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तहसीलदार एवं थानाप्रभारी की अपील के बावजूद धरने पर डटे रहे आंदोलनकारी
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Tue, 07 Jun 2016 01:59 AM IST
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जाट समुदाय का धरना
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जाट आरक्षण को संविधान की नौवीं सूची में डालने की मांग को लेकर पांच जून से प्राणपुरा बस स्टैंड पर शुरू हुआ जाट समुदाय का धरना दूसरे दिन भी शांतिपूर्वक जारी रहा। जाट समुदाय को धरना समाप्त करने के लिए बावल थाना प्रभारी नरेंद्र सिंह एवं तहसीलदार बावल मनीष यादव सुबह ग्यारह बजे आंदोलनकारियों से आंदोलन समाप्त करने की अपील करने पहुंचे, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद आंदोलनकारियों की जिद के सामने उन्हें बेरंग लौटना पड़ा।
इधर राणौली रेलवे ट्रैक को किसी भी स्थिति में आंदोलनकारियों की पहुंच से दूर रखने के लिए पुलिस-प्रशासन ने दूसरे दिन भी सोमवार को ट्रैक को तीनों ओर से अपने कब्जे में रखा। फरवरी माह में आंदोलन का केंद्र रहे राणौली स्थित जाट भवन पर भी इस बार पहले से पुलिस बल ने कब्जा किया हुआ है।
इधर रोड जाम एवं किसी अन्य आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने लघु सचिवालय में एंबुलेंस एवं जेसीबी को हाई अलर्ट पर रखा हुआ है। बुजुर्ग जाट नेता माड़ाराम के संरक्षण में चल रहे धरने की अगुवाई कर रहे जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता जीतराम लौर ने कहा कि उनका धरना शांति पूर्वक लेकिन उनकी मांगे नहीं माने जाने तक अनिश्चितकाल तक चलता रहेगा।
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मुकदमा वापस लेने की मांग पर अड़े हैं आंदोलनकारी
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता जीतराम लौर ने बताया कि सरकार दोहरी चाल चल रही है। एक ओर भाजपा के कुरुक्षेत्र से सांसद राजकुमार सैनी प्रदेश में खुलेआम प्रदेश का भाईचारा बिगाड़ने के लिए बयान दे रहे है, जिन पर प्रदेश सरकार ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है, वहीं उल्टे सरकार ने संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक सहित अन्य 130 आंदोलनकारियों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर रही है।
उन्होंने कहा कि जब तक इन सभी लोगों के खिलाफ मुकद्मा वापस नहीं लिया जाएगा, आंदोलन चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि जाट आंदोलनकारी युवाओं पर बिना किसी वजह से सरकार ने केस दर्ज कर दिए हैं, जिसके चलते उनकी परीक्षा छूट गई है, इसलिए सरकार को तुरंत ऐसे युवाओं की परीक्षा का इंतजाम करना चाहिए। जीतराम ने कहा कि आरक्षण तो कांग्रेस सरकार ने भी दे दिया था, लेेकिन वह भी न्यायालय में नहीं ठहर पाया था, इसलिए सरकार को चाहिए कि इस संविधान को नौवीं सूची में शामिल करे ताकि न्यायालय मे इस चुनौती न मिल सके।
डीसी से वार्ता के बाद धरने को सीमित रखने का लिया था निर्णय
प्राणपुरा बस स्टैंड पर प्राचीन बरगद के पेड़ के नीचे चल रहे जाट समुदाय के लोग हुक्का एवं ताश खेलने के साथ सरकार की नीतियों पर चर्चा करते नजर आए। संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता जीतराम ने कहा कि शनिवार को डीसी यश गर्ग से उनके कार्यालय में ढाई घंटे से ज्यादा वार्ता का दौर चला था, इसके बाद ही धरने को प्राणपुरा में एवं सीमित संख्या में करने का निर्णय लिया गया था।
