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बारिश में शहर के लिए बड़ा खतरा बनी खंडहर हवेली, प्रशासन को हादसे का इंतजार
Updated Fri, 27 Jul 2018 12:41 AM IST
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खंडहर बनीं हवेलियां, खतरे में लोगों की जिंदगी
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। खंडहर बनी हवेलियां शहर के लोगों के लिए काल साबित हो सकती हैं। शनिवार शाम को भी पुरानी तहसील के समीप एक खंडहर का मलबा भरभरा कर गिर पड़ा। किसी के वहां से नहीं गुजरने के कारण कोई जनहानि नहीं हुई। शहर के लोगों में बारिश और मौसम खराब में किसी अनहोनी की संभावना सताने लगती है। हालांकि प्रशासन ने भी करीब 20 खंडहर बन चुकी हवेलियों को चिह्नित कर खतरनाक घोषित किया हुआ है। इसके बावजूद कुछ भवनों को लोगों ने अपना आसरा बनाया हुआ है। इसके बावजूद खतरा बन चुकी इन भवनों को गिराने के लिए प्रशासन तैयार नहंी है।
बारिश के मौसम में तो शहर के पुराने क्षेत्र में बहुत संभलकर चलना पड़ता है क्योंकि बाजार के अंदर भी कई ऐसे खंडहर हैं जो कि कभी भी भरभराकर गिर सकते हैं। इस दौरान वहां से गुजरने वाले लोगों की जिंदगी पर भी खतरा मंडरा रहा है। नागरिक सुरक्षा के तहत ऐसे खंडहर भवनों को ध्वस्त करने का जिम्मा नगर परिषद व लोक निर्माण विभाग का है, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही से लोगों की जिंदगी खतरे में है। गत दिवस भी शहर की पुरानी तहसील के निकट एक ऐसे ही खंडहर भवन की दीवार गिर गई थी, गनीमत यह रही कि दीवार के नीचे दबने से कोई जनहानि नहीं हुई। दो वाहन जरूर क्षतिग्रस्त हुए थे।
यहां हैं पुराने खंडहर युक्त भवन
शहर के मोहल्ला मुक्तिवाड़ा, शुक्रपुरा, तेजपुरा, बास सिताबराय, चौधरीवाड़ा के अलावा अन्य जगह पर 100 साल से अधिक पुराने भवन हैं, जो पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं, जो लंबे समय से बंद हैं। इनके मालिकों ने अपने आप को बचाने के लिए तो अन्य स्थानों पर बसेरा कर लिया है, लेकिन जर्जर भवनों को ध्वस्त न कराकर अन्य लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। लोगों ने ऐसे भवनों के मालिकों से उन्हें ध्वस्त कराने का आग्रह भी किया है। भवन मालिकों ने थोड़े मुनाफे के लिए जर्जर भवनों में किराएदार बसा दिए हैं। कुछ लोगों ने इसकी शिकायत नगर परिषद में की, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। अब किराएदार इन भवनों को खाली करने को तैयार नहीं हैं। इस कारण नप प्रशासन भी दबाव में रहता है।
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लोक निर्माण विभाग देता है नप को निर्देश
ऐसे भवनों को गिराने के लिए नगर परिषद में शिकायत की जाती है। नगर परिषद के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी मौके का मुआयना करके लोक निर्माण विभाग को स्थिति से अवगत कराते हैं। इसके बाद लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भवन का निरीक्षण कर उसे ध्वस्त करने अथवा नहीं करने के निर्देश देते हैं, लेकिन इसी काम में दोनों ही विभाग के अधिकारी महीनों लगा देते हैं। वर्तमान में ऐसे कई भवन हैं, जिनकी शिकायत पर ऐसी ही नाममात्र कार्रवाई चल रही है।
अभी तक नहीं मिली है खंडहर भवनों की शिकायत
