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सरकारी अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में एंटी रैबीज के टीके खत्म

Thu, 16 Jan 2020 12:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jan 2020 12:00 AM IST
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Anty Rebies Bacsine ended in Rewari Hospitals
चिकित्सा अधिकारी को शिकायत देता व्य‌क्ति। - फोटो : Rewari
अगर आप कुत्ता, बंदर, बिल्ली सहित अन्य जानवर के काटने पर सरकारी अस्पताल में एंटी रैबीज का टीका लगवाने जा रहे हैं तो अपने साथ एंटी रैबीज का टीका बाहर से खरीदकर लेकर जाएं। क्योंकि जिले के नागरिक और उप नागरिक अस्पताल में एंटी रैबीज के टीके पिछले कई दिनों से खत्म हैं। ये टीके न तो ओपीडी में आने वाले घायलों के लिए उपलब्ध हैं और न ही आपातकालीन विभाग में। इसी वजह से अस्पताल में पहुंचने वाले जरूरतमंद मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
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जिले में प्रतिदिन 15 से 20 मरीज आ रहे हैं, लेकिन अस्पताल में आ रहे मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोर से टीका लेकर आना पड़ रहा है। जहां इस टीके के 500 रुपये लिए जा रहे हैं। जबकि सरकारी अस्पताल में यह टीका बीपीएल को निशुल्क और सामान्य श्रेणी के मरीज को 100 रुपये की रसीद काटने पर लगाया जाता है। खासतौर पर गरीब लोगों को ज्यादा परेशानी हो रही है। वे इतने रुपये का टीका लाने में सक्षम नहीं होते। इसलिए ऐसे में कुछ मरीज अपनी जान जोखिम में डालकर इंजेक्शन आने का इंतजार कर रहे हैं और कुछ निजी केमिस्ट शॉप से टीके खरीदकर लगवा रहे। स्टाफ के मुताबिक इंजेक्शन की डिमांड भेजी जा चुकी है, जबकि वेयर हाउस भिवानी में भी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है।
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इन अस्पतालों में नहीं हैं दो महीने से टीके
सामान्य अस्पताल कोसली, सीएचसी बावल, पीएचसी नाहड़, मीरपुर व कसौला में पिछले एक महीने से एंटी रैबीज के टीके नहीं हैं। इन अस्पतालों में प्रतिमाह में 30 से 35 मरीज आ रहे हैं।
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ऐसे लगते हैं रैबीज के टीके
कुत्ते के काटने पर कुल पांच टीके लगाए जाते हैं। पहला टीका कुत्ता काटने वाले दिन लगाया जाता है। दूसरा टीका तीन दिन बाद, तीसरा टीका 7, चौथा टीका 14 और पांचवां टीका 28 दिन बाद लगता है। बाजार से रैबीज का एक टीका 500 रुपये का आता है, पूरे कोर्स पर 2500 रुपये का खर्चा होता है।
कैसे प्रभावित करता है रैबीज
रैबीज एक तरह का वायरल संक्रमण है, जो आमतौर पर संक्रमित जानवरों के काटने से फैलता है। इसका वायरस खतरनाक होता है। अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए तो खतरनाक साबित हो सकता है। रैबीज व्यक्ति के शरीर को दो तरह से प्रभावित करता है। जब रैबीज वायरस व्यक्ति के नर्वस सिस्टम में पहुंच जाते हैं तो इसके बाद मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं। रैबीज वायरस नर्वस सिस्टम में पहुंच जाता है तो दिमाग में सूजन पैदा हो जाता है। इससे व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी मौत हो सकती है। कभी-कभी उसे पानी से भी डर लगता है। इसके अलावा कुछ लोगों को लकवा भी हो सकता है।
खासापुरा निवासी ने बादर से खरीदा
शहर के खासापुरा मोहला निवासी अमरजीत ने बताया कि उसे एक दिन पूर्व कुत्ते ने काट लिया था। पहला टीका लगवाने के लिए वह दो दिन सेेे नागरिक अस्पताल में चक्कर काट रहा है। परंतु अब यहां टीके खत्म हो चुके हैं। इसलिए बाहर से 500 रुपये का टीका खरीदना पड़ा।

गुरुग्राम वेयर हाउस से मंगवा दिए हैं इंजेक्शन: पीएमओ
नागरिक अस्पताल के पीएमओ डॉ. सुशील माही ने बताया कि बुधवार को गुरुग्राम वेयर से हाउस से रैबीज के इंजेक्शन मंगवाए दिए गए हैं। अब नागरिक अस्पताल में इंजेक्शन की कमी नहीं है। वेयर हाउस में कमी के चलते कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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