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हाईवे के अवैध कट बन रहे हैं लोगों का ‘काल’
Updated Sat, 09 Dec 2017 11:29 PM IST
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हाईवे के अवैध कट बन रहे हैं लोगों के ‘काल’
अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
जिले से होकर गुजर रहे नेशनल और स्टेट हाईवे पर बनाए अवैध कट शार्टकट के चक्कर में लोगों के लिए काल साबित हो रहे हैं। गत वर्षों के दौरान इन कटों पर शार्टकट के चक्कर में कई भीषण दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें एक साथ सात मौतें तक हो चुकी हैं। आए दिन होने वाले हादसों से सबक लेना तो दूर प्रशासन ने इन क्षेत्रों में सुरक्षा के उपाय तक नहीं किए हैं। रेवाड़ी से नेशनल राजमार्ग संख्या- 8, रेवाड़ी से बीकानेर और रेवाड़ी से पानीपत हाईवे संख्या-71 गुजर रहे हैं। इसी के साथ गुरुग्राम से वाया पटौदी-रेवाड़ी को भी राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया जा चुका है। रेवाड़ी- लोहारू, रेवाड़ी-सोहना स्टेट हाईवे भी रेवाड़ी से होकर गुजरते हैं। इन सभी में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 8 और राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 71 पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। हादसों मेें तकनीकी के साथ स्थानीय लोगों द्वारा सुविधा अनुसार शार्टकट के लिए बनाए कट प्रमुख कारण हैं। खराब मौसम और धुंध के समय इन कटों पर सबसे अधिक परेशानी वाहन चालकों को होती है। आने वाले दिनों में धुंध और ज्यादा सर्दी पढ़ने के कारण आवागमन में होने वाली दिक्कतों के मद्देनजर प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाए हैं।
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कापड़ीवास से लेकर बावल के खेड़ा बार्डर तक होते रहते हैं हादसे
कापड़ीवास से लेकर बावल के खेड़ा बॉर्डर तक एक दर्जन से अधिक मौत के कट बने हैं। इन कटों के कारण सैकड़ों घरों के चिरा बुझ चुके हैं। इससे न तो लोगों ने सबक लिया और न ही राजमार्ग प्राधिकरण अथारिटी की तरफ से कोई कदम उठाए गए। कापड़ीवास कट, बिसटेक, आसलवास कट, निखरी, बावल कट सहित अनेक कट हैं, जहां पर आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। इसी के साथ नेशनल राजमार्ग संख्या- 71 पर भी अवैध कटों के चलते लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। एनएच- 71 पर बांबड, रामगढ़-भगवानपुर यूनिवर्सिटी रोड, बीकानेर के पास टोल टैक्स से पहले कट एवं पाल्हावास सहित अनेक कटों के चलते हादसे हो रहे हैं।
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अंडरपास और ओवरब्रिज नहीं होना भी है हादसों का कारण
यूं तो सभी हाईवे पर लोगों ने मनमाने कट बनाए हैं। दुर्घटनाओं का यह इकलौता कारण नहीं है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 8 व्यस्ततम हाईवे में से एक है, लेकिन इस पर कई जगहों पर न तो अंडरपास है और न ही ओवरब्रिज है। यही कारण है कि यहां से पास होने वालेे वाहन तेज गति से चलने वाले यातायात की चपेट में आ जाते हैं। बनीपुर चौक पर उद्योगपतियों के साथ अनेक सामाजिक संगठनों की ओर से भी ओवरब्रिज बनाए जाने की मांग की जा चुकी है। बावजूद इसके कोई समाधान नहीं हुआ है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क दुर्घटनाएं
केस-1: एनएच-71 स्थित रोहड़ाई गांव के समीप बने कट पर 17 अगस्त 2016 कसे बुड़ाना निवासी 23 वर्षीय सुनील की मौत हो गई थी। सुनील गांव मानकपुर में ससुराल आया था। बाइक पर सवार होकर घर वापस जाते समय हाईवे पर कट पार करते समय बुलेरो ने बाइक में टक्कर मार दी थी। हादसे में उसकी मौत हो गई थी।
केस-2: धारूहेड़ा में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-8 पर वर्ष 2013 में निखरी कट के पास एक्सीडेंट में तीन की मौत हो गई थी। सुबह 11 बजे हुई हादसे में 45 वर्षीय महिला, एक अन्य महिला बलेश देवी एवं 23 वर्षीय विक्रम की मौत हो गई थी।
