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तत्काल कनेक्शन के लिए ढाई लाख कराए जाम फिर भी कटा रहे चक्कर
Updated Mon, 23 Apr 2018 01:17 AM IST
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ढाई लाख जमा कराने के बावजूद छह माह में नहीं मिला बिजली का तत्काल कनेक्शन
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
कृषि कनेक्शनों के लिए बिजली निगम की रफ्तार अभी भी बेहद सुस्त है। तत्काल कनेक्शन योजना में ढाई लाख रुपये जमा करवाने के बाद भी कार्यालयों के चक्कर कटवाए जा रहे हैं। इससे परेशान होकर किसान अब कानूनों का सहारा ले रहे हैं।
गांव जैनाबाद निवासी घीसाराम ने निगम की तत्काल स्कीम के तहत पिछले वर्ष 16 अक्टूबर को आवेदन कर 4500 रुपये जमा कराए थे। इसके बाद निगम की तरफ से जारी डिमांड नोटिस के बाद एक लाख रुपये और उसके बाद 30 नवंबर को 1.40 लाख रुपये जमा कराए थे। उन्होंने बताया कि इस प्रकार उसने 2.45 लाख से अधिक रुपये निगम के पास जमा करा दिए थे। तत्काल योजना में अधिकतम 45 दिनों में कनेक्शन किया जाना होता है लेकिन उसके बाद भी तय सीमा में कनेक्शन नहीं दिया गया। अभी छह माह से भी अधिक का समय हो चुका है लेकिन कनेक्शन नहीं दिया गया है। पीड़ित किसान ने इसके बाद न्यायालय का सहारा लिया है। अधिवक्ता एडवोकेट राजेंद्र सिंह का कहना है कि इसकी वजह से किसान का बहुत अधिक नुकसान हो गया है। हालात यह हैं कि अभी तक अधिकारियों द्वारा समस्या के समाधान की बजाय चक्कर लगवाया जा रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
कृषि कनेक्शनों के लिए बिजली निगम की रफ्तार अभी भी बेहद सुस्त है। तत्काल कनेक्शन योजना में ढाई लाख रुपये जमा करवाने के बाद भी कार्यालयों के चक्कर कटवाए जा रहे हैं। इससे परेशान होकर किसान अब कानूनों का सहारा ले रहे हैं।
गांव जैनाबाद निवासी घीसाराम ने निगम की तत्काल स्कीम के तहत पिछले वर्ष 16 अक्टूबर को आवेदन कर 4500 रुपये जमा कराए थे। इसके बाद निगम की तरफ से जारी डिमांड नोटिस के बाद एक लाख रुपये और उसके बाद 30 नवंबर को 1.40 लाख रुपये जमा कराए थे। उन्होंने बताया कि इस प्रकार उसने 2.45 लाख से अधिक रुपये निगम के पास जमा करा दिए थे। तत्काल योजना में अधिकतम 45 दिनों में कनेक्शन किया जाना होता है लेकिन उसके बाद भी तय सीमा में कनेक्शन नहीं दिया गया। अभी छह माह से भी अधिक का समय हो चुका है लेकिन कनेक्शन नहीं दिया गया है। पीड़ित किसान ने इसके बाद न्यायालय का सहारा लिया है। अधिवक्ता एडवोकेट राजेंद्र सिंह का कहना है कि इसकी वजह से किसान का बहुत अधिक नुकसान हो गया है। हालात यह हैं कि अभी तक अधिकारियों द्वारा समस्या के समाधान की बजाय चक्कर लगवाया जा रहा है।
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