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सीएम ने मांगा वक्त, किसानों का 31 तक का अल्टीमेटम

Fri, 15 Jan 2016 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी Updated Fri, 15 Jan 2016 11:51 PM IST
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CM gave Assurance to matter solve to farmer
शहर के बाईपास से एनएच-8 तक प्रस्तावित 120 मीटर चौड़ी सड़क के लिए चार गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहण का मामले पर बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री ने रेवाड़ी के प्रतिनिधिमंडल के समक्ष विस्तृत चर्चा की।
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उन्होंने कुछ वक्त मांगते हुए किसानों के हित में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं शुक्रवार को प्रतिनिधिमंडल में शामिल डॉ. अरविंद यादव और गुरदयाल नंबरदार की मौजूदगी में सरकार का पक्ष सुनने के बाद किसानों ने आश्वासन पर धरना स्थगित करते हुए 31 जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया है।
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 किसानों के धरनास्थल पर शुक्रवार सुबह पहुंचे डॉ.अरविंद यादव और गुरदयाल नंबरदार ने बताया कि उनके अलावा पीडब्लूडी मंत्री राव नरबीर सिंह समेत 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बृहस्पतिवार शाम को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से गुड़गांव में मिला।
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यहां उन्होंने रेवाड़ी बाईपास से एनएच-8 तक प्रस्तावित सड़क के लिए भूमि अधिग्रहण बिल पर संशोधन की बात मंडल ने सीएम के सामने रखी। डॉ.अरविंद यादव के अनुसार सीएम ने मामले में नक्शे व अन्य जानकारी हासिल करते हुए कुछ समय मांगा और कहा कि सरकार जो भी निर्णय लेगी वह किसान के हितों के लिए ही होगी। इस पर किसानों ने भी धरना 31 जनवरी तक के लिए स्थगित करने की बात कहते किसानों ने अल्टीमेटम भी दिया कि उनके साथ धोखा होने की स्थिति में किसान भूख हड़ताल और आमरण अनशन पर भी जा सकते हैं।

बिना लिखित कैसे मानें आश्वासन
किसानों के साथ धरनास्थल पर मौजूद कामरेड राजेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों के साथ पहले भी आश्वासन के नाम पर पिछली सरकारें धोखा कर चुकी हैं। तब भाजपा किसानों के साथ थी और आश्वासन को लिखित रुप से मांगा था।

अब भाजपा को भी किसानों को लिखित आश्वासन देना चाहिए क्योंकि दूध का जला छाछ भी फूंक कर पीता है। इस बात का जवाब देते हुए डॉ.अरविंद यादव ने कहा कि जब बेटी की शादी सिर्फ मौखिक तौर पर विश्वास से कर दी जाती है तो जमीन के मामले में भी विश्वास किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोई साल दो साल की बात नहीं है जो लिखित में आश्वासन चाहिए। अगले कुछ दिनों में ही सब कुछ किसानों के पक्ष में हो जाएगा।
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दो करोड़ रुपये कम से कम हो मुआवजा
किसानों के साथ बैठे अजय पटौदा और कर्ण सिंह एडवोकेट ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सरकार महज कुछ लाख बढ़ाकर अपने वादे को भी पूरा कर दे और किसानों को कोई लाभ न हो।


इन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि कम से कम 2 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के अवार्ड की घोषणा होनी चाहिए। वहीं किसानों का पक्ष रख रहे कौनसीवास निवासी गजराज सिंह ने कहा कि सरकार पर विश्वास कर धरना स्थगित कर रहे हैं। सरकार ने धोखा किया तो किसान धरना ही नहीं बल्कि भूख हड़ताल और आमरण अनशन भी कर सकते हैं।
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