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अहीरवाल की सैन्य परंपरा, देशभक्ति और बलिदानी भावना का प्रमाण : कैप्टन अजय
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फोटो: 16रेवाड़ी। शहर के रेजांगला शहीदी पार्क में वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देते पूर्व मंत्
रेवाड़ी। रेजांगला शौर्य दिवस के अवसर पर पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने अपने कार्यकर्ताओं और साथियों के साथ गढ़ी बोलनी रोड स्थित रेजांगला शहीदी पार्क पहुंचकर 1962 के भारत-चीन युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए शहीद सैनिकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
कैप्टन अजय सिंह यादव ने कहा कि 18 नवंबर 1962 की दिवाली की रात लड़ी गई रेजांगला की लड़ाई भारतीय इतिहास की सबसे वीरतापूर्ण लड़ाइयों में से एक है। उन्होंने बताया कि लद्दाख की चुशुल घाटी की रक्षा करते हुए भारतीय सेना की 13 कुमाऊं रेजिमेंट के 120 जवानों ने मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में चीन के 1,300 से अधिक सैनिकों का मुकाबला किया और अंत तक लड़ते रहे।
उन्होंने कहा कि अगर उस रात अहीरवाल के इन वीर सपूतों ने अपनी जान पर खेलकर मोर्चा न संभाला होता तो चीन का लद्दाख पर कब्जा होना तय था लेकिन हमारे जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक युद्ध किया। जब गोलियां खत्म हो गई तब भी उन्होंने राइफलों के बट और पत्थरों से दुश्मन को मारा। यह शौर्य आज भी दुनिया के सैन्य इतिहास में अद्वितीय है।
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उन्होंने आगे बताया कि 120 वीरों में से 114 जवान केवल रेवाड़ी क्षेत्र के थे जो अहीरवाल की सैन्य परंपरा, देशभक्ति और बलिदानी भावना का प्रमाण है। कांग्रेस शासनकाल में उनके प्रयासों से रेवाड़ी में रेजांगला शहीदी पार्क एवं वॉर म्यूज़ियम का निर्माण कराया गया था ताकि आने वाली पीढ़ियां इन वीर जवानों के योगदान को समझ सकें और उनसे प्रेरणा ले सकें।
इस मौके पर कांग्रेस पार्टी जिला अध्यक्ष ग्रामीण सुभाष छावड़ी, शहरी अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, महिला जिला अध्यक्ष सीमा धमीजा, एससी विभाग के जिला अध्यक्ष रमेश ठेकेदार, पार्षद मोनू राव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
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कैप्टन अजय सिंह यादव ने कहा कि 18 नवंबर 1962 की दिवाली की रात लड़ी गई रेजांगला की लड़ाई भारतीय इतिहास की सबसे वीरतापूर्ण लड़ाइयों में से एक है। उन्होंने बताया कि लद्दाख की चुशुल घाटी की रक्षा करते हुए भारतीय सेना की 13 कुमाऊं रेजिमेंट के 120 जवानों ने मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में चीन के 1,300 से अधिक सैनिकों का मुकाबला किया और अंत तक लड़ते रहे।
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उन्होंने कहा कि अगर उस रात अहीरवाल के इन वीर सपूतों ने अपनी जान पर खेलकर मोर्चा न संभाला होता तो चीन का लद्दाख पर कब्जा होना तय था लेकिन हमारे जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक युद्ध किया। जब गोलियां खत्म हो गई तब भी उन्होंने राइफलों के बट और पत्थरों से दुश्मन को मारा। यह शौर्य आज भी दुनिया के सैन्य इतिहास में अद्वितीय है।
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उन्होंने आगे बताया कि 120 वीरों में से 114 जवान केवल रेवाड़ी क्षेत्र के थे जो अहीरवाल की सैन्य परंपरा, देशभक्ति और बलिदानी भावना का प्रमाण है। कांग्रेस शासनकाल में उनके प्रयासों से रेवाड़ी में रेजांगला शहीदी पार्क एवं वॉर म्यूज़ियम का निर्माण कराया गया था ताकि आने वाली पीढ़ियां इन वीर जवानों के योगदान को समझ सकें और उनसे प्रेरणा ले सकें।
इस मौके पर कांग्रेस पार्टी जिला अध्यक्ष ग्रामीण सुभाष छावड़ी, शहरी अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, महिला जिला अध्यक्ष सीमा धमीजा, एससी विभाग के जिला अध्यक्ष रमेश ठेकेदार, पार्षद मोनू राव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।