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Rewari News: 25 दुकानदारों पर 10 लाख रुपये का लगाया जुर्माना
Wed, 01 Oct 2025 12:07 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 01 Oct 2025 12:07 AM IST
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रेवाड़ी। लघु सचिवालय स्थित एडीसी कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान खाद्य पदार्थों में मिलावट और नियमों का उल्लंघन करने के मामले में 25 दुकानदारों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना दुकानदारों पर अलग-अलग श्रेणियों में लगाया गया है। जुर्माने के साथ ही दुकानदारों को भविष्य में नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई है।
खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन विभाग की टीम के अनुसार तीन माह पूर्व विभाग की टीम ने जिले के विभिन्न कस्बों और बाजारों से पनीर, मिल्क केक, खोया, मैदा, सूजी, बेसन सहित अन्य खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए थे। इन नमूनों को जांच के लिए लैब में भेजा गया।
जांच रिपोर्ट में कई नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसमें मिलावट, घटिया गुणवत्ता और अनुचित तरीके से रख-रखाव की शिकायतें सामने आईं। इसके साथ ही कई दुकानदार बिना लाइसेंस के ही खाद्य सामग्री का व्यापार करते पाए गए।
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वहीं, खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने मंगलवार को अलग-अलग स्थानों से 3 सैंपल लिए हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि शहर के सर्कुलर रोड, गढ़ी बोलनी रोड ओर पदैयावास गांव में स्थित दुकानदारों के यहां से खोया, पनीर ओर दूध के सैंपल लिए गए। इन सैंपलों को जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा।
सात साल के लिए जा सकते हैं जेल
विभाग के अनुसार प्रीवेंशन ऑफ फूड आल्ट्रेशन एक्ट-1954 के तहत मिलावटखोरों पर जुर्माने के साथ सात साल तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि एक्ट में इसे विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है। यदि कोई खाद्य पदार्थ बिना लाइसेंस के पैक कर बेचा जा रहा है तो बेचने वाले पर तीन लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं यदि कोई खाद्य पदार्थ का सैंपल जांच के दौरान तय मानकों के अनुसार नहीं पाया जाता है तो बेचने वाले के खिलाफ पांच लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं यदि जांच रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ अर्थात खाने के लिए अयोग्य पाया जाता है तो मिलावटखोर को सात साल तक सलाखों के पीछे रहना पड़ सकता है।
वर्जन
एडीसी कोर्ट ने मंगलवार को 25 दुकानदारों पर 10 लाख का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा शहर में 2 ओर एक गांव में 1 दुकानदार के यहां से 3 खाद्य पदार्थ के सैंपल लिए गए हैं। त्योहारी सीजन नजदीक है। इसलिए खाद्य पदार्थ बनाने वाले दुकानदारों के यहां लगातार सैंपल लेने की कार्यवाही लगातार जारी रहेगी। -डॉ. राजेश वर्मा, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन विभाग की टीम के अनुसार तीन माह पूर्व विभाग की टीम ने जिले के विभिन्न कस्बों और बाजारों से पनीर, मिल्क केक, खोया, मैदा, सूजी, बेसन सहित अन्य खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए थे। इन नमूनों को जांच के लिए लैब में भेजा गया।
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जांच रिपोर्ट में कई नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसमें मिलावट, घटिया गुणवत्ता और अनुचित तरीके से रख-रखाव की शिकायतें सामने आईं। इसके साथ ही कई दुकानदार बिना लाइसेंस के ही खाद्य सामग्री का व्यापार करते पाए गए।
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वहीं, खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने मंगलवार को अलग-अलग स्थानों से 3 सैंपल लिए हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि शहर के सर्कुलर रोड, गढ़ी बोलनी रोड ओर पदैयावास गांव में स्थित दुकानदारों के यहां से खोया, पनीर ओर दूध के सैंपल लिए गए। इन सैंपलों को जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा।
सात साल के लिए जा सकते हैं जेल
विभाग के अनुसार प्रीवेंशन ऑफ फूड आल्ट्रेशन एक्ट-1954 के तहत मिलावटखोरों पर जुर्माने के साथ सात साल तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि एक्ट में इसे विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है। यदि कोई खाद्य पदार्थ बिना लाइसेंस के पैक कर बेचा जा रहा है तो बेचने वाले पर तीन लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं यदि कोई खाद्य पदार्थ का सैंपल जांच के दौरान तय मानकों के अनुसार नहीं पाया जाता है तो बेचने वाले के खिलाफ पांच लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं यदि जांच रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ अर्थात खाने के लिए अयोग्य पाया जाता है तो मिलावटखोर को सात साल तक सलाखों के पीछे रहना पड़ सकता है।
वर्जन
एडीसी कोर्ट ने मंगलवार को 25 दुकानदारों पर 10 लाख का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा शहर में 2 ओर एक गांव में 1 दुकानदार के यहां से 3 खाद्य पदार्थ के सैंपल लिए गए हैं। त्योहारी सीजन नजदीक है। इसलिए खाद्य पदार्थ बनाने वाले दुकानदारों के यहां लगातार सैंपल लेने की कार्यवाही लगातार जारी रहेगी। -डॉ. राजेश वर्मा, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी