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लालच+झूठा मुकदमा+पुलिस की जल्दबाजी=बेगुनाहों को सजा

Wed, 27 Jul 2016 11:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
ब्यूरो/अमर उजाला Updated Wed, 27 Jul 2016 11:19 PM IST
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bogas, case, report, jail to inocent, investigation, police, gang rape, blame to father and brother
Jail - फोटो : फाइल फोटो
दहेज का लालच, झूठे मुकदमे और पुलिस की जल्दबाजी में बेगुनाह पिता-पुत्र को उनकी विवाहिता बेटी के साथ ही दुष्कर्म जैसे घृणित आरोप में डेढ़ महीने की सजा काटनी पड़ी। सजा और भी लंबी हो सकती थी अगर एक समाजसेवी की नजर इस मामले पर न पड़ती और पूरा मामला आईजी दक्षिण रेंज के सामने न पहुंचता। आईजी के हस्तक्षेप के बाद जो सच्चाई सामने आई, वह हैरान करने वाली थी। जांच में सामने आया कि पिता-पुत्र के ऊपर लगा मुकदमा झूठा था और इसका सूत्रधार विवाहिता का पति था। जिसने दहेज के लालच में यह सब किया था। अब नारनौल महिला थाने में नव विवाहिता की ही शिकायत पर पति समेत ससुरालीजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।
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लाखों रुपये से हुई शादी 6 महीने में ही हुई बर्बाद
नारनौल निवासी एक शख्स ने अपनी बेटी की शादी जनवरी 2016 में मूल रूप से अलवर और हाल में नारनौल के ही एक गांव में रहने वाले मोहन से की। शादी में लाखों रुपये खर्च करने के अलावा कार के लिए 4.5 लाख रुपये दिए गए थे। लेकिन मांग थी 10.50 लाख रुपये की कार की। आरोप है कि मांग पूरी नहीं हुई तो नशीले पदार्थ खिला-पिलाकर ससुराल पक्ष ने नवविवाहिता से उसके ही पिता-भाई और एक अन्य शख्स के खिलाफ गैंगरेप और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया। उनकी उसी दिन ही गिरफ्तारी हो गई और विवाहिता के पिता और एक भाई को जेल में डाल दिया गया।
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समाजसेवी ने बचाई पांच जिंदगियां
राजस्थान के कोटपूतली निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता राव धनबीर को मामले का पता चला। उन्होंने आईजी से संपर्क किया। एसपी नारनौल को संपर्क में लेकर डीएसपी बिरम सिंह से मामले की जांच कराई गई तो पता चला कि पिता-पुत्र समेत परिजनों पर लगे आरोप गलत हैं। मुकदमे से परिजनों के नाम हटाने की अनुशंसा महिला एसएचओ ने कोर्ट में की। वहीं पीड़िता को ससुराल वालों के चंगुल से छुड़ाया। पूछताछ में पता चला कि नशा और डर दिखाकर उससे पिता और भाई समेत परिजनों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करवाया गया था। इसके बाद नवविवाहिता को उसके मायके पक्ष के सुपुर्द कर दिया गया।
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कराया था गर्भपात, होता था कुकर्म
पीड़िता ने बताया कि शादी के चार महीने बाद उसका तीन महीने 12 दिन का गर्भ ससुरालपक्ष ने जबरन गिरवा दिया था। इसमें सास, मामा ससुर रमेश और अन्य लोग शामिल थे। यही नहीं उसके साथ उसका पति मनोज उसके साथ कुकर्म करता था। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर आरोपी पति समेत ससुरालीजनों के खिलाफ कुकर्म, गर्भपात समेत सात धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।


लेकिन समाज की उपेक्षा से रह रहे बाहर
भले ही इस मामले में समाजसेवी और आईजी के हस्तक्षेप के बाद पिता-पुत्र को खूनी रिश्ते में ही दुष्कर्म के झूठे मामले से छुटकारा मिल गया हो, लेकिन सामाजिक उपेक्षा के वे शिकार बने हुए हैं। हालात यह हैं पूरा परिवार नवविवाहिता बेटी को लेकर रेवाड़ी के एक गांव में अपने रिश्तेदार के यहां रह रहे हैं। कारण कि गांव जाने पर उन्हें लोग उपेक्षा की नजर से देखते हैं। पीड़िता की मां का कहना है कि अगर महिला थाना एसएचओ मामले में जल्दबाजी कर गिरफ्तारी न करती तो उनकी सामाजिक जिंदगी बर्बाद न होती।
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