केस -3 : तीन की मौत पांच घायल
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 8 पर 22 मई 2014 को भीषण हादसे में तीन की मौत हुई जबकि पांच लोग घायल हो गए थे। मृतक और घायल बावल के प्राणपुरा के रहने वाले थे। सभी बुलेरो में सवार होकर जा रहे थे। तभी कट पार करते समय आ रहे कैंटर ने उसको टक्कर मार दी। हादसा अलवर जाते समय हुआ था।
केस- 4 : सात की मौत दो गंभीर
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 8 पर 9 जनवरी 2015 को आसलवास कट के पास दर्दनाक हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी। इसमें दो लोग गंभीर घायल हो गए थे। हादसा एक स्कॉर्पियो और ट्रॉले की टक्कर से हुआ था। इसमें छह लोगों की मौके पर ही एक की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। जिले में अभी तक यह सबसे भीषण हादसा है।
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गत माह हुए थे 59 सड़क हादसे
यूं तो यहां आए दिन सड़क दुुर्घटनाएं होती रहती हैं। अगर नवंबर माह की बात करें तो एक माह के भीतर 59 सड़क हादसे हुए। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ स्थित कसौला थाने में 22, बावल में 10, धारूहेड़ा में छह और राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-71 पर रोहड़ाई थाने में दो, सदर में दो, सिटी में छह, मॉडल टाउन में दो हादसे दर्ज हुए। इसी साथ रेवाड़ी-बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर खोल थाने में छह एवं रामपुरा में तीन में मामले दर्ज हुए। इनमें कई मामलों में मौतें भी हुई हैं।
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पुलिस की तरफ सतर्कता के पूरे प्रयास किए जाते हैं। ऐसे कटों पर पीडब्ल्यूडी की मदद से जलने वाली लाइटें लगाई जा रही हैं ताकि अंधेरे और धुंध में वाहन चालकों को दूर से ही कट का पता लग सके। - सूरजभान, यातायात प्रभारी, रेवाड़ी
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अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
जिले से होकर गुजर रहे नेशनल और स्टेट हाईवे पर बनाए अवैध कट शार्टकट के चक्कर में लोगों के लिए काल साबित हो रहे हैं। गत वर्षों के दौरान इन कटों पर शार्टकट के चक्कर में कई भीषण दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें एक साथ सात मौतें तक हो चुकी हैं। आए दिन होने वाले हादसों से सबक लेना तो दूर प्रशासन ने इन क्षेत्रों में सुरक्षा के उपाय तक नहीं किए हैं। रेवाड़ी से नेशनल राजमार्ग संख्या- 8, रेवाड़ी से बीकानेर और रेवाड़ी से पानीपत हाईवे संख्या-71 गुजर रहे हैं। इसी के साथ गुरुग्राम से वाया पटौदी-रेवाड़ी को भी राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया जा चुका है। रेवाड़ी- लोहारू, रेवाड़ी-सोहना स्टेट हाईवे भी रेवाड़ी से होकर गुजरते हैं। इन सभी में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 8 और राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 71 पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। हादसों मेें तकनीकी के साथ स्थानीय लोगों द्वारा सुविधा अनुसार शार्टकट के लिए बनाए कट प्रमुख कारण हैं। खराब मौसम और धुंध के समय इन कटों पर सबसे अधिक परेशानी वाहन चालकों को होती है। आने वाले दिनों में धुंध और ज्यादा सर्दी पढ़ने के कारण आवागमन में होने वाली दिक्कतों के मद्देनजर प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाए हैं।
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कापड़ीवास से लेकर बावल के खेड़ा बार्डर तक होते रहते हैं हादसे