शहर में पुराने खंडहर हवेलियां जरूर हैं, लेकिन उन्हें गिराने की अभी तक किसी ने कोई शिकायत नहीं की है। शिकायत आने पर इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी तुरंत मौके पर जाकर उसकी रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग को देते हैं। उनकी रिपोर्ट आने के बाद ही भवन गिराए जाते हैं। - मनोज यादव कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। खंडहर बनी हवेलियां शहर के लोगों के लिए काल साबित हो सकती हैं। शनिवार शाम को भी पुरानी तहसील के समीप एक खंडहर का मलबा भरभरा कर गिर पड़ा। किसी के वहां से नहीं गुजरने के कारण कोई जनहानि नहीं हुई। शहर के लोगों में बारिश और मौसम खराब में किसी अनहोनी की संभावना सताने लगती है। हालांकि प्रशासन ने भी करीब 20 खंडहर बन चुकी हवेलियों को चिह्नित कर खतरनाक घोषित किया हुआ है। इसके बावजूद कुछ भवनों को लोगों ने अपना आसरा बनाया हुआ है। इसके बावजूद खतरा बन चुकी इन भवनों को गिराने के लिए प्रशासन तैयार नहंी है।
बारिश के मौसम में तो शहर के पुराने क्षेत्र में बहुत संभलकर चलना पड़ता है क्योंकि बाजार के अंदर भी कई ऐसे खंडहर हैं जो कि कभी भी भरभराकर गिर सकते हैं। इस दौरान वहां से गुजरने वाले लोगों की जिंदगी पर भी खतरा मंडरा रहा है। नागरिक सुरक्षा के तहत ऐसे खंडहर भवनों को ध्वस्त करने का जिम्मा नगर परिषद व लोक निर्माण विभाग का है, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही से लोगों की जिंदगी खतरे में है। गत दिवस भी शहर की पुरानी तहसील के निकट एक ऐसे ही खंडहर भवन की दीवार गिर गई थी, गनीमत यह रही कि दीवार के नीचे दबने से कोई जनहानि नहीं हुई। दो वाहन जरूर क्षतिग्रस्त हुए थे।
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यहां हैं पुराने खंडहर युक्त भवन
शहर के मोहल्ला मुक्तिवाड़ा, शुक्रपुरा, तेजपुरा, बास सिताबराय, चौधरीवाड़ा के अलावा अन्य जगह पर 100 साल से अधिक पुराने भवन हैं, जो पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं, जो लंबे समय से बंद हैं। इनके मालिकों ने अपने आप को बचाने के लिए तो अन्य स्थानों पर बसेरा कर लिया है, लेकिन जर्जर भवनों को ध्वस्त न कराकर अन्य लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। लोगों ने ऐसे भवनों के मालिकों से उन्हें ध्वस्त कराने का आग्रह भी किया है। भवन मालिकों ने थोड़े मुनाफे के लिए जर्जर भवनों में किराएदार बसा दिए हैं। कुछ लोगों ने इसकी शिकायत नगर परिषद में की, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। अब किराएदार इन भवनों को खाली करने को तैयार नहीं हैं। इस कारण नप प्रशासन भी दबाव में रहता है।
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लोक निर्माण विभाग देता है नप को निर्देश
ऐसे भवनों को गिराने के लिए नगर परिषद में शिकायत की जाती है। नगर परिषद के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी मौके का मुआयना करके लोक निर्माण विभाग को स्थिति से अवगत कराते हैं। इसके बाद लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भवन का निरीक्षण कर उसे ध्वस्त करने अथवा नहीं करने के निर्देश देते हैं, लेकिन इसी काम में दोनों ही विभाग के अधिकारी महीनों लगा देते हैं। वर्तमान में ऐसे कई भवन हैं, जिनकी शिकायत पर ऐसी ही नाममात्र कार्रवाई चल रही है।
अभी तक नहीं मिली है खंडहर भवनों की शिकायत
शहर में पुराने खंडहर हवेलियां जरूर हैं, लेकिन उन्हें गिराने की अभी तक किसी ने कोई शिकायत नहीं की है। शिकायत आने पर इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी तुरंत मौके पर जाकर उसकी रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग को देते हैं। उनकी रिपोर्ट आने के बाद ही भवन गिराए जाते हैं। - मनोज यादव कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद