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ग्राम सचिवालय: कहीं लगा है ताला तो कहीं मजदूरों का आश्रय
Updated Sat, 10 Feb 2018 12:04 AM IST
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ग्राम सचिवालय: कहीं लगा है ताला तो कहीं मजदूरों का आश्रय
महेश कुमार
रेवाड़ी।
प्रदेश सरकार की ग्रामीण क्षेत्रों में एक ही छत के नीचे सभी तरह की सुविधाएं देने के लिए बनाए ग्राम सचिवालय आज बिना उपयोग के सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। ना तो इनमें कोई कर्मचारी बैठता है और ना ही कोई काम होता है। ऐसे मेें लाखों खर्च करने के बाद भी वहां रखा सामान धूल फांक रहा है। प्रदेश सरकार ने ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला सचिवालय जाने के झंझट से मुक्ति दिलाने के लिए ग्रामीण अंचलों में ग्राम सचिवालय बनाने की घोषणा की। इसमें तीन से चार ग्राम पंचायतों का एक कलस्टर बनाया गया। रेवाड़ी में 358 ग्राम पंचायतों पर 108 ग्राम सचिवालय बनाने स्वीकृत हुए। इनमें से 83 ग्राम सचिवालय रेवाड़ी में बन भी चुके हैं। रेवाड़ी में पहला ग्राम सचिवालय एक जून 2015 को हांसाका गांव में खुुला। अमर उजाला ने शुक्रवार को रेवाड़ी के विभिन्न ग्राम सचिवालयों की स्थिति देखी।
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बिना काम के ग्राम सचिवालय
प्रदेश सरकार ने ग्राम सचिवालय खोल तो दिए लेकिन व्यवस्थित ढांचा नहीं होने के कारण ये ग्राम सचिवालय खुलने के साथ ही बंद होते चले गए। हालांकि इसके लिए इनमें कंप्यूटर, फर्नीचर सहित अन्य सामान भी रखा गया। नेट कनेक्शन भी दिया। इनका अधिकांश जगह उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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यह होने थे काम
ग्राम सचिवालयों में एक मीटिंग हॉल, पटवारी कक्ष, ग्राम सचिव कक्ष अन्य सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं। ग्राम सचिवालय के तहत ई-सेवा के माध्यम से अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र, पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र, अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र, विशेष पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र, विमुक्त जाति प्रमाण पत्र, आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र, रिहायशी प्रमाण पत्र, बिजली बिल इत्यादि सेवाएं मिलती हैं। सरकार के निर्देशानुसार ग्राम सचिवालय में सोमवार व मंगलवार को पटवारी, बुधवार को ग्राम सचिव, पूरे सप्ताह वीएलसी तथा महीने के आखिरी बुधवार को डिपो होल्डर को ग्राम सचिवालय में बैठना रहता है। इसमें डोमीसाइल, पहचान पत्र, जाति प्रमाणपत्र, आधार व कार्ड वोटिंग कार्ड आदि के कार्य होने थे।
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1. ग्राम सचिवालय, लुहाना
यह ग्राम सचिवालय काफी समय से बंद है। ग्राम सचिवालय में कोई बैठता। यहां पंचायत की तरफ से मजदूरों को ठहराया गया है। ऐसे में ग्राम सचिवालय का सपना साकार ही नहीं हो पा रहा।
2. ग्राम सचिवालय, धवाना
यह ग्राम सचिवालय डेढ़ वर्ष पहले खुला था। लेकिन खुलने के थोड़े दिनों के बाद ही बंद हो गया। यहां कोई नहीं रहता है। गेट पर ताला लगा रहता है।
3. ग्राम सचिवालय, मनेठी
इसका ग्राम सचिवालय धर्मशाला में एक कमरे में बनाया गया। जबकि ग्राम सचिवालय में कम से कम तीन कक्ष होने चाहिए। यह भी थोड़े समय चलने के बाद ही बंद हो गया।
4. ग्राम सचिवालय, कोसली
यह कोसली गांव में वर्ष 2015 में शुरू हुआ था। इसमें पंचायती झोटे रखे जाते हैं। कभी-कभार ग्राम पंचायत होने पर ही यह खुलता है। इससे इसका उपयोग नहीं हो पा रहा। इसमें हजारों रुपये के कचरा पात्र पड़े हैं। साफ-सफाई का भी अभाव है।
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ग्राम सचिवालय धीरे-धीरे खुल रहे हैं। अभी तक जिले में 83 ग्राम सचिवालय बन चुके हैं। जहां कहीं दिक्कत है वहां व्यवस्था ठीक की जाएगी। किसी को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। - एसी कौशिक, डीडीपीओ, रेवाड़ी
