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Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   Councillor adamant not passed development work

पार्षद अड़े, नहीं पास किए

Wed, 12 Aug 2015 01:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला रेवाड़ी
ब्यूरो/अमर उजाला रेवाड़ी Updated Wed, 12 Aug 2015 01:08 AM IST
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हंगामेदार हाउस मीटिंग में मंगलवार को पार्षदों ने शहर में धारा 35 के तहत करवाए गए कार्य पास नहीं किए। हालांकि एजेंडे में शामिल 22 में से कई प्रस्तावों को मंजूरी मिली।
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सेक्शन 35 के तहत हुए कार्यों को लेकर पेश किए गए प्रस्ताव पर चेयरपर्सन ने सफाई देने की कोशिश की लेकिन पार्षदों की तल्खी के कारण उसे दरकिनार कर दिया गया। विरोध और शोर-शराबे के साथ हंगामेदार बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली।
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 मंगलवार सुबह 11:40 बजे शुरू हुई बैठक के एजेंडे में 22 प्रस्ताव रखे गए। एजेंडा चार नंबर पर हरियाणा म्यूनिसिपल एक्ट 1973 की धारा के तहत चेयरपर्सन ने 2013 से 2015 के दौरान कराए कार्यों का ईओ डा. विजयपाल ने हवाला दिया। इस पर पार्षद मनीष चराया ने कहा कि यह बताया कि जाए धारा 35 है क्या। ईओ ने बताया कि कूड़ा उठाने के लिए किराये पर जेसीबी ली गई थी।
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शहर के कचरे का साफ करने के लिए जेसीबी जरूरी थी। इस पार्षदों ने कहा कि परिषद में एक जेसीबी है तो किराये पर क्यों ली गई। पार्षद इंदु मुरली ने कहा कि वार्डों में जेसीबी सफाई कार्यों के लिए आती ही नहीं तो फिर काम कहां हुआ। ईओ ने बताया कि एक मशीन शहर में एकत्र होने वाले कूडे़ और किराये पर ली गई मशीन को सहारनवास से कूड़ा उठाने में प्रयोग किया गया।

पार्षद विजयराव ने पूछा कि धारा 35 के लिए एक्ट क्या कहता है। उन्होंने कहा कि वह इस प्रस्ताव का विरोध करते हैं। पार्षद अशोक राव ने चेयरपर्सन का पक्ष लेते हुुए विरोध का कारण पूछा। पार्षदों ने कहा कि आपातकाल में काम कराने के लिए विकास कमेटी और अन्य कमेटियां बनी हैं, क्या उनसे अनुमति ली गई। इस पर सभी पार्षदों ने शोरशराबे के बीच खडे़ होकर और हाथ उठाकर प्रस्ताव का विरोध किया। इसके बाद प्रस्ताव को पेंडिंग रखना पड़ा।

- नक्शा पास करने को लेकर हंगामा
नक्शे पास करने को लेकर प्रस्ताव रखा गया। इस पर पार्षदों ने हंगामा खड़ा कर दिया। कहा कि गलत नक्शों को हाउस में पास नहीं किया जाएगा। ईओ ने सफाई दी कि एमई और जेई की रिपोर्ट पर हाउस नक्शे पास करने की स्वीकृति दे। पार्षदों ने कहा कि नियमानुसार बनाए जाने वालेे भवनों के नक्शे ही पास होंगे। जिस पर हाउस की मुहर लगी।

सहमति से घोषित होंगी व्यावसायिक सड़कें
नप क्षेत्र में 63 सड़कों को व्यावसायिक घोषित करने का प्रस्ताव रखा गया। बताया गया कि इन रोड के व्यावसायिक घोषित होने से नप को रेवेेन्यू मिलेगा। जिस पर पार्षद रामअवतार छावड़ी ने विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि इसमें शामिल कई रोड ऐसी शामिल हैं, जिन पर आग लगने के दौरान फायर ब्रिगेड तक नहीं जा सकती। जिस पर जवाब दिया गया कि पार्षदों की सहमति से ही इन सड़कों को व्यावसायिक घोषित किया जाएगा।

- सीसीटीवी और घर-घर से कूड़ा उठान पर मुहर
हाउस की मीटिंग में शहर की सुुरक्षा के लिए सीसीटीवी लगाने प्रस्ताव रखा गया, इसे पार्षदों ने ध्वनिमत से पास कर दिया। बताया गया कि सीसीटीवी के लिए सरकार पैसा खर्च करेगी। साथ ही घर-घर से कूड़ा उठाने का जिम्मा निजी एजेंसी को सौंपे जाने का प्रस्ताव रखा गया। इसे प्रोजेक्ट के तौर पर दो वार्डों में शुरू करने की बात रखी गई। इस पर पार्षदों ने प्रस्ताव का अनुमोदन करते हुए मांग की कि सभी वार्डों में इसे शुरू किया जाए, इस पर हाउस की मुहर लगी।
 
- रेवाड़ी सबसे गंदा शहर का मुद्दा उठा
सबसे गंदे शहरों की श्रेणी रेवाड़ी के शामिल होने का मुद्दा भी नप हाउस की मीटिंग में उठा। पार्षदों ने कहा कि बडे़ शर्म की बात है कि करीब 400 सफाई कर्मचारी होने के बावजूद शहर में सफाई नहीं है। प्रत्येक वार्ड में जितने सफाई कर्मी लगाए गए हैं, उतने दिखते नहीं है। हाउस की मीटिंग में शेम-शेम कर विरोध दर्ज कराया गया। कई पार्षदों ने यहां तक कहा कि कर्मचारी उनकी नहीं सुनते हैं।

- चेयरपर्सन के स्थान पर बोले अशोक राव
कई पार्षदों ने कहा कि सवालों के जवाब में चेयरपर्सन न बोलकर पार्षद अशोक राव ही बोल रहे हैं। आखिरकार उन्हें चेयरपर्सन किस लिए बनाया गया है। अशोक राव बोले कि भले ही पार्षद हाउस से बाहर चले जाएं, उन्हें प्रस्ताव पास कराना आता है।

- 50 फीसदी आबाद कालोनियों            
हाउस में मीटिंग में परिषद क्षेत्र में अनाधिकृत कालोनियों का सर्वे करवाने का प्रस्ताव पास हो गया। बताया गया कि जो कालोनी 50 फीसदी आबाद है, उन्हें वैध करने के लिए सर्वे के बाद सिफारिश की जाएगी।

 
‘दो-चार लोग ही बोलते हैं’

महिला पार्षद विनीता पिपल ने कहा कि प्रत्येक मीटिंग में कुछ पुरुष पार्षद ही शोरशराबा करते हैं और उन्हीं की आवाज के बीच बैठक खत्म हो जाती है। हाउस में मौजूद महिला पार्षदों को भी बोलने का मौका दिया जाए, ताकि वह भी अपने वार्डों की समस्या रख सकें। इससे महिला पार्षद के पति को मीटिंग में बोलने की जरूरत नहीं पडेगी।
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