{"_id":"5864053f4f1c1b132ceebdbc","slug":"atm-bank-cash-cutomer-rewari-line","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोटबंदी के 50 दिन पूरे, नहीं टूटी बैंक-एटीएम पर कतार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नोटबंदी के 50 दिन पूरे, नहीं टूटी बैंक-एटीएम पर कतार
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Thu, 29 Dec 2016 12:12 AM IST
विज्ञापन
पैसा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के बाद भी बैंकों और एटीएम बूथों पर विपरीत असर देखने को मिल रहा है। बुधवार को शहरभर के चालू एटीएम बूथों पर पहले जैसी ही भीड़ दिखी, तो कई बैंक शाखाओं में उपभोक्ता कैश के लिए परेशान होते दिखे।जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने 50 दिन में सब कुछ ठीक हो जाने और कैश किल्लत खत्म हो जाने की बात कही थी। धरातल पर यह बात सही साबित नहीं हुई।
विशेषकर एटीएम बूथों पर हालात जस से तस नहीं सुधरे हैं। बाजार से लेकर आम उपभोक्ता के घर तक नोटबंदी का असर अब भी बरकरार है। इसकी बड़ी वजह नई करेंसी का पूरी तरह सर्कुलेट नहीं होना भी है। बहुत से व्यापारियों व उपभोक्ताओं ने नई करेंसी लेकर जमा कर ली है। जिससे नई करेंसी का आदान प्रदान कम हुआ है।
एटीएम लाइनें नहीं टूटी
पिछले 50 दिनों से एटीएम बूथों की कतारें इंचभर भी कम नहीं हुई है। जिलेभर में कुल 172 एटीएम में से केवल 55 के लगभग एटीएम मशीनें ही चल रही हैं। इनमें भी 50 दिनों में एक भी दिन पर्र्याप्त कैश नहीं डला।
विज्ञापन
बैंकों में खास सुधार नहीं
जिले की बैंक शाखाओं से उपभोक्ताओं को पर्याप्त कैश नहीं मिला है। बुधवार को बैंक शाखाओं में हालात अधिक खराब थे। राजेश पॉयलट चौक स्थित एसबीआई ब्रांच में उपभोक्ताओं को दोपहर बाद कैश नहीं मिला। जिसके चलते कुछ ग्राहकों की बैंककर्मियों के साथ गहमा-गहमी भी हुई। इसके अलावा महाराणा प्रताप चौक स्थित विजया बैंक में भी उपभोक्ताओं को 1 बजे बाद कैश नहीं मिल पाया। वहीं ब्रांच के साथ सटा एटीएम बूथ भी बंद था। अनाजमंडी स्थित पीएनबी शाखा में भी पर्याप्त कैश उपलब्ध नहीं था। वहीं ब्रांच से सटी एटीएम मशीन भी आउट ऑफ कैश रही।
बाजार में हालात थोड़े सामान्य
बाजारों में नोटबंदी के शुरूआती दिनों की तुलना में हालात थोड़े सामान्य जरूर हुए हैं, लेकिन पूरी तरह सुधरे नहीं है। एक महीने में मात्र 20 फीसदी दुकादारी ही बढ़ पाई है। नई करेंसी की किल्लत के चलते ग्राहक लिमिटेड खरीददारी ही कर रहे हैं। नए वर्ष के लिहाज से भी बाजारों में फिलहाल कोई खास रौनक नहीं है। लेकिन व्यापारियों का कहना है कि अब लोग नए नोट लेकर खरीददारी करने पहुंच रहे हैं। हालांकि ग्राहकों की पहली पसंद कैशलेस पेमेंट करना है। मगर स्वाइप मशीनों की उपलब्धता में लग रहा टाइम कैशलेस ट्रांजेक्शन में रोड़ा है।
सरकारी दफ्तरों में नहीं लगी स्वाइप मशीनें