उन्होंने कहा कि उनका धरना शांति पूर्वक चल रहा है। जीतराम ने बताया कि सोमवार को धरने में शामिल होने वालो में भूप सिंह टीकला, शेरसिंह हरचंदपुर, जस्सीराम राणौली, उमराव, हजारी, सुबेदार गुलाराम प्राणपुरा, बलवान टीकला, रोहताश सरपंच एवं हजारीलाल मोहन पुर सहित अनेक ग्रामीण मौजूद थे।
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इधर राणौली रेलवे ट्रैक को किसी भी स्थिति में आंदोलनकारियों की पहुंच से दूर रखने के लिए पुलिस-प्रशासन ने दूसरे दिन भी सोमवार को ट्रैक को तीनों ओर से अपने कब्जे में रखा। फरवरी माह में आंदोलन का केंद्र रहे राणौली स्थित जाट भवन पर भी इस बार पहले से पुलिस बल ने कब्जा किया हुआ है।
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इधर रोड जाम एवं किसी अन्य आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने लघु सचिवालय में एंबुलेंस एवं जेसीबी को हाई अलर्ट पर रखा हुआ है। बुजुर्ग जाट नेता माड़ाराम के संरक्षण में चल रहे धरने की अगुवाई कर रहे जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता जीतराम लौर ने कहा कि उनका धरना शांति पूर्वक लेकिन उनकी मांगे नहीं माने जाने तक अनिश्चितकाल तक चलता रहेगा।
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मुकदमा वापस लेने की मांग पर अड़े हैं आंदोलनकारी
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता जीतराम लौर ने बताया कि सरकार दोहरी चाल चल रही है। एक ओर भाजपा के कुरुक्षेत्र से सांसद राजकुमार सैनी प्रदेश में खुलेआम प्रदेश का भाईचारा बिगाड़ने के लिए बयान दे रहे है, जिन पर प्रदेश सरकार ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है, वहीं उल्टे सरकार ने संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक सहित अन्य 130 आंदोलनकारियों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर रही है।
उन्होंने कहा कि जब तक इन सभी लोगों के खिलाफ मुकद्मा वापस नहीं लिया जाएगा, आंदोलन चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि जाट आंदोलनकारी युवाओं पर बिना किसी वजह से सरकार ने केस दर्ज कर दिए हैं, जिसके चलते उनकी परीक्षा छूट गई है, इसलिए सरकार को तुरंत ऐसे युवाओं की परीक्षा का इंतजाम करना चाहिए। जीतराम ने कहा कि आरक्षण तो कांग्रेस सरकार ने भी दे दिया था, लेेकिन वह भी न्यायालय में नहीं ठहर पाया था, इसलिए सरकार को चाहिए कि इस संविधान को नौवीं सूची में शामिल करे ताकि न्यायालय मे इस चुनौती न मिल सके।
डीसी से वार्ता के बाद धरने को सीमित रखने का लिया था निर्णय
प्राणपुरा बस स्टैंड पर प्राचीन बरगद के पेड़ के नीचे चल रहे जाट समुदाय के लोग हुक्का एवं ताश खेलने के साथ सरकार की नीतियों पर चर्चा करते नजर आए। संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता जीतराम ने कहा कि शनिवार को डीसी यश गर्ग से उनके कार्यालय में ढाई घंटे से ज्यादा वार्ता का दौर चला था, इसके बाद ही धरने को प्राणपुरा में एवं सीमित संख्या में करने का निर्णय लिया गया था।
उन्होंने कहा कि उनका धरना शांति पूर्वक चल रहा है। जीतराम ने बताया कि सोमवार को धरने में शामिल होने वालो में भूप सिंह टीकला, शेरसिंह हरचंदपुर, जस्सीराम राणौली, उमराव, हजारी, सुबेदार गुलाराम प्राणपुरा, बलवान टीकला, रोहताश सरपंच एवं हजारीलाल मोहन पुर सहित अनेक ग्रामीण मौजूद थे।