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सूरज स्कूल पर साढ़े पंद्रह हजार का जुर्माना
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Tue, 22 Mar 2016 12:34 AM IST
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रेवाड़ी। कक्षा पांचवीं की छात्रा आयुषि उर्फ अंजली एवं पहली कक्षा के छात्र लक्ष्य की 2013 में मांगी गई एसएलसी में देरी करने के मामले में उपभोक्ता फोरम ने सूरज स्कूल को दस हजार रुपये कंपनसेशन देने का फैसला सुनाया है। इसके अलावा 5500 रुपये लिटीगेशन खर्च शिकायतकर्ता को देने का आदेश दिया है।
सरस्वती विहार निवासी खुशीराम ने बताया कि 16 मार्च 2013 में उसने अपनी बेटी के स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट के लिए दिल्ली रोड स्थित सूरज स्कूल में अप्लाई किया था। स्कूल ने उन्हें एसएलसी के लिए 100 रुपये जमा करने लिए कहा। इसकी कोई रसीद भी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि स्कूल के कई चक्कर काटने के बावजूद इसके उन्हें एसएलसी नहीं दी गई।
इसके बाद उन्होंने डीईईओ को पत्र लिखा गया,लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। उन्होंने बताया कि स्कूल प्रिंसिपल की ओर से उपभोक्ता फोरम में 24 फरवरी को ओरिजनल एसएलसी को उपभोक्ता फोरम में जमा कराया। खुशीराम ने बताया कि शिक्षा स्कूल एवं शिक्षा विभाग के चक्कर काटने के बाद उसने 6 फरवरी 2014 को उपभोक्ता फोरम में सूरज स्कूल के प्रिंसिपल ओपी यादव ,स्कूल के डायरेक्टर हरीश प्रसाद एवं जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ शिकायत दी।
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उपभोक्ता फोरम की ओर से सभी पक्षों को एक साल की सुनवाई के बाद 11 मार्च को अपने फैसले में सूरज स्कूल के प्रिंसिपल ओपी यादव और डायरेक्टर हरीश यादव को एसएलसी में देने में देरी मानते हुए दस हजार रुपये कंपनसेशन एवं 5500 रुपये लिटिगेशन खर्च का फाइन लगाया है। फोरम की ओर से दिए गए निर्णय में यदि शिकायतकर्ता को एक माह के अंदर यह राशि नहीं दी गई तो 9 फीसदी ब्याज के साथ यह राशि वसूली जाएगी।
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वर्जन-
उपभोक्ता फोरम के निर्णय की कॉपी नहीं देखी है। देखने के बाद बताएंगे आगे क्या निर्णय लेना है।
-ओपी यादव, प्रिंसिपल सूरज स्कूल, रेवाड़ी।
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सरस्वती विहार निवासी खुशीराम ने बताया कि 16 मार्च 2013 में उसने अपनी बेटी के स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट के लिए दिल्ली रोड स्थित सूरज स्कूल में अप्लाई किया था। स्कूल ने उन्हें एसएलसी के लिए 100 रुपये जमा करने लिए कहा। इसकी कोई रसीद भी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि स्कूल के कई चक्कर काटने के बावजूद इसके उन्हें एसएलसी नहीं दी गई।
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इसके बाद उन्होंने डीईईओ को पत्र लिखा गया,लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। उन्होंने बताया कि स्कूल प्रिंसिपल की ओर से उपभोक्ता फोरम में 24 फरवरी को ओरिजनल एसएलसी को उपभोक्ता फोरम में जमा कराया। खुशीराम ने बताया कि शिक्षा स्कूल एवं शिक्षा विभाग के चक्कर काटने के बाद उसने 6 फरवरी 2014 को उपभोक्ता फोरम में सूरज स्कूल के प्रिंसिपल ओपी यादव ,स्कूल के डायरेक्टर हरीश प्रसाद एवं जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ शिकायत दी।
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उपभोक्ता फोरम की ओर से सभी पक्षों को एक साल की सुनवाई के बाद 11 मार्च को अपने फैसले में सूरज स्कूल के प्रिंसिपल ओपी यादव और डायरेक्टर हरीश यादव को एसएलसी में देने में देरी मानते हुए दस हजार रुपये कंपनसेशन एवं 5500 रुपये लिटिगेशन खर्च का फाइन लगाया है। फोरम की ओर से दिए गए निर्णय में यदि शिकायतकर्ता को एक माह के अंदर यह राशि नहीं दी गई तो 9 फीसदी ब्याज के साथ यह राशि वसूली जाएगी।
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वर्जन-
उपभोक्ता फोरम के निर्णय की कॉपी नहीं देखी है। देखने के बाद बताएंगे आगे क्या निर्णय लेना है।
-ओपी यादव, प्रिंसिपल सूरज स्कूल, रेवाड़ी।