स्वाइप मशीनों के एक साथ अधिक ऑर्डर आ जाने से मशीनों की पर्याप्त उपलब्धता करवाना मुश्किल हो गया है। बैंककर्मियों का कहना है कि अभी मशीन पहुंचने में 20 दिन और लगेंगे। वहीं सरकारी कार्यालयों के लिए भी 275 स्वाइप मशीनों के ऑर्डर दिए हुए हैं। नए वर्ष की शुरूआत में दफ्तरों में एसबीआई बैंक की ओर से मशीनें लगनी शुरू हो जाएंगी।
----------
वर्जन
नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के बाद भी बैंकों में कैश की किल्लत है। मैं बुधवार पॉयलट चौक स्थित एसबीआई ब्रांच में 10 हजार रुपये निकालने करने गया था, लेकिन लेकिन बैक कर्मचारियों ने कैश खत्म होने का हवाला देकर वापस लौटा दिया।
ओमबीर पटेल, शिक्षक, सेक्टर-4
--------
मैं अपने घरेलू खर्चे के लिए दोपहर 1 बजे विजय बैंक शाखा में पैसे निकालने पहुंचा, तो बैंक मैनेजर ने कैश खत्म हो जाने की बात कही। वहीं ब्रांच से सटे एटीएम में गया, तो वहां भी पैसा नहीं था।
महेश, उपभोक्ता
------
उपभोक्ता कैशलेस की ओर बढ रहे हैं। बाजार में भी कैशलेस ट्रांजेक्शन के साथ हालात सामान्य होने लगे हैं। शुरूआती दिनों की तुलना में काफी सुधार हुआ है। बैंकों की चाहिए कि जल्द से जल्द व्यापारियों को स्वाइप मशीनें उपलब्ध कराएं, ताकि खरीददारी और आसान हो जाए। क्योंकि अभी केवल एंडरायड फोन यूजर्स ही ई-वॉलेट व अन्य सेवाओं के माध्यम से खरीददारी कर पा रहे हैं।
विवेक धींगड़ा, पूर्व प्रधान, गोकल बाजार एसोसिएशन
----------
बैंकों में कैश डिमांड के अनुसार नहीं पहुंच रहा है। बुधवार को पीएनबी के चेस्ट में केवल 70 लाख रुपये ही पहुंचा था। जबकि डिमांड कहीं ज्यादा है। दूसरी ओर कुछ लोग नई करेंसी बैंक से लेकर जमा कर रहे हैं। जैसे ही नई करेंसी ज्यादा जमा होने लगेगी तो कुछ स्थिति में जल्दी सुधार होगा। वहीं कैशलेस प्रणाली के लिहाज से नई करेंसी प्रिंट भी कम हो पाई है।
एसएस गुप्ता, एलडीएम, रेवाड़ी
विज्ञापन
विशेषकर एटीएम बूथों पर हालात जस से तस नहीं सुधरे हैं। बाजार से लेकर आम उपभोक्ता के घर तक नोटबंदी का असर अब भी बरकरार है। इसकी बड़ी वजह नई करेंसी का पूरी तरह सर्कुलेट नहीं होना भी है। बहुत से व्यापारियों व उपभोक्ताओं ने नई करेंसी लेकर जमा कर ली है। जिससे नई करेंसी का आदान प्रदान कम हुआ है।
विज्ञापन
एटीएम लाइनें नहीं टूटी
पिछले 50 दिनों से एटीएम बूथों की कतारें इंचभर भी कम नहीं हुई है। जिलेभर में कुल 172 एटीएम में से केवल 55 के लगभग एटीएम मशीनें ही चल रही हैं। इनमें भी 50 दिनों में एक भी दिन पर्र्याप्त कैश नहीं डला।
विज्ञापन
बैंकों में खास सुधार नहीं
जिले की बैंक शाखाओं से उपभोक्ताओं को पर्याप्त कैश नहीं मिला है। बुधवार को बैंक शाखाओं में हालात अधिक खराब थे। राजेश पॉयलट चौक स्थित एसबीआई ब्रांच में उपभोक्ताओं को दोपहर बाद कैश नहीं मिला। जिसके चलते कुछ ग्राहकों की बैंककर्मियों के साथ गहमा-गहमी भी हुई। इसके अलावा महाराणा प्रताप चौक स्थित विजया बैंक में भी उपभोक्ताओं को 1 बजे बाद कैश नहीं मिल पाया। वहीं ब्रांच के साथ सटा एटीएम बूथ भी बंद था। अनाजमंडी स्थित पीएनबी शाखा में भी पर्याप्त कैश उपलब्ध नहीं था। वहीं ब्रांच से सटी एटीएम मशीन भी आउट ऑफ कैश रही।
