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एम्स के शिलान्यास में ढाई एकड़ जमीन का पैच बन रहा बाधा

Mon, 19 Jul 2021 10:57 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 19 Jul 2021 10:57 PM IST
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A patch of two and a half acres of land is becoming an obstacle in the foundation stone of AIIMS
एम्स की प्रस्तावित साइट का निरीक्षण करते डीसी यशेंद्र सिंह व संघर्ष समिति के लोग ( फाइल फोटो) - फोटो : Rewari
रेवाड़ी/ खोल। जिले के गांव माजरा में बनने वाले एम्स में अब ढाई एकड़ जमीन का पेच फंसा हुआ है। इस पेच को खत्म करने के लिए ग्रामीण व जिला प्रशासन विकल्प भी तलाशने में जुटे हैं।
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गांव माजरा में बनने वाले एम्स को लेकर ग्रामीणों ने अपनी सहमति से 222 एकड़ जमीन ई-भूमि पोर्टल पर चढ़ा दी है। बीच में ढाई एकड़ का जमीन का पैच एम्स के शिलान्यास में रोड़ा बना हुआ है। पूर्व चेयरमैन व ब्लॉक अध्यक्ष किसान जीतू माजरा ने बताया कि ढाई एकड़ जमीन जिन किसानों की है, उनसे बातचीत चल रही है। वे किसान जमीन देने में आनाकानी कर रहे हैं। अगर वे जमीन नहीं देते हैैं तो उस ढाई एकड़ जमीन के साथ लगती जमीन लेने की तैयारी है। एम्स जैसा बड़ा प्रोजेक्ट गांव के किसान हाथ से जाने नहीं देंगे। अगर माजरा में एम्स बनता है तो यह हमारे क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। मनेठी में एम्स नामंजूर होने के बाद माजरा में एम्स निर्माण का रास्ता तलाशा जा रहा है। लेेकिन इसके लिए 200 एकड़ जमीन एकमुश्त होनी जरूरी है।
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चार जुलाई 2015 को बावल में हुई थी घोषणा
मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने 4 जुलाई, 2015 को बावल में एक जनसभा में मनेठी गांव में एम्स की स्थापना की घोषणा की थी। वहीं विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मसानी बैराज पहुंचे सीएम ने एम्स निर्माण की घोषणा दबाव में करने की बात कहकर मामले को नया मोड़ दे दिया था। इसके बाद ग्रामीणों ने लंबे समय तक संघर्ष किया। तब जाकर केंद्रीय वित्त मंत्री ने पहली फरवरी 2019 को अपने बजट भाषण में हरियाणा को देश का 22वां नया अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान देने की घोषणा की थी। 5 फरवरी, 2019 को पत्र जारी कर हरियाणा सरकार ने एम्स की स्थापना के लिए पेश की गई जमीन की स्वीकृति प्रदान की। ग्राम पंचायत मनेठी की 224 एकड़ 7 कनाल 7 मरला भूमि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान और अनुसंधान संस्थान मनेठी रेवाड़ी की स्थापना के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को 99 वर्ष की अवधि के लिए एक रुपये प्रतिवर्ष प्रति एकड़ की दर से पट्टे पर दे दी गई थी। लेकिन पर्यावरण मंत्रालय की सलाहकार कमेटी ने चिह्नित स्थल की भूमि का उपयोग अरावली पौधरोपण योजना के तहत ही करने का हवाला देते हुए इसे नामंजूर कर दिया था।
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सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल ने कहा कि एम्स निर्माण के लिए मुख्यमंत्री खुद प्रयास कर रहे हैं। जमीन का जो पैच बचा हुआ है उसका समाधान किया जा रहा है। जो किसान जमीन दे चुके हैं, उसकी जल्द रजिस्ट्री कराई जाएगी। ढाई एकड़ पैच का विकल्प भी तलाशा जा रहा है।
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