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135 बसों के नहीं घूमे पहिए, 10 हजार से ज्यादा यात्री रहे परेशान
Updated Wed, 14 Jun 2017 12:39 AM IST
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135 बसों के नहीं घूमे पहिए, 10 हजार से ज्यादा यात्री रहे परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
प्रदेश में निजी बसों को परमिट देने के विरोध में पिछले कई दिनों से चल रहा रोडवेज कर्मियों का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को पूरी तरह से चक्का जाम में बदल गया। निजी परमिट देने के विरोध में रोडवेज कर्मियों का यह अप्रैल से लेकर अब तक दूसरी बार चक्काजाम है।
रेवाड़ी रोडवेज डिपो से चलने वाले करीब 135 बसें डिपो में खड़ी रहीं, जिससे जिले में औसतन सफर करने वाले करीब 10 हजार यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं रोडवेज को भी मंगलवार को 12 लाख रुपये के करीब का राजस्व होने का अनुमान है। सुबह साढ़े चार बजे से शुरू हुआ चक्का जाम पूरे दिन रहा। ऐसे में ट्रेनों में भी जबरदस्त भीड़ रही, वहीं निजी बस संचालकों ने भी जमकर चांदी कूटी।
सभी यूनियन रहीं मौजूद, की नारेबाजी
हड़ताल में रोडवेज के सभी आठ यूनियनें साथ रहीं। समझाने के लिए रोडवेज पदाधिकारियों के साथ ही प्रशासन के अन्य अफसर भी पहुंचे, लेकिन हड़ताल नहीं खुली। परिवहन कर्मचारी संघ के प्रवक्ता देवेंद्र तिवाड़ी ने बताया कि अप्रैल में हुई हड़ताल के दौरान सरकार ने निजीकरण को रद्द करने का वादा किया था, लेकिन सरकार ने इसके बाद भी वादाखिलाफी की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही पॉलिसी रद्द नहीं की तो रोडवेज कर्मी हक के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।
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चंडीगढ़ समेत लंबे रूट पर भी रही परेशानी
रोडवेज बस डिपो की हड़ताल के चलते सबसे ज्यादा दिल्ली और गुड़गांव की ओर जाने वाली सवारियों को परेशानी हुई। इसके अलावा चंडीगढ़, आगरा, फरीदाबाद समेत अन्य लंबे रूट पर सफर करने के लिए जाने वाले लोगों को भी चक्का जाम के चलते यात्रा रद्द करनी पड़ी या फिर उन्हें ट्रेनों का रुख करना पड़ा। ऐसे में कई ट्रेनों में भीड़ रोजाना से काफी ज्यादा दिखाई दी। इसके अलावा निजी बसें भी क्षमता से दो से तीन गुना ज्यादा सवारियां लेकर चलीं। इस बीच रोजाना से ज्यादा किराए लिए जाने से लोगों को जेब भी कटीं।
इंटरव्यू के लिए रेवाड़ी आया था। इसके बाद दूसरे इंटरव्यू के लिए मंगलवार को ही चंडीगढ़ जाना था। लेकिन बसों की हड़ताल के चलते नहीं जा पाया। पब्लिक सेवाओं में इस तरह बाधा नहीं आनी चाहिए।
-मानवेंद्र सिंह, निवासी यमुनानगर
कुछ दिन पहले जरूरी काम से पलवल जाना हुआ था। मंगलवार को वापस रेवाड़ी आना था। लेकिन रोडवेज बसों की हड़ताल के चलते वापस नहीं आ पाया। अब हड़ताल खत्म होने का इंतजार कर रहा हूं।
-कमलकांत, निवासी, रेवाड़ी
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
प्रदेश में निजी बसों को परमिट देने के विरोध में पिछले कई दिनों से चल रहा रोडवेज कर्मियों का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को पूरी तरह से चक्का जाम में बदल गया। निजी परमिट देने के विरोध में रोडवेज कर्मियों का यह अप्रैल से लेकर अब तक दूसरी बार चक्काजाम है।
रेवाड़ी रोडवेज डिपो से चलने वाले करीब 135 बसें डिपो में खड़ी रहीं, जिससे जिले में औसतन सफर करने वाले करीब 10 हजार यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं रोडवेज को भी मंगलवार को 12 लाख रुपये के करीब का राजस्व होने का अनुमान है। सुबह साढ़े चार बजे से शुरू हुआ चक्का जाम पूरे दिन रहा। ऐसे में ट्रेनों में भी जबरदस्त भीड़ रही, वहीं निजी बस संचालकों ने भी जमकर चांदी कूटी।
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सभी यूनियन रहीं मौजूद, की नारेबाजी
हड़ताल में रोडवेज के सभी आठ यूनियनें साथ रहीं। समझाने के लिए रोडवेज पदाधिकारियों के साथ ही प्रशासन के अन्य अफसर भी पहुंचे, लेकिन हड़ताल नहीं खुली। परिवहन कर्मचारी संघ के प्रवक्ता देवेंद्र तिवाड़ी ने बताया कि अप्रैल में हुई हड़ताल के दौरान सरकार ने निजीकरण को रद्द करने का वादा किया था, लेकिन सरकार ने इसके बाद भी वादाखिलाफी की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही पॉलिसी रद्द नहीं की तो रोडवेज कर्मी हक के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।
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चंडीगढ़ समेत लंबे रूट पर भी रही परेशानी
रोडवेज बस डिपो की हड़ताल के चलते सबसे ज्यादा दिल्ली और गुड़गांव की ओर जाने वाली सवारियों को परेशानी हुई। इसके अलावा चंडीगढ़, आगरा, फरीदाबाद समेत अन्य लंबे रूट पर सफर करने के लिए जाने वाले लोगों को भी चक्का जाम के चलते यात्रा रद्द करनी पड़ी या फिर उन्हें ट्रेनों का रुख करना पड़ा। ऐसे में कई ट्रेनों में भीड़ रोजाना से काफी ज्यादा दिखाई दी। इसके अलावा निजी बसें भी क्षमता से दो से तीन गुना ज्यादा सवारियां लेकर चलीं। इस बीच रोजाना से ज्यादा किराए लिए जाने से लोगों को जेब भी कटीं।
इंटरव्यू के लिए रेवाड़ी आया था। इसके बाद दूसरे इंटरव्यू के लिए मंगलवार को ही चंडीगढ़ जाना था। लेकिन बसों की हड़ताल के चलते नहीं जा पाया। पब्लिक सेवाओं में इस तरह बाधा नहीं आनी चाहिए।
-मानवेंद्र सिंह, निवासी यमुनानगर
कुछ दिन पहले जरूरी काम से पलवल जाना हुआ था। मंगलवार को वापस रेवाड़ी आना था। लेकिन रोडवेज बसों की हड़ताल के चलते वापस नहीं आ पाया। अब हड़ताल खत्म होने का इंतजार कर रहा हूं।
-कमलकांत, निवासी, रेवाड़ी