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Rewari News: साहबी बैराज में छोड़ा जा रहा दूषित पानी, आसपास के गांवों का भूजल पीने लायक नहीं

Wed, 12 Feb 2025 01:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Wed, 12 Feb 2025 01:09 AM IST
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Contaminated water is being released in Sahabi Barrage, ground water of nearby villages is not fit for drinking.
संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। साहबी बैराज में एसटीपी प्लांट से दूषित जल छोड़े जाने के कारण आसपास के गांवों का भूजल भी प्रदूषित हो गया है। डुंगरवास, मसानी, खलियावास, रसगन, खरखड़ा, निखरी, ततारपुर खालसा और भटसाना में भूजल में आयरन, मैग्नीशियम और फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने के कारण इसका सेवन खतरनाक साबित हो रहा है। इन गांवों के लोग भूजल पीते हैं, जिससे उनके बीमार पड़ने का खतरा बढ़ गया है।
साहबी बैराज में पहली बार 2017 में 66 दिन तक नहरी पानी से 20 हजार 274 फीट पानी भरा गया था। 2018 में बैराज में 24 हजार 42 फीट तक पानी भरा गया था। यमुना का भी अतिरिक्त पानी बैराज में पहुंचाया गया था। तत्कालीन सीएम मनोहर लाल ने कहा था कि पर्यटकों के लिए इसे रमणीक स्थल बनाया जाएगा, जिसमें रेस्टोरेंट व ठहरने के लिए हट्स भी बनाए जाएंगे। बोटिंग के बाद फूड कोर्ट, एडवेंचर कैंप की गतिविधियां शुरू की जाएंगी। साहबी क्षेत्र के कई किलोमीटर में फैले बैराज में नेचर ट्रेल भी विकसित किया जाएगा। सरकार की योजना 18 किलोमीटर तक ट्रेल बनाने की थी, ताकि एक बेहतर पर्यटक स्थल बनाया जा सके। इसके लिए रेवाड़ी, बावल और धारूहेड़ा के दूषित पानी को ट्रीट करके बैराज में डालने की बात कही गई थी, लेकिन वर्तमान में एसटीपी का पानी बिना साफ किए ही बैराज में डाला जा रहा है।
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गांव खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव ने बताया कि साहबी बैराज में एसटीपी प्लांटों की ओर से वर्षों से प्रदूषित पानी छोड़ा जा रहा है जिससे आसपास के दर्जनों गांवों का भूजल की गुणवत्ता खत्म हो गई है। पिछले वर्ष जिले के डुंगरवास, मसानी, खलियावास, रसगन, खरखड़ा, निखरी, ततारपुर खालसा और भटसाना गांवों में पेयजल की गुणवत्ता खराब पाई गई थी। पिछले वर्ष बैराज में बड़ी संख्या में मछलियां भी मरी थीं। मामला एनजीटी कोर्ट में चल रहा है।
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एनजीटी में सुनवाई के दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया की रिपोर्ट में बताया गया था कि घरेलू सीवरेज के मुकाबले औद्योगिक अपशिष्ट में सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) और बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) के स्तर 9 गुना तक अधिक थे। औद्योगिक प्रदूषण से प्रभावित 5 मुख्य स्थानों पर जल की गुणवत्ता गंभीर रूप से खराब पाई गई है। एसटीपी के आउटलेट्स पर पानी की गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में असफल रही।

वर्जन

जल प्रदूषण रोकने का कार्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का है। उनकी टीम ही औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई कर सकती है। हमने जल अपशिष्ट नियमों का उल्लंघन कर रही 169 इकाइयां चिह्नित की। -विनय चौहान, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग।

वर्जन
बोर्ड ने 142 औद्योगिक इकाइयों की जांच की थी, जो ठीक मिली थीं। जिन 169 इकाइयों की बात जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग कर रहा है, उन पर कार्रवाई खुद ही विभाग को करनी चाहिए। क्योंकि उनके सीवर सिस्टम में पानी छोड़ा जा रहा है।-हरीश, आरओ, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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