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शहर से 6 माह में 338 बंदर पकड़कर फिरोजपुर झिरका छोड़े, नहीं मिली निजात

Thu, 05 Aug 2021 11:33 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 05 Aug 2021 11:33 PM IST
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Capturing 338 monkeys from the city and leaving Firozpur Jhirka, did not get relief
शहर में बंदारों के आतंक से परेशान लोग। - फोटो : Rewari
रेवाड़ी। शहर में बंदरों व कुत्तों के आतंक से शहरवासी परेशान हैं। बंदरों के चलते लोग छतों पर आने से डरते हैं। वहीं गलियों में आवारा कुत्तों के काटने का डर रहता है। हालांकि नगर परिषद की ओर से बीते 6 माह में 338 बंदर पकड़कर फिरोजपुर झिरका छोड़ने का दावा किया जा रहा है। लेकिन सेक्टर-3 में अभी तक बंदरों का आतंक कम नहीं हुआ है। दूसरी ओर आवारा कुत्तों की नसबंदी व रेबीज के टीके लगाने के लिए नगर परिषद की ओर से टेंडर तक नहीं किया जा सका है। ऐसे में लोगों को इनसे निजात कैसे मिलेगी। जिले में कुत्तों का खौफ इस कदर फैला हुआ कि प्रत्येक दिन 55 से 60 लोग इनका शिकार बन रहे हैं। अकेले शहर के नागरिक अस्पताल में प्रत्येक दिन औसतन 20-25 लोग कुत्ता काटने के बाद टीका लगवाने पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ दिनों पहले कोसली क्षेत्र के एक गांव में कुत्ता काटने से मौत के अलावा कई लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। लेकिन अभी तक जिला स्तर पर कुत्तों की नसबंदी की भी कोई योजना नहीं बन पाई है।
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बंदरों को पकड़ने के बाद कराना होता है मेडिकल
नगर परिषद की ओर से बंदर पकड़ने के बाद जरूरी है कि उनका मेडिकल कराया जाए। नप की ओर से पशुपालन विभाग के पास जाकर पकड़े गए बंदरों का मेडिकल कराने के बाद ही इनको दूर वन क्षेत्र में छोड़ा जा सकता है। वहीं दूसरी ओर यदि पालतू कुत्ता काटता है तो तीन इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। यदि कुत्ता आवारा है तो 0, 3, 7, 14 व 28 दिन के दिन के अंतराल पर पांच टीके लगवाने पड़ते हैं। अकेले शहर में आवारा कुत्तों की संख्या 10 हजार से अधिक हैं। यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन नगर परिषद के पास इन कुत्तों पर अंकुश लगाने के लिए कोई योजना नहीं है।
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नागरिक अस्पताल के फार्मासिस्ट उदय सिंह ने बताया कि नागरिक अस्पताल में प्रत्येक दिन औसतन 20-25 कुत्ते काटने के पीड़ित आते हैं। अन्य सीएचसी व पीएचसी के नंबर जोड़ दिए जाएं तो यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा। पालतू कुत्ते से काटने पर तीन व आवारा कुत्ते के काटने पर पांच डोज लगाई जाती है। नागरिक अस्पताल में पर्याप्त डोज हैं।
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इधर, नप के मुख्य सफाई निरीक्षक संदीप कुमार ने बताया कि बीते 6 माह में 338 बंदर पकड़कर मेडिकल कराने के बाद फिरोजपुर झिरका छोड़े जा चुके हैं। यदि कहीं पर लोगों की परेशानी है तो नप कार्यालय में शिकायत दी जा सकती है। बंदरों को पकड़ा जाएगा। वहीं कुत्तों की नसबंदी व उनको टीका लगाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही टेंडर होगा, कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू कर दिया जाएगा।
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