बाजार में हालात थोड़े सामान्य
बाजारों में नोटबंदी के शुरूआती दिनों की तुलना में हालात थोड़े सामान्य जरूर हुए हैं, लेकिन पूरी तरह सुधरे नहीं है। एक महीने में मात्र 20 फीसदी दुकादारी ही बढ़ पाई है। नई करेंसी की किल्लत के चलते ग्राहक लिमिटेड खरीददारी ही कर रहे हैं। नए वर्ष के लिहाज से भी बाजारों में फिलहाल कोई खास रौनक नहीं है। लेकिन व्यापारियों का कहना है कि अब लोग नए नोट लेकर खरीददारी करने पहुंच रहे हैं। हालांकि ग्राहकों की पहली पसंद कैशलेस पेमेंट करना है। मगर स्वाइप मशीनों की उपलब्धता में लग रहा टाइम कैशलेस ट्रांजेक्शन में रोड़ा है।
सरकारी दफ्तरों में नहीं लगी स्वाइप मशीनें
स्वाइप मशीनों के एक साथ अधिक ऑर्डर आ जाने से मशीनों की पर्याप्त उपलब्धता करवाना मुश्किल हो गया है। बैंककर्मियों का कहना है कि अभी मशीन पहुंचने में 20 दिन और लगेंगे। वहीं सरकारी कार्यालयों के लिए भी 275 स्वाइप मशीनों के ऑर्डर दिए हुए हैं। नए वर्ष की शुरूआत में दफ्तरों में एसबीआई बैंक की ओर से मशीनें लगनी शुरू हो जाएंगी।
----------
वर्जन
नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के बाद भी बैंकों में कैश की किल्लत है। मैं बुधवार पॉयलट चौक स्थित एसबीआई ब्रांच में 10 हजार रुपये निकालने करने गया था, लेकिन लेकिन बैक कर्मचारियों ने कैश खत्म होने का हवाला देकर वापस लौटा दिया।
ओमबीर पटेल, शिक्षक, सेक्टर-4
--------
मैं अपने घरेलू खर्चे के लिए दोपहर 1 बजे विजय बैंक शाखा में पैसे निकालने पहुंचा, तो बैंक मैनेजर ने कैश खत्म हो जाने की बात कही। वहीं ब्रांच से सटे एटीएम में गया, तो वहां भी पैसा नहीं था।
महेश, उपभोक्ता
------
उपभोक्ता कैशलेस की ओर बढ रहे हैं। बाजार में भी कैशलेस ट्रांजेक्शन के साथ हालात सामान्य होने लगे हैं। शुरूआती दिनों की तुलना में काफी सुधार हुआ है। बैंकों की चाहिए कि जल्द से जल्द व्यापारियों को स्वाइप मशीनें उपलब्ध कराएं, ताकि खरीददारी और आसान हो जाए। क्योंकि अभी केवल एंडरायड फोन यूजर्स ही ई-वॉलेट व अन्य सेवाओं के माध्यम से खरीददारी कर पा रहे हैं।
विवेक धींगड़ा, पूर्व प्रधान, गोकल बाजार एसोसिएशन
----------
बैंकों में कैश डिमांड के अनुसार नहीं पहुंच रहा है। बुधवार को पीएनबी के चेस्ट में केवल 70 लाख रुपये ही पहुंचा था। जबकि डिमांड कहीं ज्यादा है। दूसरी ओर कुछ लोग नई करेंसी बैंक से लेकर जमा कर रहे हैं। जैसे ही नई करेंसी ज्यादा जमा होने लगेगी तो कुछ स्थिति में जल्दी सुधार होगा। वहीं कैशलेस प्रणाली के लिहाज से नई करेंसी प्रिंट भी कम हो पाई है।
एसएस गुप्ता, एलडीएम, रेवाड़ी