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आयुष्मान कार्ड से सरकारी अस्पताल में ही हो पाएगा मलेरिया और डेंगू का इलाज
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आयुष्मान कार्ड से मच्छर जनित बीमारी मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया का इलाज निजी अस्पतालों में नहीं हो पाएगा। इन बीमारियों का इलाज आयुष्मान कार्ड से केवल सरकारी अस्पतालों में ही मिल पाएगा।
सरकार की ओर से आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत करीब 1350 चिकित्सा पैकेज तैयार किए हैं। पैकज से मतलब बीमारी और उसके इलाज के लिए केेंद्र सरकार की ओर से अस्पतालों को दी जाने वाली राशि से है। इन पैकज में से करीब 150 पैकेज अर्थात इतनी ही संख्या में बीमारियों का उपचार केवल सरकारी अस्पताल में ही आयुष्मान के तहत मिल सकता है। निजी अस्पतालों में इसकी सुविधा नहीं मिलेगी। निजी अस्पतालों में अधिकतर बड़ी व गंभीर बीमारियों को रखा गया है। ऐसे में बीते कई दिनों से पाठकों की ओर से इन बीमारियों के उपचार के बारे में पूछा जा रहा था। लोगों के सवाल थे कि प्राइवेट अस्पताल में इन बीमारियों का उपचार नहीं किया जा रहा है।
बावल का एक भी निजी अस्पताल योजना से नहीं जुड़ा
आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत जिला के 45 हजार परिवार लाभार्थियों की सूची में शामिल हैं। हालांकि कार्ड अभी तक महज 20 हजार परिवारों के ही बन पाये हैं। जिला में 100 से अधिक प्राइवेट अस्पताल होने के बावजूद एक साल के दौरान योजना से महज 11 अस्पताल ही जुड़ सके हैं। इनमें बावल क्षेत्र का एक भी निजी अस्पताल शामिल नही है। ऐसे में मरीजों को योजना के तहत उपचार के लिए रेवाड़ी ही आना पड़ रहा है। कोसली में भी एक आंखों के अस्पताल को छोड़ दिया जाये तो अन्य अस्पताल योजना से नहीं जुड़ सके हैं।
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सरकारी अस्पतालों में योजना के तहत करा सकते हैं उपचार
आयुष्मान भारत के जिला नोडल अधिकारी डॉ. टीसी तंवर ने कहा कि करीब 150 बीमारियों का उपचार सरकारी अस्पतालों में ही कराया जा सकता है। आयुष्मान के तहत मलेरिया व डेंगू जैसी बीमारियों का उपचार शहर के नागरिक अस्पताल में कराया जा सकता है। निजी अस्पतालों में आयुष्मान के तहत ये लाभ नहीं मिल पायेगा। उन्होंने कहा कि सभी बड़ी बीमारियों के लिए निजी अस्पताल शामिल हैं। 11 अस्पताल के अलावा 4 अस्पतालों के आवेदन आए हैं। जल्द ही चार अस्पताल भी इस योजना से जुड़ जायेंगे।
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सरकार की ओर से आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत करीब 1350 चिकित्सा पैकेज तैयार किए हैं। पैकज से मतलब बीमारी और उसके इलाज के लिए केेंद्र सरकार की ओर से अस्पतालों को दी जाने वाली राशि से है। इन पैकज में से करीब 150 पैकेज अर्थात इतनी ही संख्या में बीमारियों का उपचार केवल सरकारी अस्पताल में ही आयुष्मान के तहत मिल सकता है। निजी अस्पतालों में इसकी सुविधा नहीं मिलेगी। निजी अस्पतालों में अधिकतर बड़ी व गंभीर बीमारियों को रखा गया है। ऐसे में बीते कई दिनों से पाठकों की ओर से इन बीमारियों के उपचार के बारे में पूछा जा रहा था। लोगों के सवाल थे कि प्राइवेट अस्पताल में इन बीमारियों का उपचार नहीं किया जा रहा है।
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बावल का एक भी निजी अस्पताल योजना से नहीं जुड़ा
आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत जिला के 45 हजार परिवार लाभार्थियों की सूची में शामिल हैं। हालांकि कार्ड अभी तक महज 20 हजार परिवारों के ही बन पाये हैं। जिला में 100 से अधिक प्राइवेट अस्पताल होने के बावजूद एक साल के दौरान योजना से महज 11 अस्पताल ही जुड़ सके हैं। इनमें बावल क्षेत्र का एक भी निजी अस्पताल शामिल नही है। ऐसे में मरीजों को योजना के तहत उपचार के लिए रेवाड़ी ही आना पड़ रहा है। कोसली में भी एक आंखों के अस्पताल को छोड़ दिया जाये तो अन्य अस्पताल योजना से नहीं जुड़ सके हैं।
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सरकारी अस्पतालों में योजना के तहत करा सकते हैं उपचार
आयुष्मान भारत के जिला नोडल अधिकारी डॉ. टीसी तंवर ने कहा कि करीब 150 बीमारियों का उपचार सरकारी अस्पतालों में ही कराया जा सकता है। आयुष्मान के तहत मलेरिया व डेंगू जैसी बीमारियों का उपचार शहर के नागरिक अस्पताल में कराया जा सकता है। निजी अस्पतालों में आयुष्मान के तहत ये लाभ नहीं मिल पायेगा। उन्होंने कहा कि सभी बड़ी बीमारियों के लिए निजी अस्पताल शामिल हैं। 11 अस्पताल के अलावा 4 अस्पतालों के आवेदन आए हैं। जल्द ही चार अस्पताल भी इस योजना से जुड़ जायेंगे।