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Rewari News: नौकरी दिलाने के नाम पर 4.50 लाख रुपये की ठगी के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
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रेवाड़ी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सौरभ कुमार की अदालत ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 4.50 लाख रुपये की ठगी करने के आरोपी बहरोड़ निवासी भूपेंद्र सिंह की पहली नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।
शिकायतकर्ता राहुल कुमार ने बताया कि गांव के एक व्यक्ति ने उनकी पहचान भूपेंद्र सिंह से कराई थी। आरोपी ने दावा किया कि उसके वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क हैं और वह दिल्ली नगर निगम में सुपरवाइजर पद पर नौकरी दिला सकता है।
भरोसा कर हमने आरोपी के खाते में 4 लाख रुपये ट्रांसफर किए और 50 हजार रुपये नकद दिए। बाद में आरोपी ने एनडीएमसी नई दिल्ली के नाम से कथित नियुक्ति पत्र भी सौंपे जो जांच में फर्जी पाए गए।
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एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी ने 40 हजार रुपये वापस किए और शेष राशि का चेक दिया जो बाउंस हो गया। पुलिस ने 29 दिसंबर 2025 को आरोपी को गिरफ्तार किया था।
मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को झूठा फंसाने की दलील दी जबकि अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगी की है।
अदालत ने रिकॉर्ड और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं और जांच अभी लंबित है। ऐसे में आरोपी को जमानत देने से गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इस आधार पर अदालत ने 26 फरवरी को आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दी।
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शिकायतकर्ता राहुल कुमार ने बताया कि गांव के एक व्यक्ति ने उनकी पहचान भूपेंद्र सिंह से कराई थी। आरोपी ने दावा किया कि उसके वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क हैं और वह दिल्ली नगर निगम में सुपरवाइजर पद पर नौकरी दिला सकता है।
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भरोसा कर हमने आरोपी के खाते में 4 लाख रुपये ट्रांसफर किए और 50 हजार रुपये नकद दिए। बाद में आरोपी ने एनडीएमसी नई दिल्ली के नाम से कथित नियुक्ति पत्र भी सौंपे जो जांच में फर्जी पाए गए।
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एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी ने 40 हजार रुपये वापस किए और शेष राशि का चेक दिया जो बाउंस हो गया। पुलिस ने 29 दिसंबर 2025 को आरोपी को गिरफ्तार किया था।
मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को झूठा फंसाने की दलील दी जबकि अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगी की है।
अदालत ने रिकॉर्ड और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं और जांच अभी लंबित है। ऐसे में आरोपी को जमानत देने से गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इस आधार पर अदालत ने 26 फरवरी को आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दी।