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बिजली इंजन का अभाव: विद्युतीकरण का उद्घाटन कर डीजल इंजन से चलाई जा रहीं पैसेंजर ट्रेनें
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रेवाड़ी। विद्युतीकरण के बाद रेवाड़ी-दिल्ली के बीच बिजली चालित इंजन से पैसेंजर ट्रेन चलाने की योजना उद्घाटन के दिन ही दम तोड़ गई है। 30 जनवरी को केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने रेवाड़ी में हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया था। बिजली चालित इंजन से गाड़ी को दिल्ली के लिए रवाना किया गया। वापसी में डीजल इंजन पैसेंजर गाड़ी को लेकर आया। उद्घाटन के चार दिन बाद भी इस रूट पर चलने वाली सात पैसेंजर गाड़ियां डीजल इंजनों से चल रही हैं। इस मामले में रेवाड़ी रेलवे अधिकारी का कहना है कि बिजली के इंजन दिल्ली मंडल द्वारा उपलब्ध करवाने थे। बिजली के इंजनों के अभाव में बिजली की लाइन में डीजल के इंजनों से पैसेंजर गाड़ियां चलाई जा रही हैं।
रेवाड़ी से दिल्ली के बीच रेल लाइन का विद्युतीकरण का कार्य वर्षों से लंबित था। इस रूट का विद्युतीकरण करने का काम लंबे समय से उठाई जा रही थी। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से रेलवे ने विद्युतीकरण का काम पूरा किया। इसके बाद 30 जनवरी को केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने बिजली चालित पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। रेवाड़ी से दिल्ली के बीच चलने वाली कालिंदी पैसेंजर ट्रेन को बिजली के इंजन से जोड़कर रवाना किया था। शुभारंभ के मौके पर बताया गया कि 1 फरवरी तक दिल्ली जाने वाली सभी पैसेंजर ट्रेनें बिजली के इंजन से चलने लगेंगी। उद्घाटन के चार दिन बाद भी ऐसा नहीं हो सकता है। उद्घाटन के दिन ट्रेन दोपहर को दिल्ली जरूर पहुंची, लेकिन वापसी में यह ट्रेन डीजल इंजन से उसी दिन रेवाड़ी स्टेशन पर पहुंच गई।
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एक फरवरी से बिजली से चलनी थी सभी पैसेंजर ट्रेनें
30 जनवरी को एक ट्रेन को बिजली के इंजन से चलाया गया था। 31 जनवरी और एक फरवरी को ट्रायल के तौर पर दो-दो ट्रेन बिजली के इंजनों से चलनी थी। 2 फरवरी से सभी सात पैसेंजर ट्रेनें बिजली के इंजन से चलनी थी, लेकिन एक भी पैसेंजर ट्रेन बिजली इंजन से नहीं चल पाई। सभी पैसेंजर ट्रेन पहले की तरह डीजल इंजन से चल रही हैं। रेवाड़ी से दिल्ली के बीच रोजाना लाखों यात्री सफर करते है। अलवर से दिल्ली तक करीब 50 हजार दैनिक यात्री है जो रोजाना दिल्ली आते-जाते है। बिजली ट्रेन चलने से यात्रियों को समय की बचत भी होनी थी। तीन दिन पहले शुभारंभ होने के बाद यात्रियों को लंबे अर्से बाद राहत मिली थी, लेकिन फिर से अब मायूस होना पड़ रहा है।
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वर्ष 2014 में मिली थी विद्युतीकरण की स्वीकृति
वर्ष 2014 में दिल्ली-अहमदाबाद रेल लाइन के विद्युतीकरण का कार्य स्वीकृत हुआ था। अगस्त 2017 में गुरुग्राम से रेवाड़ी-दिल्ली रेल लाइन के विद्युतीकरण के कार्य की शुरूआत की गई थी। दिसंबर 2018 तक विद्युतीकरण का कार्य पूरा होना था, लेकिन काम एक माह की देरी से पूरा हुआ।
यह सच है कि रेवाड़ी से दिल्ली के बीच एक ट्रेन को ही रवाना किया गया था, लेकिन यह ट्रेन डीजल से ही रेवाड़ी लौटी थी। बिजली इंजन दिल्ली से ही मिलने थे। दिल्ली से इंजन नहीं मिलने के कारण डीजल इंजन से ट्रेनों को रवाना किया जा रहा है। - सतपाल, एसएस रेलवे रेवाड़ी
