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कार्यक्रम आयोजित
Updated Fri, 23 Mar 2018 12:24 AM IST
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भगत सिंह ने फांसी का फंदा चूम देश को आंदोलित किया
अमर उजाला ब्यूूरो
रेवाड़ी।
वीर भगत सिंह युवा दल की तरफ से देशभक्ति का कार्यक्रम ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान पटौदी रोड पर आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति डॉ. उमाशंकर यादव ने कहा कि वीर भगत सिंह की लोकप्रियता और क्रांतिकारी कारनामों से अंग्रेज सरकार इतना घबरा गई थी, कि समय से पहले उन्हें फांसी पर चढ़ाने का निर्णय लिया। उनके फांसी के फंदे को चूम लेने के जोशीले अंदाज ने पूरे हिंदुस्तान में मानो एक नई ज्वाला भर दी। कार्यक्रम के आयोजक युवा दल के प्रधान दिनेश कपूर ने कहा कि उनके अंतिम शब्द ‘मर कर भी न मिटेगी मेरे दिल से वतन की खुशबू-मेरी मिट्टी से भी खुशबू ए वतन आएगी’ मानो आजादी की लड़ाई में देश के युवाओं के लिये प्रार्थना के बोल बन गये। प्रमुख समाजसेवी प्रो. अनिरूद्ध यादव ने कहा कि भारत माता के लिये कुर्बान होना मानो उनके जीवन का मकसद था। उनके शब्द ‘दम निकले इस देश की खातिर बस इतना अरमान है। एक बार इस राह में मरना सो जन्मों के समान है’ उनकी देश भक्ति की पराकाष्ठा का प्रमाण हैं। संस्थान के प्राचार्य सुनील कुमार यादव ने कहा कि शहीदे आजम भगत सिंह व उनके साथियों के बलिदान की गाथा, युवाओं में देशभक्ति व राष्ट्रीयता की भावना का संचार करती है। उन्हें देशभक्ति का साहित्य व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सभी को संगठन की ओर से देशभक्तों के चित्र भेंट किये गए। इस अवसर पर समाजसेवी रवि अनरेजा, त्रिलोक चंद, अशोक यादव, विनोद कुमार, अनिल कुमार,ओमवती, सुषमा, टीना, देवराज, संजय, हेमंत, कर्म सिंह, सतबीर सिंह, धनश्याम, नरेश, नरेंद्र सिंह, विजय कुमार, नवीन व वरूण जैमिनी ने योगदान दिया।
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अमर उजाला ब्यूूरो
रेवाड़ी।
वीर भगत सिंह युवा दल की तरफ से देशभक्ति का कार्यक्रम ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान पटौदी रोड पर आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति डॉ. उमाशंकर यादव ने कहा कि वीर भगत सिंह की लोकप्रियता और क्रांतिकारी कारनामों से अंग्रेज सरकार इतना घबरा गई थी, कि समय से पहले उन्हें फांसी पर चढ़ाने का निर्णय लिया। उनके फांसी के फंदे को चूम लेने के जोशीले अंदाज ने पूरे हिंदुस्तान में मानो एक नई ज्वाला भर दी। कार्यक्रम के आयोजक युवा दल के प्रधान दिनेश कपूर ने कहा कि उनके अंतिम शब्द ‘मर कर भी न मिटेगी मेरे दिल से वतन की खुशबू-मेरी मिट्टी से भी खुशबू ए वतन आएगी’ मानो आजादी की लड़ाई में देश के युवाओं के लिये प्रार्थना के बोल बन गये। प्रमुख समाजसेवी प्रो. अनिरूद्ध यादव ने कहा कि भारत माता के लिये कुर्बान होना मानो उनके जीवन का मकसद था। उनके शब्द ‘दम निकले इस देश की खातिर बस इतना अरमान है। एक बार इस राह में मरना सो जन्मों के समान है’ उनकी देश भक्ति की पराकाष्ठा का प्रमाण हैं। संस्थान के प्राचार्य सुनील कुमार यादव ने कहा कि शहीदे आजम भगत सिंह व उनके साथियों के बलिदान की गाथा, युवाओं में देशभक्ति व राष्ट्रीयता की भावना का संचार करती है। उन्हें देशभक्ति का साहित्य व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सभी को संगठन की ओर से देशभक्तों के चित्र भेंट किये गए। इस अवसर पर समाजसेवी रवि अनरेजा, त्रिलोक चंद, अशोक यादव, विनोद कुमार, अनिल कुमार,ओमवती, सुषमा, टीना, देवराज, संजय, हेमंत, कर्म सिंह, सतबीर सिंह, धनश्याम, नरेश, नरेंद्र सिंह, विजय कुमार, नवीन व वरूण जैमिनी ने योगदान दिया।