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शहर की आधी आबादी पी रही दूषित पानी

अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी Updated Sat, 12 Dec 2015 12:35 AM IST
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जिले की नौ लाख आबादी में साठ फीसदी से ज्यादा आबादी दूषित पानी पी रही है। ये हकीकत नागरिक अस्पताल में मई में लगे वॉटर टेस्टिंग यूनिट के लगने से सामने आई है।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से पूरे जिले से पिछले छह महीनों में 350 से ज्यादा सैंपल लिए गए, जिनमें से 216 से अधिक सैंपल फैल पाए गए।

आलम यह है कि सार्वजनिक जगहों रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस स्टैंड व राजकीय माध्यमिक विद्यालय से लिए गए पानी के नमूनों के मोस्ट प्रोबेबल नंबर की संख्या 25 तक पाई गई है। इसके अलावा आधे से ज्यादा स्कूलों और सेक्टर चार के पंप हाउस से सप्लाई होने वाले पानी के नमूने भी फेल पाए गए हैं।


क्या है सैंपल लेने का मानक...................
जिले में पानी की शुद्धता को मापने के लिए रेवाड़ी नागरिक अस्पताल में मई माह में एक वाटर टेस्टिंग यूनिट का इंस्टालेशन किया गया था।

स्वास्थ विभाग के चिकित्सकों व प्रशासन ने मामले की गंभीरता हो समझते हुए जिले के अधिकतर स्कूलों, सार्वजनिक जगहों, सीएचसी, पीएचसी व अनेक गांवो से पानी के नमूने एकत्रित कर उनकी जांच की गई। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 350 से ज्यादा सैंपल लिए। सैंपल की टेस्टिंग के बाद गंभीर व चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया,जिसमें 216 से सैंपल फैल पाए गए।

पचास फीसदी से ज्यादा स्कूलों में दूषित पानी
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के सरकारी व निजी स्कूलों से पानी के सैंपल लिए गए। टेस्टिंग के बाद लोगों के सामने चाैंकाने वाले आंकड़े सामने आए। टेस्टिंग में शहर के राजकीय सीनियर सेकंडरी स्कूल सहित पचास फीसदी से ज्यादा प्राइमरी व अन्य सरकारी व निजी स्कूल के नमूनों की गुणवत्ता इतनी गंभीर है कि उनका नंबर 25 तक पाया गया। इस श्रेणी में सरकारी स्कूलों  के साथ शहर के निजी स्कूल भी पीछे नहीं है। चिकित्सकों की माने तो दूषित पानी पीने से सबसे ज्यादा स्कूल के बच्चे प्रभावित होते हैं।

पानी के नमूने लेने के यह रहे मानक
पानी की शुद्धता अर्थात पानी में मौजूद बैक्टीरिया की संख्या को जानने के लिए मोस्ट प्रोबेबल नंबर से जाना जाता है। यदि एमपीएन नंबर तीन और इससे कम आता है तो पानी को शुद्ध माना जाता है। वहीं यदि एमपीएन की संख्या तीन से ज्यादा आ जाती है तो पानी के सैंपल फेल माने जाते हैं। हालात यह है कि जब जिले से पानी के नमूने लिए गए तो एमपीएन अधिकतर 20 और 25 पाया गया है।

यह हो सकती हैं बीमारियां
डॉक्टरों के मुताबिक मनुष्य की आंत में में बैक्टीरिया के जाने से पीलिया, टायफाइड, डेंगू जैसी घातक बीमारियों के होने का डर बना रहता है। हम यहां यह बता दें कि यह बैक्टीरिया दूषित पानी के माध्यम से मनुष्य की आंत में प्रवेश कर जाता है। इससे वहां पर इसे पनपने के लिए उपयुक्त वातावरण मिल जाता है। तथा वहां पर रहकर यह मानव के लीवर को डैमेज करने में लग जाता है।

दुषित पानी पीने गंभीर बीमारियों को होने का डर रहता है, हमारे यहां लैब में जौ सैंपल आए थे उनमे से अधितर फेल पाए गए हैं। फेल पाए सैंपल वाली जगहों पर क्लोनिरेशन अति आवश्यक है।
-डॉ रेनू बंसल, माइक्रोबाइलोजोस्टि, नागरिक अस्पताल
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पानी के सैंपल फेल आने के बाद इसकी रिपोर्ट जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन को भेज दी जाती है, ताकि वहां पर क्लोरिनेशन कराया जा सके। पानी के सैंपल फेल आना गंभीर विषय है। लोगों को चाहिए कि वह पानी को उबालकर पीएं।
-डॉ जैके सैनी, डिप्टी सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल

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