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भैंरू का बास में बकरियां अज्ञात बीमारी की चपेट में
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Tue, 23 Aug 2016 12:49 AM IST
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बकरे ने किया हमला
- फोटो : self
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खंड खोल क्षेत्र के गांव भैंरू का बास में पशु चिकित्सक के नहीं होने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। एक गरीब बकरी चराने वाला पिछले 15 दिन से बीमारियों बकरियों को लेकर अस्पताल के चक्कर काट रहा है,।
राजेश कुमार, पवन कुमार, भूपेन्द्र सिंह, छोटेलाल आदि ने बताया कि वे बकरी चरा कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
पिछले 15 दिन से उनकी बकरियों को अज्ञात बीमारी ने जकड़ा हुआ है। इससे वे चल नहीं पा रही है। वे गांव के अस्पताल में जाते हैं तो वहां ताला लटका हुआ मिलता है। यह हाल पिछले 15 दिन से है। दिन पर दिन एक-एक कर बकरियों की हालत बिगड़ती जा रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द यहां पशु चिकित्सक भेजा जाए। ताकि वह अपनी बीमार बकरियों को बचा सके।
इस बारे में पशु चिकित्सक सतपाल चोपड़ा ने बताया कि उनके पास भैंरू का बास एडनिशनल चार्ज है। उनकी ड्यूटी नांगल, ढाणी जरावता व ऊंचा में है। वे भैंरू का बास में एक या दो घंटे बैठते हैं। अगर बकरियों में बीमारी है तो पीड़ित लोग मंगलवार को पशु अस्पताल लेकर आएं। बकरियों को दवा पिलाई जाएगी।
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राजेश कुमार, पवन कुमार, भूपेन्द्र सिंह, छोटेलाल आदि ने बताया कि वे बकरी चरा कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
पिछले 15 दिन से उनकी बकरियों को अज्ञात बीमारी ने जकड़ा हुआ है। इससे वे चल नहीं पा रही है। वे गांव के अस्पताल में जाते हैं तो वहां ताला लटका हुआ मिलता है। यह हाल पिछले 15 दिन से है। दिन पर दिन एक-एक कर बकरियों की हालत बिगड़ती जा रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द यहां पशु चिकित्सक भेजा जाए। ताकि वह अपनी बीमार बकरियों को बचा सके।
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इस बारे में पशु चिकित्सक सतपाल चोपड़ा ने बताया कि उनके पास भैंरू का बास एडनिशनल चार्ज है। उनकी ड्यूटी नांगल, ढाणी जरावता व ऊंचा में है। वे भैंरू का बास में एक या दो घंटे बैठते हैं। अगर बकरियों में बीमारी है तो पीड़ित लोग मंगलवार को पशु अस्पताल लेकर आएं। बकरियों को दवा पिलाई जाएगी।
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