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नागरिक अस्पताल में लगी आग तो हजारों लोगों का ‘राम ही रखवाला’

Sat, 09 Sep 2017 12:59 AM IST
Updated Sat, 09 Sep 2017 12:59 AM IST
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नागरिक अस्पताल में लगी आग तो हजारों लोगों का ‘राम ही रखवाला’

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अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
जिले का नागरिक अस्पताल, जहां रोजाना हजारों लोग अपना ‘मर्ज’ लेकर आते हैं। लेकिन इसे दो विभागों के बीच तालमेल की कमी कहें या लोगों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही कि अभी तक अस्पताल में फायर सिस्टम तक नहीं है। ऐसे में कहा जा सकता है कि अगर कभी दुर्घटनावश अस्पताल में आग लग जाए तोे करीब दो हजार से ज्यादा लोगों का ‘राम ही रखवाला’ है। स्वास्थ्य विभाग की माने तो फायर सिस्टम इंस्टाल कराने के लिए दमकल विभाग को कई बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है, वहीं दमकल विभाग अस्पताल प्रबंधन को जरूरी चीजों की व्यवस्था करने की बात कहते हुए अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन का तो यहां तक दावा है कि दमकल विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को किसी प्राइवेट सलाहकार से काम कराने की हिदायत तक दे डाली।

यह है नियम
फायर सर्विस एक्ट, नेशनल बिल्डिंग कोड-2005 एवं आपदा प्रबंधन एक्ट-2005 के तहत 15 मीटर से लंबी एवं अन्य व्यवसायिक भवनों में फायर सेफ्टी सिस्टम लगाना जरूरी है। इसके अलग-अलग से रूल एवं कंडीशन भी निर्धारित किए हैं। लेकिन नागरिक अस्पताल के बनने के 37 साल बाद भी यहां फायर सिस्टम तक मौजूद नहीं है। यदि कभी भी आग लग जाए तो हजारों जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। विभागीय उदासीनता का परिणाम यह है कि बिना किसी व्यवस्था के लोगों को आपात स्थिति से जूझने के लिए छोड़ा हुआ है, आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
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खतरे में 2000 लोगों की जान
100 बिस्तर वाले नागरिक अस्पताल में अमूमन हर समय करीब दो हजार लोग उपस्थित रहते हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों के अतिरिक्त उनके सहायक, करीब दो हजार की प्रतिदिन ओपीडी एवं सैकड़ों की संख्या में स्टाफ हर समय खतरे में रहता है। आपात स्थिति में यदि आग लग जाए तो अस्पताल के पास इससे निपटने के पर्याप्त संसाधन नहीं है। अस्पताल में न तो अलग से फायर के लिए वाटर टैंक है। और न ही पंप एवं अन्य व्यवस्थाएं है। हालांकि कुछ दिन पहले ही अस्पताल में फायर फाइटिंग यंत्र लगवाए गए हैं। लेकिन ये पर्याप्त नहीं है।
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आधा दर्जन रिमाइंडर के बार भी नहीं जागा दमकल विभाग
नागरिक अस्पताल को चंडीगढ़ से फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने के निर्देश 2015 में ही दे दिए गए थे। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को संवेदनशील मानते हुए तुरंत व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए कहा था। रेवाड़ी स्वास्थ्य विभाग प्रबंधन की ओर से भी 10 मई 2016, 22 जून, 23 अगस्त एवं 24 नवंबर 2016 सहित कई बार अस्पताल में इंस्पेक्शन कर फायर सेफ्टी लगवाने के प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए लिखा गया। इसके साथ दर्जनों बार रिमाइंडर भी भेजे गए, लेकिन दमकल विभाग है कि जागता ही नहीं। अस्पताल प्रबंधन की मानें तो व्यवस्था को दुरुस्त करवाने की बजाय दमकल विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को किसी प्राइवेट सलाहकार से काम कराने की हिदायत दे डाली।

बेसमेंट में नहीं चल सकती व्यवसायिक गतिविधियां
फायर सेफ्टी एवं नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार 1 से लेकर 1000 हजार स्कवायर मीटर में बनी कमर्शियल बिल्डिंग के लिए भी अलग से नियम निर्धारित हैं। अस्पताल के मामले में यह और संवेदनशील हो जाता है। नियमानुसार अस्पताल की बिल्डिंग के बेसमेंट में पार्किंग एवं स्टोरेज की व्यवस्था को छोड़कर अन्य गतिविधियां नहीं की जा सकती हैं। इसी के साथ बेसमेंट में फायर के लिए अलग से दस हजार लीटर का वाटर टैंक और पाइपलाइन के साथ अन्य व्यवस्थाएं करना जरूरी है।

निजी अस्पतालों के बेसमेंट में भी हो रहा लोगों की जान से खिलवाड़
नियमानुसार अस्पताल के बेसमेेंट में ओपीडी और अन्य व्यवसायिक गतिविधियां नहीं हो सकती है। लेकिन शहर के कुछ अस्पतालों में ओपीडी के साथ मरीजों को भी बेसमेंट में मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। दमकल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शहर के कुछ अस्पतालों के पास ही फायर एनओसी है।

किसी भी बिल्डिंग का नक्शा पास कराने से पहले दमकल विभाग की अनुमति आवश्यक है। लोग शुरू में तो हमारे पास आ जाते हैं। लेकिन जब बिल्डिंग बनकर तैयार हो जाती है। तब एनओसी के लिए नहीं आते हैं। नागरिक अस्पताल की बात करें तो हमने उन्हें जरूरी चीजों की व्यवस्था करने के लिए कहा था। -एसके सांगवान, फायर सेफ्टी ऑफिसर, रेवाड़ी।


हमारी ओर से आधा दर्जन से अधिक बार निरीक्षण कर फायर सेफ्टी सिस्टम का प्रपोजल तैयार करने के लिए पत्र लिखा जा चुका है। लेकिन दमकल विभाग की ओर से कोई रिसपांस नहीं मिलता है। कई बार रिमाइंडर तक डाले जा चुके हैं। बावजूद इसके कोई सुनवाई नहीं हुई है। अस्पताल बनने के बाद से आज तक सिस्टम इंस्टाल नहीं हो पाया है।
-डॉ. सुदर्शन पंवार, कार्यकारी सिविल सर्जन, रेवाड़ी।
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