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तन से पहले मन पर सब होली के रंग चढ़ाएं : प्रो. रमेशचंद्र शर्मा
Fri, 06 Mar 2026 12:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 06 Mar 2026 12:24 AM IST
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रेवाड़ी। आपसी प्रेम, सौहार्द और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रतीक होली पर्व को लेकर शहर में काव्य फुहारों के बीच साहित्य प्रेमियों ने होली मिलन उत्सव मनाया।
नाईवाली चौक स्थित सैंडपाइपर रेस्टोरेंट में हिंदी सेवा समिति रेवाड़ी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रमेशचंद्र शर्मा ने कहा कि होली मन और तन को स्वच्छ रखकर आपसी प्रेम से गले मिलने का पर्व है। उन्होंने कहा कि होली का संदेश है कि पहले मन को स्वच्छ करें और फिर तन पर रंग चढ़ाएं।
कार्यक्रम के दौरान कवि त्रिलोक चंद फतेहपुरी के काव्य संग्रह काव्य मंथन का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि हलचल हरियाणवी ने अपने हास्य-व्यंग्य से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और फागुन की मस्ती बिखेरी। उन्होंने होली पर आधारित अपनी रचनाओं से माहौल को उत्साह से भर दिया।
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काव्य गोष्ठी में डॉ. देवीराम शर्मा, गौतम इलाहाबादी, गोपाल वसिष्ठ और राजेश भुलक्कड़ ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर कटाक्ष करते हुए प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी धर्मवीर सिंह बल्डोदिया ने भी अपनी कविता के माध्यम से समाज में सौहार्द और एकता का संदेश दिया।
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नाईवाली चौक स्थित सैंडपाइपर रेस्टोरेंट में हिंदी सेवा समिति रेवाड़ी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रमेशचंद्र शर्मा ने कहा कि होली मन और तन को स्वच्छ रखकर आपसी प्रेम से गले मिलने का पर्व है। उन्होंने कहा कि होली का संदेश है कि पहले मन को स्वच्छ करें और फिर तन पर रंग चढ़ाएं।
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कार्यक्रम के दौरान कवि त्रिलोक चंद फतेहपुरी के काव्य संग्रह काव्य मंथन का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि हलचल हरियाणवी ने अपने हास्य-व्यंग्य से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और फागुन की मस्ती बिखेरी। उन्होंने होली पर आधारित अपनी रचनाओं से माहौल को उत्साह से भर दिया।
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काव्य गोष्ठी में डॉ. देवीराम शर्मा, गौतम इलाहाबादी, गोपाल वसिष्ठ और राजेश भुलक्कड़ ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर कटाक्ष करते हुए प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी धर्मवीर सिंह बल्डोदिया ने भी अपनी कविता के माध्यम से समाज में सौहार्द और एकता का संदेश दिया।