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Rewari News: चार सर्टिफिकेट कोर्सों में दाखिले की तिथि 10 सितंबर तक बढ़ी
Fri, 28 Aug 2026 12:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 28 Aug 2026 12:14 AM IST
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बावल। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय बावल में तीन माह की अवधि वाले चार सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों में दाखिले की प्रक्रिया जारी है। इनमें दाखिले के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 10 सितंबर निर्धारित की गई है। सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन और परीक्षाएं ऑफलाइन होंगी।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सत्यजीत ने बताया कि महाविद्यालय की ओर से संचालित इन चार पाठ्यक्रमों में मधुमक्खी पालन, केंचुआ खाद तकनीक, फल एवं सब्जी प्रसंस्करण तथा बागवानी एवं नर्सरी प्रबंधन शामिल हैं।
इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में प्रतिभागियों को प्रायोगिक ज्ञान, तकनीकी जानकारी और कौशल आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।
मधुमक्खी पालन पाठ्यक्रम में प्रतिभागियों को मधुमक्खी पालन से जुड़ी गतिविधियों और तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। केंचुआ खाद तकनीक पाठ्यक्रम के माध्यम से जैविक अपशिष्ट के उपयोग तथा केंचुआ खाद तैयार करने की प्रक्रिया समझाई जाएगी। फल एवं सब्जी प्रसंस्करण पाठ्यक्रम कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन से जुड़ी जानकारी देगा।
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वहीं, बागवानी एवं नर्सरी प्रबंधन पाठ्यक्रम में पौध उत्पादन और बागवानी से संबंधित व्यावहारिक कौशल विकसित करने पर जोर रहेगा। महाविद्यालय के अनुसार, इन अल्पकालिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से प्रतिभागियों को कृषि क्षेत्र में उपलब्ध गतिविधियों और संभावनाओं की जानकारी मिलने के साथ कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।
इससे कृषि आधारित स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए आवश्यक व्यावहारिक दक्षता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। इच्छुक अभ्यर्थी योग्यता, आवेदन प्रक्रिया, शुल्क और अन्य जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रवेश सूचना देख सकते हैं।
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महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सत्यजीत ने बताया कि महाविद्यालय की ओर से संचालित इन चार पाठ्यक्रमों में मधुमक्खी पालन, केंचुआ खाद तकनीक, फल एवं सब्जी प्रसंस्करण तथा बागवानी एवं नर्सरी प्रबंधन शामिल हैं।
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इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में प्रतिभागियों को प्रायोगिक ज्ञान, तकनीकी जानकारी और कौशल आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।
मधुमक्खी पालन पाठ्यक्रम में प्रतिभागियों को मधुमक्खी पालन से जुड़ी गतिविधियों और तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। केंचुआ खाद तकनीक पाठ्यक्रम के माध्यम से जैविक अपशिष्ट के उपयोग तथा केंचुआ खाद तैयार करने की प्रक्रिया समझाई जाएगी। फल एवं सब्जी प्रसंस्करण पाठ्यक्रम कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन से जुड़ी जानकारी देगा।
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वहीं, बागवानी एवं नर्सरी प्रबंधन पाठ्यक्रम में पौध उत्पादन और बागवानी से संबंधित व्यावहारिक कौशल विकसित करने पर जोर रहेगा। महाविद्यालय के अनुसार, इन अल्पकालिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से प्रतिभागियों को कृषि क्षेत्र में उपलब्ध गतिविधियों और संभावनाओं की जानकारी मिलने के साथ कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।
इससे कृषि आधारित स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए आवश्यक व्यावहारिक दक्षता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। इच्छुक अभ्यर्थी योग्यता, आवेदन प्रक्रिया, शुल्क और अन्य जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रवेश सूचना देख सकते हैं।