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Rewari News: ठंड में अस्पताल पहुंच रहे निमोनिया से पीड़ित 20 प्रतिशत बच्चे
Thu, 26 Dec 2024 11:30 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 26 Dec 2024 11:30 PM IST
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फोटो: 12रेवाड़ी। नागरिक अस्पताल में ओपीडी के बाहर खड़े मरीज। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। ठंड बढ़ने के साथ ही नवजात शिशु व छोटे बच्चे निमोनिया से पीड़ित हो रहे है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में वीरवार को 140 मरीज की जांच हुई जिसमें 20 प्रतिशत बच्चे निमोनिया और 80 प्रतिशत बच्चे खांसी, जुखाम व बुखार से पीड़ित पाए गए।
चिकित्सक बच्चों को ठंड से बचाने और धूप में रहने की सलाह दे रहे हैं। इस मौसम में सर्दी और जुकाम होना आम बात है। इस मौसम में बच्चों को निमोनिया का खतरा अधिक होता है। इसलिए बच्चों को निमोनिया से बचाव पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है। यही कारण है कि अब अस्पताल में सर्दी और जुकाम के साथ निमोनिया के लक्षणों वाले बच्चों की संख्या बढ़ रही है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मोनिका शर्मा ने बताया कि सर्दियों में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के लिए इम्युनिटी में कमजोरी को प्रमुख कारण माना जाता रहा है। इससे बचने के लिए भोजन में विटामिन-सी युक्त फल और सूखे मेवे शामिल करें। अदरक, शहद और तुलसी जैसे प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर्स का सेवन कराएं। हल्दी वाला दूध, वेजिटेबल सूप सर्दियों में बहुत फायदेमंद होते हैं। गुनगुना पानी पिलाएं। इससे गला साफ रहेगा और पाचन तंत्र भी ठीक रहता है। धूप निकलने पर बाहर बैठने को कहें। इससे विटामिन-डी मिलती है और इम्यूनिटी मजबूत होगी।
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इन बातों का भी रखें ध्यान:
खान-पान का ध्यान रखने के अलावा बच्चों को थोड़ा-बहुत खेलने के लिए प्रेरित करें, हालांकि इस दौरान उन्हें गर्म कपड़े पहनाएं जिससे सर्दी से बचाव किया जा सके। सर्दी से बचने और इम्यूनिटी बढ़ाने के घरेलू उपाय करें। फिर भी बच्चा बीमार रहता है तो हर साल फ्लू वैक्सीन लगवाएं, जिससे वायरल संक्रमण का खतरा कम हो। अगर बच्चा बार-बार बीमार हो जाता है तो इसके कारणों का पता लगाने के लिए किसी विशेषज्ञ की सहायता जरूर लें।
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वर्जन:
मौसम में बदलाव बच्चों के लिए घातक साबित हो सकता है। इस समय बच्चों को होने वाले सर्दी, जुकाम और बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इस समय के बुखार में निमोनिया हो सकता है। इस बीमारी के प्रतिदिन 30 से 40 बच्चे जिला अस्पताल में आ रहे हैं, जबकि ठंड से पहले 12 से 15 मरीज इलाज के लिए ओपीडी में आते थे। निमोनिया से पीड़ित बच्चों को डॉक्टर इलाज कर बचाव के तरीके बताएं जा रहे हैं।-- डॉ. मोनिका शर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल
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रेवाड़ी। ठंड बढ़ने के साथ ही नवजात शिशु व छोटे बच्चे निमोनिया से पीड़ित हो रहे है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में वीरवार को 140 मरीज की जांच हुई जिसमें 20 प्रतिशत बच्चे निमोनिया और 80 प्रतिशत बच्चे खांसी, जुखाम व बुखार से पीड़ित पाए गए।
चिकित्सक बच्चों को ठंड से बचाने और धूप में रहने की सलाह दे रहे हैं। इस मौसम में सर्दी और जुकाम होना आम बात है। इस मौसम में बच्चों को निमोनिया का खतरा अधिक होता है। इसलिए बच्चों को निमोनिया से बचाव पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है। यही कारण है कि अब अस्पताल में सर्दी और जुकाम के साथ निमोनिया के लक्षणों वाले बच्चों की संख्या बढ़ रही है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मोनिका शर्मा ने बताया कि सर्दियों में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के लिए इम्युनिटी में कमजोरी को प्रमुख कारण माना जाता रहा है। इससे बचने के लिए भोजन में विटामिन-सी युक्त फल और सूखे मेवे शामिल करें। अदरक, शहद और तुलसी जैसे प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर्स का सेवन कराएं। हल्दी वाला दूध, वेजिटेबल सूप सर्दियों में बहुत फायदेमंद होते हैं। गुनगुना पानी पिलाएं। इससे गला साफ रहेगा और पाचन तंत्र भी ठीक रहता है। धूप निकलने पर बाहर बैठने को कहें। इससे विटामिन-डी मिलती है और इम्यूनिटी मजबूत होगी।
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इन बातों का भी रखें ध्यान:
खान-पान का ध्यान रखने के अलावा बच्चों को थोड़ा-बहुत खेलने के लिए प्रेरित करें, हालांकि इस दौरान उन्हें गर्म कपड़े पहनाएं जिससे सर्दी से बचाव किया जा सके। सर्दी से बचने और इम्यूनिटी बढ़ाने के घरेलू उपाय करें। फिर भी बच्चा बीमार रहता है तो हर साल फ्लू वैक्सीन लगवाएं, जिससे वायरल संक्रमण का खतरा कम हो। अगर बच्चा बार-बार बीमार हो जाता है तो इसके कारणों का पता लगाने के लिए किसी विशेषज्ञ की सहायता जरूर लें।
वर्जन:
मौसम में बदलाव बच्चों के लिए घातक साबित हो सकता है। इस समय बच्चों को होने वाले सर्दी, जुकाम और बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इस समय के बुखार में निमोनिया हो सकता है। इस बीमारी के प्रतिदिन 30 से 40 बच्चे जिला अस्पताल में आ रहे हैं, जबकि ठंड से पहले 12 से 15 मरीज इलाज के लिए ओपीडी में आते थे। निमोनिया से पीड़ित बच्चों को डॉक्टर इलाज कर बचाव के तरीके बताएं जा रहे हैं।