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शहीद अमीलाल के परिजनों को 30 साल से है न्याय का इंतजार

Tue, 19 Jun 2018 12:52 AM IST
Updated Tue, 19 Jun 2018 12:52 AM IST
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शहीद अमीलाल के परिजनों को 30 साल से है न्याय का इंतजार
शहीद अमीलाल के परिजनों को 30 साल से है न्याय का इंतजार
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। देश की आजादी के समय अहीरवाल के वीर शूरमाओं ने जम्मू-कश्मीर में अपने पराक्रम के जरिए पाकिस्तान की कबायली सेना को खदेड़ दिया था। इसी युद्ध में चार कुंमाउ रेजीमेंट में सिपाही के पद पर कार्यरत गांव धामलावास निवासी अमीलाल सिंह भी 19 जून 1948 को शहीद हो गए थे। शहीद होने के बाद वर्ष 1950 में अमीलाल सहित 37 सैनिकों का नाम वीरचक्र के लिए नामित हुआ था। इसमें अमीलाल का नाम भी शामिल था। लेकिन यह वीरचक्र मरणोपरांत शहीद के परिजनों के बजाय सरकार ने गुरुग्राम जिले को जीवित अमीलाल को देकर तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र सिंह ने सम्मानित कर दिया था। वर्ष 1988 तक धामलावास निवासी शहीद अमीलाल के परिवार भी इस बात से अनजान थे उनको वीरचक्र मिला। उनके परिवार के सदस्य ने जब उनकी पेंशन बुक में विक्टोरिया आर क्रास के लिए जानकारी जुटाई तो पता चला कि अमीलाल को वीरचक्र दिया गया है। इसके बाद परिवार के लोगों ने शिकायत की तो पता चला कि उस युद्ध में केवल एक ही अमीलाल नाम के सैनिक थे जो कि शहीद हो गए थे, जबकि जो वीरचक्र दिया गया था वह एक सेवानिवृत्त अमीलाल को दे दिया गया था जो कि गुरुग्राम जिला के थे। उस समय रेवाड़ी जिला भी गुरुग्राम का ही हिस्सा था। सेना के स्तर पर हुई इस चूक के सामने आने के 30 साल बीत बाद भी शहीद अमीलाल के परिजनों को उनका वीरचक्र नहीं दिया गया है। शहीद अमीलाल के पोते दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि उन्हें जब इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने तत्कालीन रक्षा राज्यमंत्री हरेन पाठक तक से मुलाकात की लेकिन कोई समाधान नहीं किया गया। इसके बाद उनकी दादी गिंदोडी (जो कि अब जीतिव नहीं है) ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्नल राव रामसिंह के समक्ष भी अपनी पीड़ा बताई। इसके बाद भी उन्होंने इस मामले में कार्रवाई का भरोसा भी दिलाया लेकिन न्याय नहीं मिला।

सम्मान के इंतजार में दादी की मौत
शहीद अमीलाल के पोते ने बताया कि उन्होंने हर स्तर पर शिकायत की लेकिन कोई हल नहीं निकला तो उन्होंने भी उम्मीद छोड़ दी। इसके बाद वर्ष 2008 में दादी गिंदोडी देवी का भी निधन हो गया लेकिन उनकी हसरत पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि उनका बेटा भी सेना में है लेकिन सेना द्वारा इतना अन्याय किए जाने के बाद भी न्याय नहीं देना बड़े शर्म की बात है।
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शहीद अमीलाल की जयंती पर आज हवन
शहीद अमीलाल की 71 वी जयंती के उपलक्ष्य में उनके गांव धामलावास स्थित उनके स्मारक स्थल पर 19 जून को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस अवसर पर सुबह के समय हवन-यज्ञ किया जाएगा तथा इसके बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा।
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