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हाथों की लकीरों ने मुंह का निवाला रोका
Updated Sat, 16 Sep 2017 01:55 PM IST
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हाथों की लकीरों ने मुंह का निवाला रोका
अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
राशन वितरण में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सरकार की तरफ से शुरू की गई पीओएस स्कीम से जिले के हजारों लोगों का निवाला अटक गया है। इसके तहत एक मशीन से फिंगर प्रिंट मैच होना जरूरी है। मजदूर और वृद्धों के फिंगर प्रिंट मैच नहीं होने से अब उनको राशन के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। गरीबी रेखा से ऊपर के लोगों को छोड़ दिया जाए तो जिले में 283210 लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली से राशन देने का प्रावधान है। इनमें से 56642 लोगों के हाथ ही अब निवाले में रोडा बन गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा परेशानी मजदूर और बुजुुर्गों को हो रही है। इनके फिंगर प्रिंट एक प्वाइंट ऑफ सेल्स मशीन (पीओएस) से मैच नहीं खाते। हालांकि फूड सप्लाई एवं नियंत्रण विभाग वैकल्पिक व्यवस्था की बात कहता है। जानकारी नहीं होने से जरूरतमंदों को विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जिले में प्रत्येक महीने औसतन 16 हजार क्विंटल गेहूूं का वितरण किया जाता है।
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निशान मिटने के कारण हो रही है दिक्कत
जानकारी के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ एवं मजदूरी करने के कारण अंगुलियों के निशान मिट जाते हैं। जिसके चलते लोगों को आधार कार्ड बनवाने से लेकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। बहुत परिवार ऐसे भी हैं। जिनका चूल्हा इस राशन से ही गर्म होता है। जिले में अभी तक केवल 76 फीसदी राशन कार्ड ही आधार से जोड़े जा सके हैं।
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125232 लोगों नहीं मिल रहा राशन
प्राकृतिक समस्या के साथ कुछ ऐसे भी लोग हैं जो तकनीकी समस्या का खामियाजा भी भुगत रहे हैं। जिले में कुल राशन कार्ड है 206657 हैं। 123043 राशन कार्ड के करीब 590677 लोग गरीब रेखा से ऊपर जीवन यापन कर रहे हैं। बचे हुए 372645 लोग सरकार से सस्ते दामों में मिलने वाले राशन पर ही निर्भर हैं। खाद्य सुरक्षा कानून के तहत शहर में 2427 कार्ड के 10304 लोग, गांव के 34783 राशन कार्ड पर 160333 लोगों को राशन मिल रहा है। वहीं स्टेट बीपीएल के 18472 राशन कार्ड पर 81838 और केंद्रीय बीपीएल के तहत 14155 राशन कार्ड पर 64249 लोगों को राशन वितरित करने की योजना बनाई गई है। इसमें एएवाई श्रेणी करीब 55984 लोग हैं। ऐसे में यदि इन लोगों का किसी भी खामी के चलते राशन रुक जाए तो पेट पर आफत बन सकती है।
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गांवों में नेटवर्क नहीं होना और बैट्री डेड होना है परेशानी
उपभोक्ताओं का कहना है कि गांवों में नेटवर्क नहीं आने के चलते उन्हें कई दिन तक राशन नहीं मिल पाता है। लोगों का कहना है कि हर दूसरे महीने इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिले के बावल के कुंड और खोल के अधिकतर गांवों में इस तरह की परेशानी आती है। उल्लेखनीय है कि मशीनें जैसे-जैसे मुख्यालय से दूर जाते हैं नेटवर्क कमजोर होता जाता है। वहीं नाम बैट्री की क्वालिटी अच्छी नहीं होने के कारण बैट्री जल्द डेड हो जाती है।
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12 साल बाद बनेंगे नए राशन कार्ड
जिले में वर्ष 2005 के बाद नए राशन कार्ड नहीं बन पाए हैं। इसके चलते लोगों को राशन कार्ड में नए नाम जुड़वाने और कटवाने में विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं। 12 साल बाद अब जल्द ही जिले में नए राशन कार्ड बनने का काम शुरू हो जाएगा। प्रदेश में दो जिलों में प्रिंट होने के बाद राशन कार्ड पहुंच भी चुके हैं। जिले में एक सप्ताह के अंदर नए राशन कार्ड पहुंचने की उम्मीद है। शहर के सभी 31 वार्ड एवं सभी ग्राम पंचायतों में फार्म भरने के बार उनका वैरीफिकेशन होने के बाद नए राशन कार्ड जारी किए जाएंगे।
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वार्ड-
जिन लोगों को फिंगर प्रिंट नहीं मैच कर रहे हैं। उनको वैकल्पिक तौर पर पड़ोसी और अन्य को नॉमिनी बनाने का निर्देश जारी किया गया है। नेटवर्क की समस्या का समाधान भी काफी हद तक कर दिया गया है। वहीं बैट्री की समस्या के लिए संबधित कंपनी को लिखा गया है। जिले में 76 फीसदी लोग और 87 फीसदी राशन कार्ड को आधार से जोड़ा जा चुका है। जल्द ही जिले में नए राशन कार्ड बनाने का काम शुरू किया जाएगा। - केके गोयल, डीएफएससी, रेवाड़ी।
