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Rewari News: बिजली के खंभों पर फैला केबल और ब्राडबैंड के तारों का जाल
Sat, 09 May 2026 12:23 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 09 May 2026 12:23 AM IST
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अर्जुन नगर में खंभे पर बिजली के तारों का मकड़जाल। संवाद
रेवाड़ी। शहर में डीएचबीवीएन के बिजली खंभों पर डिश केबल और इंटरनेट ब्राडबैंक का तारों का जाल फैला है जिससे शॉट-सर्किट की आशंका बनी रहती है। शहर के करीब 80 प्रतिशत बिजली पोल पर केबल तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। शिकायत के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
बिजली पोलों पर बिजली की लाइनों के साथ-साथ डिश केबल, इंटरनेट ब्रॉडबैंड और अन्य नेटवर्क कंपनियों के तार भी बेतरतीब तरीके से बांधे गए हैं। कई जगहों पर केबल ऑपरेटरों ने अपने बॉक्स भी सीधे बिजली पोलों पर लगा रखे हैं।
उपभोक्ताओं की सर्विस लाइन और बिजली मीटरों में उलझे इन तारों के कारण हर समय शॉर्ट सर्किट और हादसों का खतरा बना रहता है।
शहर में शायद ही कोई ऐसा बिजली पोल बचा हो, जिस पर केबल तारों के गुच्छे न लटके हों। अनेक स्थानों पर दर्जनों तारों के बंडल पोल से जमीन तक लटक रहे हैं।
बिजली के पोल पर बिजली के तार कम और केबल नेटवर्क के तार ज्यादा दिखाई देते हैं। कई जगह डिश केबल उपभोक्ताओं के बिजली मीटरों में उलझी हुई है, जिससे लाइनमैन को फाल्ट के समय पोल पर चढ़ने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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सेक्टर-1, सेक्टर-3, सेक्टर-4, कंपनी बाग, मॉडल टाउन, हाउसिंग बोर्ड, बावल रोड और बाजारों सहित शहर के अधिकांश इलाकों में यही स्थिति बनी हुई है। बीएमजी मॉल के पास की गलियों और रिहायशी क्षेत्रों में भी बिजली पोलों पर केबल का जाल साफ देखा जा सकता है।
बारिश में बढ़ जाता है खतरा
नियमों के अनुसार किसी भी निजी ऑपरेटर को बिजली निगम के पोल पर केबल तार लगाने की अनुमति नहीं है। बावजूद इसके केबल ऑपरेटर बिना अनुमति सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं। बारिश के मौसम में इन तारों के कारण शॉर्ट सर्किट और करंट फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बिजली कर्मचारियों का कहना है कि केबल तारों के जाल के कारण पोल पर चढ़ना और उतरना जोखिम भरा हो गया है। कई बार इस संबंध में अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक किसी भी ऑपरेटर पर कार्रवाई नहीं की गई।
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स्ट्रीट लाइट पोल भी बने सहारा
यह स्थिति केवल बिजली निगम के पोल तक सीमित नहीं है। नगर परिषद की ओर से लगाए गए स्ट्रीट लाइट पोलों पर भी केबल नेटवर्क कंपनियों ने अवैध रूप से तार बांध रखे हैं। हैरानी की बात यह है कि अधिकारियों की नजरों के सामने यह सब होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही। इससे विभागीय मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।
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शॉर्ट सर्किट से जल चुके हैं मीटर
केबल तार कई बार हादसों का कारण भी बन चुके हैं। बड़े वाहनों में फंसकर तार टूट जाते हैं और सड़क पर गिरने से दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बन जाते हैं। कई बार बाइक के पहियों में तार फंसने से लोग गिरकर घायल भी हुए हैं।शॉर्ट सर्किट की घटनाओं में केबल तारों में आग लगने से उपभोक्ताओं के बिजली मीटर जल चुके हैं, जिससे घंटों बिजली बाधित रही। बाद में नए मीटर लगाने के बाद ही सप्लाई बहाल हो सकी।
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बिजली पोलों पर बिजली की लाइनों के साथ-साथ डिश केबल, इंटरनेट ब्रॉडबैंड और अन्य नेटवर्क कंपनियों के तार भी बेतरतीब तरीके से बांधे गए हैं। कई जगहों पर केबल ऑपरेटरों ने अपने बॉक्स भी सीधे बिजली पोलों पर लगा रखे हैं।
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उपभोक्ताओं की सर्विस लाइन और बिजली मीटरों में उलझे इन तारों के कारण हर समय शॉर्ट सर्किट और हादसों का खतरा बना रहता है।
शहर में शायद ही कोई ऐसा बिजली पोल बचा हो, जिस पर केबल तारों के गुच्छे न लटके हों। अनेक स्थानों पर दर्जनों तारों के बंडल पोल से जमीन तक लटक रहे हैं।
बिजली के पोल पर बिजली के तार कम और केबल नेटवर्क के तार ज्यादा दिखाई देते हैं। कई जगह डिश केबल उपभोक्ताओं के बिजली मीटरों में उलझी हुई है, जिससे लाइनमैन को फाल्ट के समय पोल पर चढ़ने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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सेक्टर-1, सेक्टर-3, सेक्टर-4, कंपनी बाग, मॉडल टाउन, हाउसिंग बोर्ड, बावल रोड और बाजारों सहित शहर के अधिकांश इलाकों में यही स्थिति बनी हुई है। बीएमजी मॉल के पास की गलियों और रिहायशी क्षेत्रों में भी बिजली पोलों पर केबल का जाल साफ देखा जा सकता है।
बारिश में बढ़ जाता है खतरा
नियमों के अनुसार किसी भी निजी ऑपरेटर को बिजली निगम के पोल पर केबल तार लगाने की अनुमति नहीं है। बावजूद इसके केबल ऑपरेटर बिना अनुमति सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं। बारिश के मौसम में इन तारों के कारण शॉर्ट सर्किट और करंट फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बिजली कर्मचारियों का कहना है कि केबल तारों के जाल के कारण पोल पर चढ़ना और उतरना जोखिम भरा हो गया है। कई बार इस संबंध में अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक किसी भी ऑपरेटर पर कार्रवाई नहीं की गई।
स्ट्रीट लाइट पोल भी बने सहारा
यह स्थिति केवल बिजली निगम के पोल तक सीमित नहीं है। नगर परिषद की ओर से लगाए गए स्ट्रीट लाइट पोलों पर भी केबल नेटवर्क कंपनियों ने अवैध रूप से तार बांध रखे हैं। हैरानी की बात यह है कि अधिकारियों की नजरों के सामने यह सब होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही। इससे विभागीय मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।
शॉर्ट सर्किट से जल चुके हैं मीटर
केबल तार कई बार हादसों का कारण भी बन चुके हैं। बड़े वाहनों में फंसकर तार टूट जाते हैं और सड़क पर गिरने से दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बन जाते हैं। कई बार बाइक के पहियों में तार फंसने से लोग गिरकर घायल भी हुए हैं।शॉर्ट सर्किट की घटनाओं में केबल तारों में आग लगने से उपभोक्ताओं के बिजली मीटर जल चुके हैं, जिससे घंटों बिजली बाधित रही। बाद में नए मीटर लगाने के बाद ही सप्लाई बहाल हो सकी।