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यात्रियों को बिजली ट्रेन से सफर करने का सपना वर्षों पुराना था, लेकिन रेल प्रशासन ने यात्रियों के साथ भद्दा मजाक किया है। एक फेरे में सिर्फ बिजली इंजन से पैसेंजर चलाई गई। उसके बाद से ही पहले की तरह डीजल इंजन से ट्रेन चल रही है। जल्द ही रेल मंत्रालय को शिकायत भेजी जाएगी।
- हरीश कुमार, प्रधान, दैनिक रेलयात्री संघ।
रेवाड़ी से दिल्ली के बीच रेल लाइन का विद्युतीकरण का कार्य वर्षों से लंबित था। इस रूट का विद्युतीकरण करने का काम लंबे समय से उठाई जा रही थी। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से रेलवे ने विद्युतीकरण का काम पूरा किया। इसके बाद 30 जनवरी को केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने बिजली चालित पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। रेवाड़ी से दिल्ली के बीच चलने वाली कालिंदी पैसेंजर ट्रेन को बिजली के इंजन से जोड़कर रवाना किया था। शुभारंभ के मौके पर बताया गया कि 1 फरवरी तक दिल्ली जाने वाली सभी पैसेंजर ट्रेनें बिजली के इंजन से चलने लगेंगी। उद्घाटन के चार दिन बाद भी ऐसा नहीं हो सकता है। उद्घाटन के दिन ट्रेन दोपहर को दिल्ली जरूर पहुंची, लेकिन वापसी में यह ट्रेन डीजल इंजन से उसी दिन रेवाड़ी स्टेशन पर पहुंच गई।
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एक फरवरी से बिजली से चलनी थी सभी पैसेंजर ट्रेनें
30 जनवरी को एक ट्रेन को बिजली के इंजन से चलाया गया था। 31 जनवरी और एक फरवरी को ट्रायल के तौर पर दो-दो ट्रेन बिजली के इंजनों से चलनी थी। 2 फरवरी से सभी सात पैसेंजर ट्रेनें बिजली के इंजन से चलनी थी, लेकिन एक भी पैसेंजर ट्रेन बिजली इंजन से नहीं चल पाई। सभी पैसेंजर ट्रेन पहले की तरह डीजल इंजन से चल रही हैं। रेवाड़ी से दिल्ली के बीच रोजाना लाखों यात्री सफर करते है। अलवर से दिल्ली तक करीब 50 हजार दैनिक यात्री है जो रोजाना दिल्ली आते-जाते है। बिजली ट्रेन चलने से यात्रियों को समय की बचत भी होनी थी। तीन दिन पहले शुभारंभ होने के बाद यात्रियों को लंबे अर्से बाद राहत मिली थी, लेकिन फिर से अब मायूस होना पड़ रहा है।
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वर्ष 2014 में मिली थी विद्युतीकरण की स्वीकृति
वर्ष 2014 में दिल्ली-अहमदाबाद रेल लाइन के विद्युतीकरण का कार्य स्वीकृत हुआ था। अगस्त 2017 में गुरुग्राम से रेवाड़ी-दिल्ली रेल लाइन के विद्युतीकरण के कार्य की शुरूआत की गई थी। दिसंबर 2018 तक विद्युतीकरण का कार्य पूरा होना था, लेकिन काम एक माह की देरी से पूरा हुआ।
यह सच है कि रेवाड़ी से दिल्ली के बीच एक ट्रेन को ही रवाना किया गया था, लेकिन यह ट्रेन डीजल से ही रेवाड़ी लौटी थी। बिजली इंजन दिल्ली से ही मिलने थे। दिल्ली से इंजन नहीं मिलने के कारण डीजल इंजन से ट्रेनों को रवाना किया जा रहा है। - सतपाल, एसएस रेलवे रेवाड़ी
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यात्रियों को बिजली ट्रेन से सफर करने का सपना वर्षों पुराना था, लेकिन रेल प्रशासन ने यात्रियों के साथ भद्दा मजाक किया है। एक फेरे में सिर्फ बिजली इंजन से पैसेंजर चलाई गई। उसके बाद से ही पहले की तरह डीजल इंजन से ट्रेन चल रही है। जल्द ही रेल मंत्रालय को शिकायत भेजी जाएगी।
- हरीश कुमार, प्रधान, दैनिक रेलयात्री संघ।