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Rewari News: आशा वर्कर्स का प्रदर्शन, मानदेय बढ़ाने व श्रमिक दर्जे की मांग उठाई

Tue, 28 Oct 2025 12:31 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 28 Oct 2025 12:31 AM IST
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Asha workers protest, demand for increase in honorarium and labour status raised
फोटो : 7नेहरू पार्क में प्रदर्शन करतीं आशा वर्कर्स। संवाद
रेवाड़ी। केंद्रीय श्रमिक संगठन एआईयूटीयूसी से संबद्ध आशा वर्कर्स यूनियन ने सोमवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर नेहरू पार्क में सभा आयोजित की।
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सभा में जिले की आशा कार्यकर्ता शामिल हुईं। इस दौरान केरल के तिरुवनंतपुरम में आशा कार्यकर्ताओं पर हुए हमले की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव भी पारित किया गया।
एआईयूटीयूसी के जिला सचिव शेर सिंह मीरपुर ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को अब तक जो कुछ भी मिला है, वह उनके संघर्ष और आंदोलन की बदौलत मिला है।
सरकार तब तक उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं देती जब तक वे आंदोलन का रास्ता नहीं अपनातीं। उन्होंने कहा कि आशा वर्कर्स राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना को धरातल पर उतारती हैं लेकिन उन्हें न तो न्यूनतम वेतन मिलता है और न ही स्थायी कर्मचारी का दर्जा।
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कार्यकारी अध्यक्ष पिंकी पाड़ला ने कहा कि आशा वर्कर्स को मात्र 6100 मासिक मानदेय और कुछ प्रोत्साहन राशि दी जाती है जो आज की महंगाई के दौर में अत्यंत कम है। उन्होंने मांग की है कि आशा कार्यकर्ताओं को कम से कम 28 हजार मासिक वेतन, सामाजिक सुरक्षा, पीएफ, ग्रेजुएटी और साप्ताहिक अवकाश जैसी सुविधाएं दी जाएं।
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जिला सचिव संतोष ने कहा कि एएनएम के 25 प्रतिशत पद आशा वर्कर्स से भरे जाएं, रिटायरमेंट उम्र 65 वर्ष की जाए और सेवानिवृत्ति पर आर्थिक सहायता 5 लाख तक बढ़ाई जाए।
साथ ही यूनिफॉर्म भत्ता 2500 वार्षिक किया जाए और यदि कोई आशा नौकरी छोड़ती है तो उसे प्रशिक्षित आशा प्रमाणपत्र दिया जाए ताकि यह आगे सरकारी नौकरी के आवेदन में अतिरिक्त योग्यता के रूप में मान्य हो। प्रदर्शन का नेतृत्व यूनियन की जिला प्रधान सुषमा यादव ने किया जबकि संचालन जिला सचिव संतोष ने किया।
प्रदर्शन में पूनम हांसाका, शकुंतला, कृष्णा, अनीता देवी, मीना, लता देवी, सुनीता वर्मा, सावित्री, महावती सहित आशा कार्यकर्ता शामिल हुईं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को शीघ्र नहीं माना गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

मांगों को शीघ्र नहीं माना गया तो आंदोलन होगा तेज
विजयलक्ष्मी ने कहा कि यदि प्रसूता महिला की डिलीवरी निजी अस्पताल में होती है तो उसके लिए आशा वर्कर को दोषी न ठहराया जाए और डिलीवरी मद की राशि उन्हें दी जाए। सभा को किसान नेता रामकुमार नीमोठ और महेंद्र चौहान ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार को मिशन डायरेक्टर के साथ हुई पिछली सहमति के बिंदुओं आशा विश्राम गृह निर्माण, टैब वितरण और इंसेंटिव दोगुना करने को तुरंत लागू करना चाहिए।
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