कापड़ीवास से लेकर बावल के खेड़ा बॉर्डर तक एक दर्जन से अधिक मौत के कट बने हैं। इन कटों के कारण सैकड़ों घरों के चिरा बुझ चुके हैं। इससे न तो लोगों ने सबक लिया और न ही राजमार्ग प्राधिकरण अथारिटी की तरफ से कोई कदम उठाए गए। कापड़ीवास कट, बिसटेक, आसलवास कट, निखरी, बावल कट सहित अनेक कट हैं, जहां पर आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। इसी के साथ नेशनल राजमार्ग संख्या- 71 पर भी अवैध कटों के चलते लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। एनएच- 71 पर बांबड, रामगढ़-भगवानपुर यूनिवर्सिटी रोड, बीकानेर के पास टोल टैक्स से पहले कट एवं पाल्हावास सहित अनेक कटों के चलते हादसे हो रहे हैं।
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अंडरपास और ओवरब्रिज नहीं होना भी है हादसों का कारण
यूं तो सभी हाईवे पर लोगों ने मनमाने कट बनाए हैं। दुर्घटनाओं का यह इकलौता कारण नहीं है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 8 व्यस्ततम हाईवे में से एक है, लेकिन इस पर कई जगहों पर न तो अंडरपास है और न ही ओवरब्रिज है। यही कारण है कि यहां से पास होने वालेे वाहन तेज गति से चलने वाले यातायात की चपेट में आ जाते हैं। बनीपुर चौक पर उद्योगपतियों के साथ अनेक सामाजिक संगठनों की ओर से भी ओवरब्रिज बनाए जाने की मांग की जा चुकी है। बावजूद इसके कोई समाधान नहीं हुआ है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क दुर्घटनाएं
केस-1: एनएच-71 स्थित रोहड़ाई गांव के समीप बने कट पर 17 अगस्त 2016 कसे बुड़ाना निवासी 23 वर्षीय सुनील की मौत हो गई थी। सुनील गांव मानकपुर में ससुराल आया था। बाइक पर सवार होकर घर वापस जाते समय हाईवे पर कट पार करते समय बुलेरो ने बाइक में टक्कर मार दी थी। हादसे में उसकी मौत हो गई थी।
केस-2: धारूहेड़ा में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-8 पर वर्ष 2013 में निखरी कट के पास एक्सीडेंट में तीन की मौत हो गई थी। सुबह 11 बजे हुई हादसे में 45 वर्षीय महिला, एक अन्य महिला बलेश देवी एवं 23 वर्षीय विक्रम की मौत हो गई थी।
केस -3 : तीन की मौत पांच घायल
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 8 पर 22 मई 2014 को भीषण हादसे में तीन की मौत हुई जबकि पांच लोग घायल हो गए थे। मृतक और घायल बावल के प्राणपुरा के रहने वाले थे। सभी बुलेरो में सवार होकर जा रहे थे। तभी कट पार करते समय आ रहे कैंटर ने उसको टक्कर मार दी। हादसा अलवर जाते समय हुआ था।
केस- 4 : सात की मौत दो गंभीर
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 8 पर 9 जनवरी 2015 को आसलवास कट के पास दर्दनाक हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी। इसमें दो लोग गंभीर घायल हो गए थे। हादसा एक स्कॉर्पियो और ट्रॉले की टक्कर से हुआ था। इसमें छह लोगों की मौके पर ही एक की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। जिले में अभी तक यह सबसे भीषण हादसा है।
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गत माह हुए थे 59 सड़क हादसे
यूं तो यहां आए दिन सड़क दुुर्घटनाएं होती रहती हैं। अगर नवंबर माह की बात करें तो एक माह के भीतर 59 सड़क हादसे हुए। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ स्थित कसौला थाने में 22, बावल में 10, धारूहेड़ा में छह और राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-71 पर रोहड़ाई थाने में दो, सदर में दो, सिटी में छह, मॉडल टाउन में दो हादसे दर्ज हुए। इसी साथ रेवाड़ी-बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर खोल थाने में छह एवं रामपुरा में तीन में मामले दर्ज हुए। इनमें कई मामलों में मौतें भी हुई हैं।
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पुलिस की तरफ सतर्कता के पूरे प्रयास किए जाते हैं। ऐसे कटों पर पीडब्ल्यूडी की मदद से जलने वाली लाइटें लगाई जा रही हैं ताकि अंधेरे और धुंध में वाहन चालकों को दूर से ही कट का पता लग सके। - सूरजभान, यातायात प्रभारी, रेवाड़ी