान के अनुसार प्रत्येक मामले में 1.50 लाख रुपये की एकमुश्त राशि पर सहमति बनी। इस आधार पर न्यायाधिकरण ने दोनों याचिकाएं स्वीकार कर लीं।
न्यायाधीश ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी यह राशि 60 दिनों के भीतर अदा करे। निर्धारित समय में भुगतान न होने पर बीमा कंपनी को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह हादसा 9 जनवरी 2025 को हुआ था। गांव कालाका निवासी 50 वर्षीय देवेंद्र और उनका 15 वर्षीय पुत्र टैंपो की टक्कर से घायल हो गए थे। संबंधित टैंपो बीमा पॉलिसी से कवर था। दुर्घटना के बाद दोनों ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मुआवजे का दावा दायर किया था।
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करीब आठ महीने से लंबित इस मामले का निपटारा आपसी समझौते से हुआ। अदालत ने देवेंद्र को सीधे मुआवजा दिलाने का आदेश दिया, जबकि नाबालिग पुत्र के लिए उसकी पूरी राशि राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा कराने के निर्देश दिए। यह राशि बालिग होने पर ही उसे उपलब्ध होगी।
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अदालत ने कहा कि इस व्यवस्था से नाबालिग के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। साथ ही न्यायाधिकरण अध्यक्ष ने टिप्पणी की कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर राहत मिलना बेहद जरूरी है ताकि वे अपने जीवन को बेहतर ढंग से आगे बढ़ा सकें।