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मेक इन इंडिया से बनेंगे उतम कृत्रिम अंग

Fri, 22 Sep 2017 11:15 PM IST
Updated Fri, 22 Sep 2017 11:15 PM IST
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मेक इन इंडिया से बनेंगे उतम कृत्रिम अंग
मेक इन इंडिया से बनेंगे उत्तम कृत्रिम अंग
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
हिंदू हाई स्कूल में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की तरफ से आयोजित नि:शुल्क सहायक उपकरण वितरण समारोह में 388 दिव्यांगों को 37 लाख 50 हजार रुपये के सहायक उपकरण प्रदान वितरित किए गए। आयोजित समारोह में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर मुख्य अतिथि थे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पहले हम पुरानी तरह के के दिव्यांगों के उपकरण देते थे। अब सरकार ने मेक इन इंडिया के तहत जर्मनी और इंग्लैंड की दिव्यांगों के उपकरण बनाने वाली कंपनियों से समझौता किया है। इसके लिए कानपुर स्थित भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम ऐलिम्को को 286 करोड़ रुपये खर्च करके आधुनिक बनाया गया है, ताकि दिव्यांगों के लिए जो भी सहायक उपकरण व कृत्रिम अंग बने वे उत्तम गुणवत्ता के देश में ही बन सकें।
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उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल में केंद्र सरकार ने दिव्यांगों के कल्याण के लिए कई कदम उठाए हैं। बौद्धिक और विकास की दृष्टि से निशक्तों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करना जरूरी है। अब तक देश में पांच हजार से अधिक इस तरह के शिविर लगाकर आठ लाख दिव्यांगों को सहायक उपकरण और कृत्रिम अंग प्रदान किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांग आज हर क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाने के लिए दिव्यांगों की श्रेणी 7 से बढ़ाकर 21 कर दी गई है। पहली बार दिव्यांगों के लिए मैट्रिक पूर्व और मैट्रिक के बाद और विदेशी छात्रवृत्ति शुरू की गई है। केंद्र में सरकार आने से पूर्व तक सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों का 15 हजार पदों का बैकलॉग था। इनमें से 13 हजार 500 लोगों को रोजगार दिया जा चुका है। शेष पद भी शीघ्र भर लिए जाएंगे। 80 प्रतिशत निशक्तों को बैट्री की मोटरसाइकिल दी जाएगी, ताकि वे स्कूल, दूध, अखबार वितरण जैसे काम कर सकें। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष तक के मूक बधिर बच्चों के लिए विभाग छह लाख रुपये खर्च कर कोकलीयर इंप्लांट कराता है, ताकि वे सुन सकें। अभी तक 800 बच्चों का कोकलीयर इम्प्लांट कराया जा चुका है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिव्यांगों के लिए देश के 50 शहरों में सुगम्य भारत अभियान के तहत पहले चरण में 100 भवन बनाए जा रहे हैं। दिव्यांगों को आनेजाने में कोई परेशानी ना हो। साथ ही ट्रेनों और बसों को भी इनकी सहूलियत के हिसाब से बनाया जा रहा है।
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इन्होंने भी किया संबोधित
विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास ने कहा कि इस तरह के और अधिक शिविरों की जरूरत है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता वीर कुमार यादव ने कहा कि इस तरह के शिविर लगाकर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्रालय एवं रेडक्रॉस ने सराहनीय कार्य किया है। दिव्यांगों के लिए करियर काउंसलिंग का महत्व देना चाहिए। इससे पूर्व दिव्यांग मान सिह ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। कार्यकारी उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार और एसडीएम कुशल कटारिया ने भी विचार रखे। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष पंडित योगेंद्र पालीवाल, महावीर यादव व्यवसायिक प्रकोष्ट के संयोजक सतीश खोला, जिला भाजपा महिला की अध्यक्ष चांदनी चांदना, कवयित्री उषा आर्य, तहसीलदार मलिक, जिला रेडक्रास सचिव वाजिद अली, ऐलिमको के प्रबंधक रमेश कुमार आदि थे।
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4800 दिव्यांग, उपकरण 388
दिव्यांगों को उपकरण वितरण में खासी दिक्कत आई। उपकरण वितरण में महती भूमिका निभाने वाले भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता वीर कुमार यादव ने बताया कि डेढ़ साल पहले हमें प्रशासन की तरफ से दिव्यांगों के चयन के लिए सहयोग नहीं किया गया। यही कारण था जिले में 4800 दिव्यांग होने के बावजूद 388 लोगों का चयन किया जा सका। वहीं बीच-बीच में भी बहुत बाधाएं आई। इसके लिए सीएम से लेकर केंद्रीय मंत्री तक बातचीत की। तब जाकर अब डेढ़ साल बाद उपकरण वितरण हो सका है। उधर, केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने भी उपकरण वितरण में देरी पर प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।
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उपकरण पाकर दिखी आंखों में चमक
रेस्टोरेंट में काम करता हूं। पढ़ा-लिखा हूं। बिना साइकिल आने-जाने में बहुत परेशानी आ रही थी। पिछले साल अप्रैल में आवेदन किया था। अब जाकर ट्राइसाइकिल मिली है। आज भी रह जाते तो पता नहीं कब मिलती। - सुरेंद्र कुमार, आशियाकी
डेढ़ साल पहले फॉर्म भरा था। अब सामान मिला है। ठेली लगाकर काम चलाता हूं। 2012 में एक्सीडेंट में पैर खराब हो गए थे। आज हमें उपकरण मिले हैं। - भूपेंद्र, डहीना

सिलाई का काम करता हूं। अब जाकर उपकरण मिल रहा है। बुढ़ापे में बहुत परेशानी हो रही थी। यहां पर बेटे के साथ आया हूं। - चांदकरण, कोसली
दोनों पैरों से नहीं चल सकता। मानसिक रूप से भी कमजोर हूं। डेढ़ साल से उपकरण के लिए चक्कर काट रहा हूं। अब मिला है। - भूपेंद्र, ऊष्मापुर
तीन साल की उम्र में पोलिया हुआ था। तभी से चलना बंद हो गया। यहां अपनी पत्नी और बच्ची के साथ आया हूं। प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता हूं। जेबीटी कर रखी है। - नत्थूराम, बेरली खुर्द
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