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- एमएड में दाखिला लेकर दी एमए एजुकेशन की परीक्षा

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Sat, 03 Jun 2017 11:35 PM IST
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एक लेटर ने बिगाड़ दिया सारा खेल!
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी मीरपुर की एमएड को एनसीटीई (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजूकेशन) की तरफ से मान्यता का मसला असल में एक लेटर की वजह से अटक गया है। एनसीटीई में सही समय पर यूनिवर्सिटी की तरफ से जवाब दाखिल नहीं करने पर एनसीटीई ने इसे एमएड की मान्यता नहीं दी। हालांकि यूनिवर्सिटी ने अपने स्तर पर काफी प्रयत्न भी किए लेकिन एनसीटीई की तरफ से यूनिवर्सिटी की अपील खारिज करने के बाद सारी मेहनत बेकार हो गई।
आईजीयू की तरफ से वर्ष 2016 जनवरी में एमएड कोर्स शुरू कराने के लिए एनसीटीई में आवेदन किया गया। इसके बाद एनसीटीई की तरफ से आई टीम में एलओआई (लेटर ऑफ इंटेंट) इश्यू कर दिया। जुलाई में यूनिवर्सिटी की तरफ से दो वर्षीय एमएड कोर्स शुरू हुआ। इसके लिए 30 बच्चों के दाखिले भी लिए गए। इसी बीच एनसीटीई की तरफ से यूनिवर्सिटी में कंप्लाइंस मांगा गया। इसमें कोर्स संबंधी कुछ एफिडेविट भेजे जाते हैं। एफिडेविट नहीं भेजने के कारण नौ नवंबर को यूनिवर्सिटी के पास एनसीटीई की तरफ से कोर्स का रिजेक्शन लेटर आया। हालांकि कार्य में लापरवाही पर यूनिवर्सिटी की तरफ से एक कर्मचारी को हटाकर एक अन्य को शोकॉज नोटिस जारी कर दिया। इनमें बच्चों की एमएड की डिग्री का सपना अटक गया।

एमए एजूकेशन कराने का निर्णय
रिजेक्शन लेटर मिलने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। इसके बाद एसी (अकादमिक काउंसिल) की मीटिंग बुलाई गई। इसमें एमएड की जगह एमए एजूकेशन कराने का निर्णय किया गया। इसके बाद यह मामला ईसी (एजूकेशन काउंसिल) के पास भी गया। वहां इसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। यूनिवर्सिटी का तर्क था कि एनसीटीई रेगुलेशन 2014 के तहत एमए एजूकेशन को एमएड के बराबर ही दर्जा दिया गया है। ऐेसे में इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। दोनों कोर्सों की सरकारी फीस भी समान है। वहीं इसके बाद यूनिवर्सिटी ने इसकी अपील एनसीटी में डाल दी।

एमए एजूकेशन/एमएड का पेपर
यूनिवर्सिटी की तरफ से वर्तमान में चल रहे द्वितीय सेमेस्टर के पेपर भी एमए एजूकेशन/एमएड के नाम से लिए जा रहे हैं। इन्हें प्रवेश पत्र एमएड के नाम से ही दिए गए। वहीं दिसंबर प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम भी एमएड के प्रवेश पत्र देकर इसी तरह से लिए गए थे। साथ एमएड के लिए प्रैक्टीकल लेकर इंटर्नशिप भी कराई गई। अपील खारिज होने के बाद यूनिवर्सिटी की मुश्किल बढ़ गई है।

अभी निकल सकता है रास्ता
एनसीटीई ने हालांकि यूनिवर्सिटी की अपील खारिज कर दी है। अभी बच्चों के भविष्य को बचाने का रास्ता है। शिक्षाविद अनिरुद्ध यादव का कहना है कि इन बच्चों का माइग्रेशन अन्य एमएड कराने वाले कॉलेजों में कराया जा सकता है लेकिन रजिस्ट्रेशन तो एडमिशन के समय चला जाता है। इसमें पेच है। यूनिवर्सिटी को इसे सुलझाकर बच्चों का भविष्य खराब होने से बचाना चाहिए। हालांकि अन्य जगह माइग्रेशन की प्रक्रिया बड़ी जटिल है। अगर यूनिवर्सिटी प्रयास करे तो ऐसा हो सकता है। इसके अतिरिक्त भी कुलाधिपति भी इसकी इजाजत दे सकते हैं।

हमने विद्यार्थियों के हितों को देखकर हर संभव प्रयास किया है। हालांकि हमारी अपील को एनसीटीई ने खारिज कर दिया है। फिर भी हमने प्रयास नहीं छोड़े हैं। एमए एजूकेशन और एमएड लगभग बराबर है, फिर भी अन्य एमएड कॉलेजों में बच्चों के माइग्रेशन कराने का प्रयास किया जाएगा। वहीं जो तकनीकी गलती हुई थी उसके लिए संबंधित कर्मचारी को सजा दे दी थी। वहीं दूसरे शोकॉज नोटिस जारी कर दिया। - प्रो. एसपी बंसल, कुलपति, आईजीयू

हम पेपर एमए एजूकेशन/ एमएड का ले रहे हैं। दोनों कोर्स समान है। इनकी मान्यता भी बराबर हैं। वहीं अपील का निर्णय भी हमारे पक्ष में आने की उम्मीद थी। इसीलिए ऐसा किया गया। - डीपी गोयल, परीक्षा नियंत्रक

ईसी के निर्णय के बाद भी हमने एमए एजूकेशन को ध्यान में रखकर बच्चों की तैयारी कराई। उम्मीद है कि एनसीटीई में हमारी अपील मंजूर हो जाए। यूनिवर्सिटी की तरफ से बच्चों की भलाई के लिए ही सारे कार्य किए गए। - प्रो. आरएस सांगवान, एचओडी

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