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नवरात्र का उल्लास, आज से होगी माता की पूजा
Updated Wed, 20 Sep 2017 11:39 PM IST
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नवरात्र का उल्लास, आज से होगी माता की पूजा
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
नवरात्र के मद्देनजर शहर में उल्लास का वातावरण है। मंदिरों में चहल -पहल शुरू हो गई। श्राद्ध पक्ष के बाद बाजारों में भी रौनक नजर आने लगी है। माता की पूजा के लिए शहर के बारा हजारी, बारा पत्थर, गुफा वाले मंदिर, धारूहेड़ा चुंगी स्थित मंदिर, संघी का बास सहित अन्य मंदिरों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मंदिरों को सजाया गया है और श्रद्धालुओं के लिए मंदिर कमेटियों ने विशेष व्यवस्था की है। मंदिरों के आसपास उत्सव का वातावरण नजर आ रहा है। बुधवार शाम को लोगों ने नवरात्र के लिए पूजा सामग्री की खरीदारी की। घट स्थापना के लिए जौ के अलावा अन्य पूजन सामग्री खरीदी गई। पंडित रोहताश शर्मा का कहना है कि मां शक्ति की पूजा धर्म की स्थापना के लिए होती है। सुबह-सुबह लोग घरों में घट स्थापना करेंगे। मां दुर्गा की आराधना की जाएगी। उन्होंने कहा कि नवरात्र के पहले दिन वीरवार को मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। शैल का मतलब पर्वत है। पर्वत की पुत्री पार्वती है। ये ही जगदंबा हैं। इसीलिए पहले दिन इनकी पूजा होती है। कम से कम एक या दो व्रत जरूर रखें। इससे मां प्रसन्न होती है। यूं तो व्रत बिना अन्न के करना चाहिए लेकिन जो लोग फलाहार नहीं कर सकते वो एक समय भोजन कर भी व्रत कर सकते हैं। बुधवार को बाजार में काफी चहल-पहल रही।
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
नवरात्र के मद्देनजर शहर में उल्लास का वातावरण है। मंदिरों में चहल -पहल शुरू हो गई। श्राद्ध पक्ष के बाद बाजारों में भी रौनक नजर आने लगी है। माता की पूजा के लिए शहर के बारा हजारी, बारा पत्थर, गुफा वाले मंदिर, धारूहेड़ा चुंगी स्थित मंदिर, संघी का बास सहित अन्य मंदिरों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मंदिरों को सजाया गया है और श्रद्धालुओं के लिए मंदिर कमेटियों ने विशेष व्यवस्था की है। मंदिरों के आसपास उत्सव का वातावरण नजर आ रहा है। बुधवार शाम को लोगों ने नवरात्र के लिए पूजा सामग्री की खरीदारी की। घट स्थापना के लिए जौ के अलावा अन्य पूजन सामग्री खरीदी गई। पंडित रोहताश शर्मा का कहना है कि मां शक्ति की पूजा धर्म की स्थापना के लिए होती है। सुबह-सुबह लोग घरों में घट स्थापना करेंगे। मां दुर्गा की आराधना की जाएगी। उन्होंने कहा कि नवरात्र के पहले दिन वीरवार को मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। शैल का मतलब पर्वत है। पर्वत की पुत्री पार्वती है। ये ही जगदंबा हैं। इसीलिए पहले दिन इनकी पूजा होती है। कम से कम एक या दो व्रत जरूर रखें। इससे मां प्रसन्न होती है। यूं तो व्रत बिना अन्न के करना चाहिए लेकिन जो लोग फलाहार नहीं कर सकते वो एक समय भोजन कर भी व्रत कर सकते हैं। बुधवार को बाजार में काफी चहल-पहल रही।