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आईजीयू में महाराजा अग्रसेन पीठ को लेकर हुआ समझौता
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आईजीयू में महाराजा अग्रसेन पीठ को लेकर हुए एक समझौता ज्ञापन दिखाते हुए।
- फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। समाजवाद के प्रवर्तक और अहिंसा के पुजारी महाराजा अग्रसेन की शिक्षा के प्रसार के लिए इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर व हरियाणा प्रदेश वैश्य महासम्मेलन मिलकर काम करेंगे। इस कार्य को पूर्ण करने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर के कुलसचिव प्रो. प्रमोद कुमार व महासम्मेलन के प्रदेश अध्यक्ष राजीव जैन के मध्य सोमवार को विश्वविद्यालय मीरपुर में महाराजा अग्रसेन पीठ को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ।
बता दें कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने लगभग 4 वर्ष पूर्व महाराजा अग्रसेन पीठ को विश्वविद्यालय में स्थापित करने और इसका सुचारु रूप से संचालन के लिए भरपूर सहयोग देने की घोषणा की थी। कुलपति प्रो. एसके गक्खड़ ने कहा कि इस पीठ के माध्यम से शोधार्थी महाराजा अग्रसेन के जीवन पर शोध करेंगे कि सदियों पूर्व दी गई उनकी शिक्षाएं आज के युग में समाज के कल्याण व उत्थान में कैसे प्रासंगिक हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस पीठ के माध्यम से स्वरोजगार को अपनाने के लिए उद्यमशीलता विषय पर विश्वविद्यालय में सम्मेलन आदि का आयोजन किया जाएगा। कुलसचिव ने कहा कि यह पीठ अपने कार्यों के माध्यम से अन्य पीठों का मार्गदर्शन करेगी।
मुख्यमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार राजीव जैन ने कहा कि इस पीठ की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य महाराजा अग्रसेन की विचारधाराओं को समाज में जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की पुस्तकालय में विद्यार्थियों को इस पीठ के माध्यम से पुस्तकें आदि उपलब्ध करवाई जाएंगी। रवि गुप्ता ने कहा कि इसके माध्यम से विद्यार्थियों कोे स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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शैक्षणिक मामलों की अधिष्ठाता प्रो. ममता कामरा ने बताया कि इस समझौता ज्ञापन में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यों में नवीनता का रूप नजर आएगा। पीठ की अध्यक्ष एवं वाणिज्य विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. ममता अग्रवाल ने बताया कि यह पीठ विश्वविद्यालय प्रशासन व महासम्मेलन के राजीव के मार्गदर्शक में महाराजा अग्रसेन के शिक्षाओं व प्रेरणाओं को समाज में प्रसार के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी। इस अवसर पर परीक्षा मामलों के अधिष्ठाता प्रो. तेज सिंह, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. विजय कुमार, छात्रावास की चीफ वार्डन प्रो. मंजू परूथी, प्रो. सुरेश कुमार, डॉ. रीतु बजाज, डॉ. सोनू मदान, दुर्गादत गोयल, अशोक सोमाणी, बृज लाल गोयल, रवि गुप्ता, डॉ. दीपक आदि मौजूद रहे।
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बता दें कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने लगभग 4 वर्ष पूर्व महाराजा अग्रसेन पीठ को विश्वविद्यालय में स्थापित करने और इसका सुचारु रूप से संचालन के लिए भरपूर सहयोग देने की घोषणा की थी। कुलपति प्रो. एसके गक्खड़ ने कहा कि इस पीठ के माध्यम से शोधार्थी महाराजा अग्रसेन के जीवन पर शोध करेंगे कि सदियों पूर्व दी गई उनकी शिक्षाएं आज के युग में समाज के कल्याण व उत्थान में कैसे प्रासंगिक हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस पीठ के माध्यम से स्वरोजगार को अपनाने के लिए उद्यमशीलता विषय पर विश्वविद्यालय में सम्मेलन आदि का आयोजन किया जाएगा। कुलसचिव ने कहा कि यह पीठ अपने कार्यों के माध्यम से अन्य पीठों का मार्गदर्शन करेगी।
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मुख्यमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार राजीव जैन ने कहा कि इस पीठ की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य महाराजा अग्रसेन की विचारधाराओं को समाज में जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की पुस्तकालय में विद्यार्थियों को इस पीठ के माध्यम से पुस्तकें आदि उपलब्ध करवाई जाएंगी। रवि गुप्ता ने कहा कि इसके माध्यम से विद्यार्थियों कोे स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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शैक्षणिक मामलों की अधिष्ठाता प्रो. ममता कामरा ने बताया कि इस समझौता ज्ञापन में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यों में नवीनता का रूप नजर आएगा। पीठ की अध्यक्ष एवं वाणिज्य विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. ममता अग्रवाल ने बताया कि यह पीठ विश्वविद्यालय प्रशासन व महासम्मेलन के राजीव के मार्गदर्शक में महाराजा अग्रसेन के शिक्षाओं व प्रेरणाओं को समाज में प्रसार के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी। इस अवसर पर परीक्षा मामलों के अधिष्ठाता प्रो. तेज सिंह, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. विजय कुमार, छात्रावास की चीफ वार्डन प्रो. मंजू परूथी, प्रो. सुरेश कुमार, डॉ. रीतु बजाज, डॉ. सोनू मदान, दुर्गादत गोयल, अशोक सोमाणी, बृज लाल गोयल, रवि गुप्ता, डॉ. दीपक आदि मौजूद रहे।