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अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
राशन वितरण में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सरकार की तरफ से शुरू की गई पीओएस स्कीम से जिले के हजारों लोगों का निवाला अटक गया है। इसके तहत एक मशीन से फिंगर प्रिंट मैच होना जरूरी है। मजदूर और वृद्धों के फिंगर प्रिंट मैच नहीं होने से अब उनको राशन के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। गरीबी रेखा से ऊपर के लोगों को छोड़ दिया जाए तो जिले में 283210 लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली से राशन देने का प्रावधान है। इनमें से 56642 लोगों के हाथ ही अब निवाले में रोडा बन गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा परेशानी मजदूर और बुजुुर्गों को हो रही है। इनके फिंगर प्रिंट एक प्वाइंट ऑफ सेल्स मशीन (पीओएस) से मैच नहीं खाते। हालांकि फूड सप्लाई एवं नियंत्रण विभाग वैकल्पिक व्यवस्था की बात कहता है। जानकारी नहीं होने से जरूरतमंदों को विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जिले में प्रत्येक महीने औसतन 16 हजार क्विंटल गेहूूं का वितरण किया जाता है।
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निशान मिटने के कारण हो रही है दिक्कत
जानकारी के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ एवं मजदूरी करने के कारण अंगुलियों के निशान मिट जाते हैं। जिसके चलते लोगों को आधार कार्ड बनवाने से लेकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। बहुत परिवार ऐसे भी हैं। जिनका चूल्हा इस राशन से ही गर्म होता है। जिले में अभी तक केवल 76 फीसदी राशन कार्ड ही आधार से जोड़े जा सके हैं।
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125232 लोगों नहीं मिल रहा राशन
प्राकृतिक समस्या के साथ कुछ ऐसे भी लोग हैं जो तकनीकी समस्या का खामियाजा भी भुगत रहे हैं। जिले में कुल राशन कार्ड है 206657 हैं। 123043 राशन कार्ड के करीब 590677 लोग गरीब रेखा से ऊपर जीवन यापन कर रहे हैं। बचे हुए 372645 लोग सरकार से सस्ते दामों में मिलने वाले राशन पर ही निर्भर हैं। खाद्य सुरक्षा कानून के तहत शहर में 2427 कार्ड के 10304 लोग, गांव के 34783 राशन कार्ड पर 160333 लोगों को राशन मिल रहा है। वहीं स्टेट बीपीएल के 18472 राशन कार्ड पर 81838 और केंद्रीय बीपीएल के तहत 14155 राशन कार्ड पर 64249 लोगों को राशन वितरित करने की योजना बनाई गई है। इसमें एएवाई श्रेणी करीब 55984 लोग हैं। ऐसे में यदि इन लोगों का किसी भी खामी के चलते राशन रुक जाए तो पेट पर आफत बन सकती है।
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गांवों में नेटवर्क नहीं होना और बैट्री डेड होना है परेशानी
उपभोक्ताओं का कहना है कि गांवों में नेटवर्क नहीं आने के चलते उन्हें कई दिन तक राशन नहीं मिल पाता है। लोगों का कहना है कि हर दूसरे महीने इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिले के बावल के कुंड और खोल के अधिकतर गांवों में इस तरह की परेशानी आती है। उल्लेखनीय है कि मशीनें जैसे-जैसे मुख्यालय से दूर जाते हैं नेटवर्क कमजोर होता जाता है। वहीं नाम बैट्री की क्वालिटी अच्छी नहीं होने के कारण बैट्री जल्द डेड हो जाती है।
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12 साल बाद बनेंगे नए राशन कार्ड
जिले में वर्ष 2005 के बाद नए राशन कार्ड नहीं बन पाए हैं। इसके चलते लोगों को राशन कार्ड में नए नाम जुड़वाने और कटवाने में विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं। 12 साल बाद अब जल्द ही जिले में नए राशन कार्ड बनने का काम शुरू हो जाएगा। प्रदेश में दो जिलों में प्रिंट होने के बाद राशन कार्ड पहुंच भी चुके हैं। जिले में एक सप्ताह के अंदर नए राशन कार्ड पहुंचने की उम्मीद है। शहर के सभी 31 वार्ड एवं सभी ग्राम पंचायतों में फार्म भरने के बार उनका वैरीफिकेशन होने के बाद नए राशन कार्ड जारी किए जाएंगे।
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वार्ड-
जिन लोगों को फिंगर प्रिंट नहीं मैच कर रहे हैं। उनको वैकल्पिक तौर पर पड़ोसी और अन्य को नॉमिनी बनाने का निर्देश जारी किया गया है। नेटवर्क की समस्या का समाधान भी काफी हद तक कर दिया गया है। वहीं बैट्री की समस्या के लिए संबधित कंपनी को लिखा गया है। जिले में 76 फीसदी लोग और 87 फीसदी राशन कार्ड को आधार से जोड़ा जा चुका है। जल्द ही जिले में नए राशन कार्ड बनाने का काम शुरू किया जाएगा। - केके गोयल, डीएफएससी, रेवाड़ी।