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पिता ने कहा था सेना में अफसर बनकर ही जाना, बेटा गांव में लेफ्टिनेंट बनकर ही लौटा

Mon, 11 Dec 2017 12:33 AM IST
Updated Mon, 11 Dec 2017 12:33 AM IST
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पिता ने कहा था सेना में अफसर बनकर ही जाना, बेटा गांव में लेफ्टिनेंट बनकर ही लौटा
पिता ने कहा था सेना में अफसर बनकर ही जाना, बेटा गांव में लेफ्टिनेंट बनकर ही लौटा
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संजय कुमार
खोल। (रेवाड़ी)।
पिता ने कहा था बेटा सेना में जाओ तो अफसर बनकर जाना। यह बात एक युवा के दिल को ऐसी लगी वो गांव बुड़ौली में लेफ्टिनेंट बनकर ही लौटा। डहीना ब्लॉक के गांव बुड़ौली निवासी संदीप धनखड़ ने यह कर दिखाया है। भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से कमीशन लेकर डोगरा रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट बनकर वे रविवार को गांव लौटे तो परिवार के साथ पूरे गांव ने उनका स्वागत किया।
डहीना ब्लॉक के गांव बुड़ौली निवासी संदीप धनखड़ के परिवार का सेना से नाता है। उनके पिता बलबीर सिंह धनखड़ सेना में हवलदार क्लर्क पद से सेवानिवृत्त हैं, वहीं दादा सिपाही के पद से रिटायर्ड हैं।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में संदीप धनखड़ ने बताया कि उनको सेना में जाने की प्रेरणा दादा व पिता से मिली। उन्होंने कहा कि पिता का सपना था कि वह सेना में अफसर बनकर ही जाए। इसी बात को उन्होंने दिल से लगाया और कड़ी मेहनत और दादा व पिता की प्रेरणा से आज लेफ्टिनेंट बना।
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गांव में पहुंचने पर सरपंच जयकुमार, पूर्व सरपंच सतीश कुमार, विजय सिंह ठेकेदार, राजेंद्र सिंह, सज्जन सिंह, गुड्डू ठेकेदार, मनफूल नंबरदार ने फुलमालाएं पहनाकर जोरदार स्वागत किया। सरपंच जय कुमार ने संदीप धनखड़ के ले. बनने से गांव के युवाओं को एक प्रेरणा मिलेगी। गांव पहुंचने पर सभी बुजुर्गों ने संदीप को आशीर्वाद देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। संदीप धनखड़ ने बताया कि उनके पिता व दादा ने भी सेना में रहते हुए देश सेवा की थी।
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सरकारी स्कूल से 2009 में की थी 12वीं
संदीप ने 2009 में अपने मामा के गांव लाडन (झज्जर) के राजकीय सरकारी स्कूल से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद उन्होंने नेवी में ज्वॉइन की और अपनी आगे की परीक्षा की तैयारी शुरू की। नेवी में रहते हुए उन्होंने इग्नू से लोक प्रशासन में स्नातक की परीक्षा पास की। 2015 में इन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में हिस्सा लिया। उनकी मेहनत और परिवार की प्रेरणा के बल पर संदीप ने 2016 में भारतीय सेना अकादमी देहरादून में ज्वाइन किया। इसके बाद 18 महीने की कड़ी ट्रेनिंग के बाद कमीशन प्राप्त किया।
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गांव के युवा भी बन सकते हैं अफसर : संदीप
संदीप ने कहा कि समाज में लोगों की धारणा है कि गांव के युवा अफसर नहीं बन सकते। लोगों की यह सोच गलत है। युवाओं को सही मार्गदर्शन और प्रेरणा मिले तो वे हर मुकाम को हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे गांव के युवाओं को जागरूक करने और उन्हें उनके सपने साकार करने में हर संभव मदद करेंगे।
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गांव में बुड़ौली में हैं 300 से ज्यादा सैन्य कर्मी
गांव बुड़ौली सैन्य सेवा में बड़ा योगदान है। गांव में 300 से ज्यादा लोग हैं जो देश सेवा कर चुके हैं और कर रहे हैं। वहीं गांव से एक आईपीएस प्रतीक यादव, दो लेफ्टिनेंट, तीन कैप्टन, दो एमबीबीएस डॉक्टर और कर्नल रैंक तक के अधिकारी हैं। संदीप के अनुसार गांव में प्रतिभा की कमी नहीं है। कमी है तो बस प्रेरणा और मार्गदर्शन की।

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गांव में एक स्टेडियम तक नहीं, बनाने की मांग
गांव के सरपंच जयकुमार ने बताया कि प्रतिभा के धनी इस गांव में युवाओं के प्रैक्टिस के लिए स्टेडियम तक नहीं है। पंचायत ने गांव में आठ एकड़ जमीन का प्रस्ताव पास करके डीसी को सौंपा हुआ है। इसके बावजूद गांव में स्टेडियम नहीं बन पाया है। ऐसे में युवा गांव के जोहड़ और सड़क पर प्रैक्टिस करने को मजबूर हैं।
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