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Rewari News: मंडी में लगी ट्रैक्टर-ट्राॅलियों की कतार, लगा जाम

Sat, 11 Oct 2025 12:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sat, 11 Oct 2025 12:28 AM IST
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A queue of tractor-trolleys formed in the market, causing traffic jam.
फोटो : 25नई अनाज मंडी में लगी ट्रैक्टर की कतार। संवाद
रेवाड़ी। नई अनाज मंडी में शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्राॅलियों से बाजरा लेकर पहुंचे। चारों तरफ ट्रैक्टर-ट्राॅलियों की कतार के चलते जाम लग गया। ऐसे में बड़ी गाड़ियों को निकालने में मशक्कत करनी पड़ी। बाजरे का वजन कराने के लिए किसानों की लंबी कतार लगी रही। अभी तक बाजरे की सरकारी खरीद नहीं होने से किसान परेशान हैं।
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मंडी के बाहर सुबह से ही किसानों की भीड़ लगनी शुरू हो गई थी। दोपहर 12 बजे मंडी जाम जैसी स्थिति हो गई। ब्रास मार्केट, नेहरु पार्क व मंडी के सामने और सचिवालय की तरफ गेट पर बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतार लग गई। ट्रैक्टरों की भीड़ से दोनों गेट पर दिनभर जाम जैसी स्थिति रही।
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पुलिस को व्यवस्था बनाने में मशक्कत करनी पड़ी। इस बार बाजरे की सरकारी खरीद (एमएसपी) पर न होकर भावांतर की जा रही है। सरकार ने 2200 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम दर तय की है। साथ ही 575 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर मिलेगा।
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नई अनाज मंडी में इसलिए भीड़ बढ़ गई कि इस बार सरकार ने बाजरा बिक्री के लिए शर्त लगा दी है कि जो किसान बाजरा बिक्री करेगा, उसी को ही भावांतर भरपाई योजना का लाभ दिया जाएगा।
ऐसे में जिन किसानों ने मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण कराया हुआ है, वे बाजरा बेचने की जल्दी में हैं ताकि उनको भावांतर मिल सके। दूसरी तरफ किसानों को सरसों की बिजाई करनी है। इसलिए किसान खेत को खाली करने में जुटे हैं। साथ ही सरसों बिजाई करनी है तो खाद-बीज व अन्य कीटनाशक के लिए पैसे की भी जरूरत होती है। इसलिए भी किसानों की भीड़ उमड़ी है।
मंडी में भीड़ अधिक होने के कारण सामान्य कामकाज प्रभावित हो गया। पूरा दिन मंडी में बीत गया। वहीं टोकन कटाने के लिए भी किसानों की लाइन लगी रही। इस दौरान पुलिस व्यवस्था बनाने में जुटी रही।

जिले में शुक्रवार को 2200 गेट पास कटे हैं। 5 हजार टन से अधिक बाजरा की आवक हुई है। फिलहाल सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है। बाजरा की गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर रही है। वहीं, खरीद एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि बाजरा गुणवत्ता पर खरा उतरने के बाद ही खरीदा जाएगा।


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एजेंसी ने नमूने लिए, मानक अधूरे बता नहीं की खरीद

बाजरे की कॉमर्शियल खरीद के लिए इस बार हैफेड व वेयर हाउस को जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन एजेंसी का तर्क है कि इस बार बाजरे की क्वालिटी खराब है, यानि मानक में नहीं है। ऐसे में अब तक एजेंसी की तरफ से एक भी दाना बाजरा नहीं खरीद किया गया है। खराब क्वालिटी के बाजरे को एजेंसियां नहीं खरीद रही हैं। अच्छी क्वालिटी के बाजरे को किसान नहीं बेच रहे क्योंकि उन्हें उनका न्यूनतम दर 2200 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक कीमत मिल रही है।
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