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Rewari News: कृषि अनुसंधान केंद्र में स्थापित होगी बायो कंट्रोल लैब, जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा
Sun, 29 Dec 2024 12:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 29 Dec 2024 12:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बावल स्थित क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र में बायो कंट्रोल लैब स्थापित करने की तैयारी चल रही है। रिसर्च सेंटर की ओर से लैब खोलने को लेकर प्रोजेक्ट तैयार करके हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय को भेज दिया गया है।
अगले साल 2025 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल सकती है। इसके साथ ही केंद्र की लैब में उपकरणों को भी हाइटेक किया जा रहा है। इसके बाद और बेहतर तरीके से रिसर्च हो सकेगी। केंद्र की लैब में 1 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से उपकरण दुरुस्त किए जा रहे हैं। प्रयोगशाला के उपकरण आधुनिक होने से रिसर्च कार्य में तेजी आएगी। साथ ही बेहतर तरीके से रिसर्च हो सकेगा। इससे अनुसंधान कार्यों में सुधार आएगा। यह कार्य भी जल्द पूरा हो जाएगा।
जैविक खेती के लिए इस लैब में दीमक, उखेड़ा रोग व फफूंदी रोग के नियंत्रण के लिए जीवाणुओं का उत्पादन किया जाएगा। इन जीवाणुओं में ट्राइकोडरमा, मेटारिजियम व बवेरिया आदि शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर ही लेब में ये जीवाणु तैयार होने से जैविक खेती करने वाले किसानों को सस्ते दामों पर मिल जाएंगे। इसमें खास रहेगा कि जैविक खेती करने को किसानों के सामने जो दिक्कतें आएंगी, उनका भी समाधान होगा। जैविक खेती के लिए किसानों को लैब से बड़ी मदद मिलेगी।
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शुष्क कृषि आधारित तकनीक भी खास:
इस परियोजना के लिए केंद्र को 1 करोड़ 55 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है। इसमें रेवाड़ी जैसे जिले जिनमें कम वर्ष होती है, वहां पर किसानों को नई तकनीक से कैसे खेती करें, इसके लिए उनको बताया जाएगा। किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के बारे में बताया जाता है। ताकि कम वर्षा वाली जगह पर भी अच्छा उत्पादन हो सके।
हाइटेक नर्सरी में पौधे रहेंगे संरक्षित:
हॉर्टीकल्चर (फलदार) पौधों के लिए भी हाइटेक नर्सरी बनाने की तैयारी चल रही है। इसमें शेड नेट और पॉली हाउस बनेगा। जिसमें पौधे संरक्षित रहेंगे। विपरीत मौसम में भी पौधे बेहतर बनेंगे। फुटाव अच्छा रहेगा। इसमें पानी भी ड्रिप, माइक्रो सूक्ष्म तरीके से होगा। इसके लिए 1 करोड़ रुपये मंजूर हो चुके हैं।
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वर्जन
लैब में उपकरण दुरुस्त करने का कार्य चल रहा है। बाकी रहे प्रोजेक्ट भी जल्द ही धरातल पर उतारने की तैयारी है। बायो कंट्रोल लैब के लिए विश्वविद्यालय को प्रस्ताव भेजा हुआ है। नर्सरी, शुष्क कृषि तकनीक का बजट मंजूर हो गया है। उम्मीद है इन प्रोजेक्ट के पूरा होने पर जिले के किसानों को बड़ा फायदा मिलेगा।
- डॉ. धर्मबीर यादव, डायरेक्टर, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल
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रेवाड़ी। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बावल स्थित क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र में बायो कंट्रोल लैब स्थापित करने की तैयारी चल रही है। रिसर्च सेंटर की ओर से लैब खोलने को लेकर प्रोजेक्ट तैयार करके हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय को भेज दिया गया है।
अगले साल 2025 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल सकती है। इसके साथ ही केंद्र की लैब में उपकरणों को भी हाइटेक किया जा रहा है। इसके बाद और बेहतर तरीके से रिसर्च हो सकेगी। केंद्र की लैब में 1 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से उपकरण दुरुस्त किए जा रहे हैं। प्रयोगशाला के उपकरण आधुनिक होने से रिसर्च कार्य में तेजी आएगी। साथ ही बेहतर तरीके से रिसर्च हो सकेगा। इससे अनुसंधान कार्यों में सुधार आएगा। यह कार्य भी जल्द पूरा हो जाएगा।
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जैविक खेती के लिए इस लैब में दीमक, उखेड़ा रोग व फफूंदी रोग के नियंत्रण के लिए जीवाणुओं का उत्पादन किया जाएगा। इन जीवाणुओं में ट्राइकोडरमा, मेटारिजियम व बवेरिया आदि शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर ही लेब में ये जीवाणु तैयार होने से जैविक खेती करने वाले किसानों को सस्ते दामों पर मिल जाएंगे। इसमें खास रहेगा कि जैविक खेती करने को किसानों के सामने जो दिक्कतें आएंगी, उनका भी समाधान होगा। जैविक खेती के लिए किसानों को लैब से बड़ी मदद मिलेगी।
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शुष्क कृषि आधारित तकनीक भी खास:
इस परियोजना के लिए केंद्र को 1 करोड़ 55 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है। इसमें रेवाड़ी जैसे जिले जिनमें कम वर्ष होती है, वहां पर किसानों को नई तकनीक से कैसे खेती करें, इसके लिए उनको बताया जाएगा। किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के बारे में बताया जाता है। ताकि कम वर्षा वाली जगह पर भी अच्छा उत्पादन हो सके।
हाइटेक नर्सरी में पौधे रहेंगे संरक्षित:
हॉर्टीकल्चर (फलदार) पौधों के लिए भी हाइटेक नर्सरी बनाने की तैयारी चल रही है। इसमें शेड नेट और पॉली हाउस बनेगा। जिसमें पौधे संरक्षित रहेंगे। विपरीत मौसम में भी पौधे बेहतर बनेंगे। फुटाव अच्छा रहेगा। इसमें पानी भी ड्रिप, माइक्रो सूक्ष्म तरीके से होगा। इसके लिए 1 करोड़ रुपये मंजूर हो चुके हैं।
वर्जन
लैब में उपकरण दुरुस्त करने का कार्य चल रहा है। बाकी रहे प्रोजेक्ट भी जल्द ही धरातल पर उतारने की तैयारी है। बायो कंट्रोल लैब के लिए विश्वविद्यालय को प्रस्ताव भेजा हुआ है। नर्सरी, शुष्क कृषि तकनीक का बजट मंजूर हो गया है। उम्मीद है इन प्रोजेक्ट के पूरा होने पर जिले के किसानों को बड़ा फायदा मिलेगा।
- डॉ. धर्मबीर यादव, डायरेक्टर, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल