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घोषणा के 6 साल बीते, जिले में धरातल पर नहीं आ सकीं व्यायामशालाएं

Mon, 09 Aug 2021 10:36 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 09 Aug 2021 10:36 PM IST
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6 years have passed since the announcement, gymnasiums could not come to the ground in the district
जिले के एक गांव में बन रही व्यायामशाला। - फोटो : Rewari
रेवाड़ी। योग, कुश्ती और कबड्डी जैसे खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 6 साल पहले जिले के 30 पंचायतों में व्यायामशालाएं बनाने का निर्णय लिया गया था। इतना वक्त बीत जाने के बाद भी इनका निर्माण अभी आधा-अधूरा ही पड़ा हुआ है। ऐसे में सवाल है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कैसे हमारे खिलाड़ी मेडल जीत पाएंगे।
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सरकारी ओर से जिले में 2015 में 33 व्यायामशालाएं बनाने की घोषणा की गई थी। 2016 में 6 करोड़ रुपये का बजट पास कर टेंडर जारी करके निर्माण कार्य शुुरू भी कर दिया गया। लेकिन 6 साल बीत जाने के बाद भी बजट के अभाव व व्यायामशालाओं के लिए जमीन नहीं मिलने के कारण इनका निर्माण कार्य अटका हुआ है। ऐसे में समझा जा सकता है कि ग्रामीण युवाओं को आगे बढ़ाने में जिम्मेदार कितने संवदेनशील हैं। (संवाद)
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बता दें कि सीएम मनोहर लाल ने अपने दौरे के दौरान मई 2015 में जिले की तीनों विधानसभाओं में 10-10 व्यायामशालाओं के निर्माण की घोषणा की थी। गांवों में व्यायामशालाओं के निर्माण के लिए पंचायतों की ओर दो-दो एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई थी। निर्माण पंचायती विभाग को ही कराना था। लेकिन बजट के अभाव और पंचायत की जमीनी पर अवैध कब्जे व अन्य विवादों के चलते अभी तक केवल 20 ही व्यायामशालाओं का आधा-अधूरा ही निर्माण हो पाया है। बताया जा रहा कि अभी तक दो गांव ही उच्च स्तर की व्यायामशालाएं बनाई जा सकी हैं।
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दूसरी किश्त के अभाव अटका निर्माण कार्य
एक व्यायामशाला के निर्माण के लिए 29 लाख रुपये निर्धारित किए गए थे। ऐसे मे कुल बजट करीब 9 करोड़ रुपये निर्धारित हुआ था। सरकार की ओर से वर्ष 2016 में 6 करोड़ रुपये की पहली किश्त जारी की गई थी। अधिकतर गांवों में व्यायामशालाओं को निर्माण कार्य शुरू भी हो गया था। लेकिन दूसरी किश्त के अभाव में निर्माण अटकने से पहले किया गया कार्य भी बदहाल होता जा रहा है।
योग के साथ स्थानीय खेलों को बढ़ावा देना था मकसद
गांवों में व्यायामशालाएं खोलने का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को योग के अलावा कुश्ती व कबड्डी आदि के माध्यम से फिट रखने का था। इसके अलावा बच्चों में खेल भावना बचपन से ही आ सके, इसे लिए एक माहौल तैयार करना था। उम्मीद की गई थी कि व्यायामशालाएं खुलने से स्टेट, नेशनल व इंटरनेशनल स्तर पर हरियाणा के खिलाड़ी पहले के मुकाबले ज्यादा से ज्यादा मेडल ला सकेंगे।
इन गांवों में खोली जानी थी व्यायामशालाएं:
खंड रेवाड़ी : कापड़ीवास, काकोड़िया, गिंदोखर, माजरा गुरदास, खिजूरी, खरखड़ा और ततारपुर इस्तमुरार।
खंड खोल : कुंडल, बुड़ौली, धवाना, अहरोद, ऊंचा, भटेड़ा, खोरी और प्राणपुरा। खंड बावल : झाबुआ, नांगल तेजू, खंडोड़ा, सुलखा, राजगढ़, आनंदपुर, अलावलपुर, बोलनी, मोहम्मदपुर, भूड़ला, ड्योढई, बालावास, हरचंदपुर, टांकड़ी और कसौली। पंचायतीराज विभाग की ओर से जिले के 33 गांवों में यह व्यायामशालाएं बनानी थी। जिनमें 20 का उद्घाटन पहले किया जा चुका है। जबकि बाकी रही 11 में से अलावलपुर और मीरपुर गांव में जगह उपलब्ध नहीं हो पाई है।

इस संबंध में पंचायती राज विभाग के एक्सईएन नरेंद्र गुलिया ने कहा कि मैंने एक दो दिन पहले ही कार्यभार संभाला है। जल्द ही व्यायामशालाओं के निर्माण कार्य को गति प्रदान की जाएगी।
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