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छह राज्यों के पूर्व अर्ध सैनिक
Updated Mon, 09 Oct 2017 11:55 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। रेवाड़ी के जवाहरलाल नेहरू पार्क मेें आयोजित पूर्व अर्धसैनिक महापंचायत में यूपी, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और दिल्ली के पूर्व अर्धसैनिकों ने सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली। उनका कहना था कि सरकार अब सैनिकों के साथ अर्धसैनिकों की भी सुध ले। सरकार द्वारा सेना की सीएसडी कैंटीन में जीएसटी पर 50 फीसदी की छूट और अर्ध सैनिक बलों की सीपीसी कैंटीन पर छूट नहीं देना धोखा है। महापंचायत में निर्णय लिया गया कि सरकार के इस निर्णय के विरोध में देश 20 लाख अर्ध सैनिक इस बार दिवाली नहीं मनाएंगे। कॉनफेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणवीर सिंह कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित थे। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड एक्स पैरा मिलिट्री के चेयरमैन तारादत्त शर्मा ने की। इसके बाद सचिवालय में जाकर ज्ञापन भी दिया।
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चुनाव में नोटा का उपयोग करेंगे पूर्व अर्धसैनिक बल
पूर्व अर्धसैनिकों की महापंचायत में सिलसिलेवार मांगें रखी गईं। इसमें सिपाही को सातवें वेतन आयोग का लाभ नहीं मिलना, सीमा पर तैनाती के बावजूद शहीद का दर्जा नहीं मिलना एवं वन रैंक- वन पेंशन का लाभ नहीं मिलना मुख्य था। पंचायत में निर्णय लिया गया कि यदि सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी तो आने वाले चुनाव में पूर्व अर्ध सैनिक और उनके परिवार नोटा का बटन दबाएंगे। इसी के साथ पांच दिसंबर को देश भर के अर्ध सैनिक बल एवं उनके परिवार जंतर-मंतर पर धरना देंगे।
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देश में पूर्व अर्ध सैनिकों के लिए है अंधा कानून: पूर्व सुबेदार
दिल्ली से आए पूर्व सुबेदार शिवदत्त ने कहा कि अर्ध सैनिक बल देश की सीमाओं पर दुश्मनों को जवाब देने के साथ-साथ देश कें अंदर शांति बनाए रखने के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर देता है। लेकिन विडंबना है कि आज तक हमें शहीद का दर्जा तक नहीं दिया जाता है। नेता हमारा वोट लेकर पीएम तक बन जाते हैं, लेकिन अंधे कानून के चलते हमारी कोई सुनवाई नहीं होती है। वहीं 1971 की की जंग में बार्डर पर तैनात रहे एक पूर्व अर्ध सैनिक बल ने कहा कि उसे आज तक मेडल तक नहीं मिल पाया है। सरकारें आती जाती रहती हैं, लेकिन उनकी कोई नहीं सुनता है। इस अवसर सहायक कमांडेंट शंभूदयाल सहित कई राज्यों से आए लोगों ने विरोध जताया।
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रेवाड़ी। रेवाड़ी के जवाहरलाल नेहरू पार्क मेें आयोजित पूर्व अर्धसैनिक महापंचायत में यूपी, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और दिल्ली के पूर्व अर्धसैनिकों ने सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली। उनका कहना था कि सरकार अब सैनिकों के साथ अर्धसैनिकों की भी सुध ले। सरकार द्वारा सेना की सीएसडी कैंटीन में जीएसटी पर 50 फीसदी की छूट और अर्ध सैनिक बलों की सीपीसी कैंटीन पर छूट नहीं देना धोखा है। महापंचायत में निर्णय लिया गया कि सरकार के इस निर्णय के विरोध में देश 20 लाख अर्ध सैनिक इस बार दिवाली नहीं मनाएंगे। कॉनफेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणवीर सिंह कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित थे। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड एक्स पैरा मिलिट्री के चेयरमैन तारादत्त शर्मा ने की। इसके बाद सचिवालय में जाकर ज्ञापन भी दिया।
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चुनाव में नोटा का उपयोग करेंगे पूर्व अर्धसैनिक बल
पूर्व अर्धसैनिकों की महापंचायत में सिलसिलेवार मांगें रखी गईं। इसमें सिपाही को सातवें वेतन आयोग का लाभ नहीं मिलना, सीमा पर तैनाती के बावजूद शहीद का दर्जा नहीं मिलना एवं वन रैंक- वन पेंशन का लाभ नहीं मिलना मुख्य था। पंचायत में निर्णय लिया गया कि यदि सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी तो आने वाले चुनाव में पूर्व अर्ध सैनिक और उनके परिवार नोटा का बटन दबाएंगे। इसी के साथ पांच दिसंबर को देश भर के अर्ध सैनिक बल एवं उनके परिवार जंतर-मंतर पर धरना देंगे।
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देश में पूर्व अर्ध सैनिकों के लिए है अंधा कानून: पूर्व सुबेदार
दिल्ली से आए पूर्व सुबेदार शिवदत्त ने कहा कि अर्ध सैनिक बल देश की सीमाओं पर दुश्मनों को जवाब देने के साथ-साथ देश कें अंदर शांति बनाए रखने के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर देता है। लेकिन विडंबना है कि आज तक हमें शहीद का दर्जा तक नहीं दिया जाता है। नेता हमारा वोट लेकर पीएम तक बन जाते हैं, लेकिन अंधे कानून के चलते हमारी कोई सुनवाई नहीं होती है। वहीं 1971 की की जंग में बार्डर पर तैनात रहे एक पूर्व अर्ध सैनिक बल ने कहा कि उसे आज तक मेडल तक नहीं मिल पाया है। सरकारें आती जाती रहती हैं, लेकिन उनकी कोई नहीं सुनता है। इस अवसर सहायक कमांडेंट शंभूदयाल सहित कई राज्यों से आए लोगों ने विरोध जताया।
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