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महेश कुमार
रेवाड़ी।
प्रदेश सरकार की ग्रामीण क्षेत्रों में एक ही छत के नीचे सभी तरह की सुविधाएं देने के लिए बनाए ग्राम सचिवालय आज बिना उपयोग के सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। ना तो इनमें कोई कर्मचारी बैठता है और ना ही कोई काम होता है। ऐसे मेें लाखों खर्च करने के बाद भी वहां रखा सामान धूल फांक रहा है। प्रदेश सरकार ने ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला सचिवालय जाने के झंझट से मुक्ति दिलाने के लिए ग्रामीण अंचलों में ग्राम सचिवालय बनाने की घोषणा की। इसमें तीन से चार ग्राम पंचायतों का एक कलस्टर बनाया गया। रेवाड़ी में 358 ग्राम पंचायतों पर 108 ग्राम सचिवालय बनाने स्वीकृत हुए। इनमें से 83 ग्राम सचिवालय रेवाड़ी में बन भी चुके हैं। रेवाड़ी में पहला ग्राम सचिवालय एक जून 2015 को हांसाका गांव में खुुला। अमर उजाला ने शुक्रवार को रेवाड़ी के विभिन्न ग्राम सचिवालयों की स्थिति देखी।
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बिना काम के ग्राम सचिवालय
प्रदेश सरकार ने ग्राम सचिवालय खोल तो दिए लेकिन व्यवस्थित ढांचा नहीं होने के कारण ये ग्राम सचिवालय खुलने के साथ ही बंद होते चले गए। हालांकि इसके लिए इनमें कंप्यूटर, फर्नीचर सहित अन्य सामान भी रखा गया। नेट कनेक्शन भी दिया। इनका अधिकांश जगह उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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यह होने थे काम
ग्राम सचिवालयों में एक मीटिंग हॉल, पटवारी कक्ष, ग्राम सचिव कक्ष अन्य सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं। ग्राम सचिवालय के तहत ई-सेवा के माध्यम से अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र, पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र, अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र, विशेष पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र, विमुक्त जाति प्रमाण पत्र, आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र, रिहायशी प्रमाण पत्र, बिजली बिल इत्यादि सेवाएं मिलती हैं। सरकार के निर्देशानुसार ग्राम सचिवालय में सोमवार व मंगलवार को पटवारी, बुधवार को ग्राम सचिव, पूरे सप्ताह वीएलसी तथा महीने के आखिरी बुधवार को डिपो होल्डर को ग्राम सचिवालय में बैठना रहता है। इसमें डोमीसाइल, पहचान पत्र, जाति प्रमाणपत्र, आधार व कार्ड वोटिंग कार्ड आदि के कार्य होने थे।
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1. ग्राम सचिवालय, लुहाना
यह ग्राम सचिवालय काफी समय से बंद है। ग्राम सचिवालय में कोई बैठता। यहां पंचायत की तरफ से मजदूरों को ठहराया गया है। ऐसे में ग्राम सचिवालय का सपना साकार ही नहीं हो पा रहा।
2. ग्राम सचिवालय, धवाना
यह ग्राम सचिवालय डेढ़ वर्ष पहले खुला था। लेकिन खुलने के थोड़े दिनों के बाद ही बंद हो गया। यहां कोई नहीं रहता है। गेट पर ताला लगा रहता है।
3. ग्राम सचिवालय, मनेठी
इसका ग्राम सचिवालय धर्मशाला में एक कमरे में बनाया गया। जबकि ग्राम सचिवालय में कम से कम तीन कक्ष होने चाहिए। यह भी थोड़े समय चलने के बाद ही बंद हो गया।
4. ग्राम सचिवालय, कोसली
यह कोसली गांव में वर्ष 2015 में शुरू हुआ था। इसमें पंचायती झोटे रखे जाते हैं। कभी-कभार ग्राम पंचायत होने पर ही यह खुलता है। इससे इसका उपयोग नहीं हो पा रहा। इसमें हजारों रुपये के कचरा पात्र पड़े हैं। साफ-सफाई का भी अभाव है।
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ग्राम सचिवालय धीरे-धीरे खुल रहे हैं। अभी तक जिले में 83 ग्राम सचिवालय बन चुके हैं। जहां कहीं दिक्कत है वहां व्यवस्था ठीक की जाएगी। किसी को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। - एसी कौशिक, डीडीपीओ, रेवाड़ी