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Rewari News: संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने बाइक चोरी के आरोपी को किया बरी
Fri, 06 Mar 2026 12:59 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 06 Mar 2026 12:59 AM IST
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रेवाड़ी। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) अनिल की अदालत ने मोटरसाइकिल चोरी के मामले में आरोपी नयागांव निवासी महेश कुमार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। मामले में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा।
रेवाड़ी निवासी मनीश ने 6 दिसंबर 2024 को सिटी थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी। उन्होंने बताया था कि वह अपनी मोटरसाइकिल लेकर एलजी सर्विस सेंटर गए थए। शाम करीब पांच बजे उन्होंने अपनी बाइक सर्विस सेंटर के बाहर खड़ी की और अंदर चले गए। करीब एक घंटे बाद वापस आए तो उनकी मोटरसाइकिल वहां से गायब मिली।
शिकायत के बाद पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने महेश कुमार को 7 दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना था कि आरोपी से पूछताछ के दौरान उसने चोरी की वारदात कबूल की और उसके खुलासे के आधार पर चोरी की मोटरसाइकिल बरामद कर ली गई।
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जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया और आरोपी के खिलाफ मुकदमा शुरू हुआ। अदालत ने आरोप तय किए लेकिन महेश ने खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे का सामना करने की बात कही। इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से दो गवाह पेश किए गए। इनमें जांच अधिकारी और शिकायतकर्ता मनीष शामिल थे। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया।
जांच के दौरान महेश को गिरफ्तार कर उससे चोरी की बाइक बरामद की गई। मामले का सबसे महत्वपूर्ण गवाह शिकायतकर्ता मनीष अदालत में अपने पहले दिए गए बयान से मुकर गया।
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ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल
2 मार्च को सुनाए अपने फैसले में अदालत ने कहा कि इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है और मुख्य गवाह के मुकर जाने से अभियोजन पक्ष का मामला काफी कमजोर हो गया। जिस बरामदगी को पुलिस ने महत्वपूर्ण सबूत बताया था, वह भी किसी स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी में नहीं की गई थी। शिकायतकर्ता भी उस समय मौजूद नहीं था जिससे बरामदगी की प्रक्रिया पर भी संदेह उत्पन्न होता है। अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा है। आपराधिक मामलों में यह आवश्यक होता है कि आरोपों को संदेह से परे साबित किया जाए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हो पाया। इन सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी महेश कुमार को आरोपों से बरी कर दिया।
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रेवाड़ी निवासी मनीश ने 6 दिसंबर 2024 को सिटी थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी। उन्होंने बताया था कि वह अपनी मोटरसाइकिल लेकर एलजी सर्विस सेंटर गए थए। शाम करीब पांच बजे उन्होंने अपनी बाइक सर्विस सेंटर के बाहर खड़ी की और अंदर चले गए। करीब एक घंटे बाद वापस आए तो उनकी मोटरसाइकिल वहां से गायब मिली।
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शिकायत के बाद पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने महेश कुमार को 7 दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना था कि आरोपी से पूछताछ के दौरान उसने चोरी की वारदात कबूल की और उसके खुलासे के आधार पर चोरी की मोटरसाइकिल बरामद कर ली गई।
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जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया और आरोपी के खिलाफ मुकदमा शुरू हुआ। अदालत ने आरोप तय किए लेकिन महेश ने खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे का सामना करने की बात कही। इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से दो गवाह पेश किए गए। इनमें जांच अधिकारी और शिकायतकर्ता मनीष शामिल थे। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया।
जांच के दौरान महेश को गिरफ्तार कर उससे चोरी की बाइक बरामद की गई। मामले का सबसे महत्वपूर्ण गवाह शिकायतकर्ता मनीष अदालत में अपने पहले दिए गए बयान से मुकर गया।
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ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल
2 मार्च को सुनाए अपने फैसले में अदालत ने कहा कि इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है और मुख्य गवाह के मुकर जाने से अभियोजन पक्ष का मामला काफी कमजोर हो गया। जिस बरामदगी को पुलिस ने महत्वपूर्ण सबूत बताया था, वह भी किसी स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी में नहीं की गई थी। शिकायतकर्ता भी उस समय मौजूद नहीं था जिससे बरामदगी की प्रक्रिया पर भी संदेह उत्पन्न होता है। अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा है। आपराधिक मामलों में यह आवश्यक होता है कि आरोपों को संदेह से परे साबित किया जाए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हो पाया। इन सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी महेश कुमार को आरोपों से बरी कर दिया।