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ग्रामीण ने सूझबूझ से डूबने से बचा चरवाहा...
Updated Fri, 13 Jul 2018 12:51 AM IST
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भैंस निकालने जोहड़ में गए बकरी चरवाहा को डूबने से बचाया
खोल। गांव देहलावास गुलाबपुरा में वीरवार दोपहर को जोहड़ में डूब रहे एक बकरी चरवाहा को ग्रामीणों ने बचा लिया। इसमें सूझबूझ का परिचय देने वाले गांव के रणधीर सिंह की ग्रामीणों ने प्रशंसा की है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को रणधीर सिंह को सम्मानित करना चाहिए।
जानकारी के अनुसार गांव देहलावास गुलाबपुरा निवासी बकरी पालक श्योताज सिंह वीरवार दोपहर को गांव के जोहड़ के पास बकरियां चरा रहा था। जोहड़ पर एक महिला अपनी भैंस को पानी पिलाने और नहलाने के लिए पहुंची। काफी देर तक जब भैंस पानी से बाहर नहीं निकली तो महिला ने पास में ही बकरी पालक श्योताज सिंह से भैंस को जोहड़ से निकालने में मदद करने को कहा। श्योताज सिंह महिला की मदद करने पानी में कूद गया। उसे तैरना नहीं आता था। अधिक गहरे पानी में जाने के कारण वह डूबने लगा। काफी देर तक जब श्योताज पानी से बाहर नहीं निकला तो महिला ने शोर मचा दिया। इसी दौरान जोहड़ से कुछ दूरी पर बैठे गांव निवासी रणधीर सिंह शोर सुनकर तुरंत मौके पर पहुंचा। डूबते बकरी चरवाहा को देखकर उसने भी जोहड़ में छलांग लगा दी। रणधीर सिंह ने बड़ी मुश्किल से श्योताज को बेहोशी की हालत में पानी से निकाला। शोर सुनकर भारी संख्या में ग्रामीण भी वहां पहुंचे। श्योताज सिंह को पानी से बाहर निकालकर कृत्रिम सांस देने के साथ पेट से पानी निकाला गया। करीब 10 मिनट बाद श्योताज सिंह की सांसें चलने लगी। रणधीर सिंह की सूझबूझ से श्योताज सिंह की जान बच गई। बहादुरी के कार्य के लिए ग्रामीणों ने रणधीर की पीठ थपथपाकर उसकी प्रशंसा की है। ग्रामीण प्योरलाल, तरुण कुमार, रवि कुमार, सुरेश कुमार, छंगाराम सहित वहां मौजूद ग्रामीणों ने रणधीर सिंह की प्रशंसा कर कहना है कि जिला प्रशासन को रणधीर सिंह को सम्मानित करना चाहिए।
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खोल। गांव देहलावास गुलाबपुरा में वीरवार दोपहर को जोहड़ में डूब रहे एक बकरी चरवाहा को ग्रामीणों ने बचा लिया। इसमें सूझबूझ का परिचय देने वाले गांव के रणधीर सिंह की ग्रामीणों ने प्रशंसा की है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को रणधीर सिंह को सम्मानित करना चाहिए।
जानकारी के अनुसार गांव देहलावास गुलाबपुरा निवासी बकरी पालक श्योताज सिंह वीरवार दोपहर को गांव के जोहड़ के पास बकरियां चरा रहा था। जोहड़ पर एक महिला अपनी भैंस को पानी पिलाने और नहलाने के लिए पहुंची। काफी देर तक जब भैंस पानी से बाहर नहीं निकली तो महिला ने पास में ही बकरी पालक श्योताज सिंह से भैंस को जोहड़ से निकालने में मदद करने को कहा। श्योताज सिंह महिला की मदद करने पानी में कूद गया। उसे तैरना नहीं आता था। अधिक गहरे पानी में जाने के कारण वह डूबने लगा। काफी देर तक जब श्योताज पानी से बाहर नहीं निकला तो महिला ने शोर मचा दिया। इसी दौरान जोहड़ से कुछ दूरी पर बैठे गांव निवासी रणधीर सिंह शोर सुनकर तुरंत मौके पर पहुंचा। डूबते बकरी चरवाहा को देखकर उसने भी जोहड़ में छलांग लगा दी। रणधीर सिंह ने बड़ी मुश्किल से श्योताज को बेहोशी की हालत में पानी से निकाला। शोर सुनकर भारी संख्या में ग्रामीण भी वहां पहुंचे। श्योताज सिंह को पानी से बाहर निकालकर कृत्रिम सांस देने के साथ पेट से पानी निकाला गया। करीब 10 मिनट बाद श्योताज सिंह की सांसें चलने लगी। रणधीर सिंह की सूझबूझ से श्योताज सिंह की जान बच गई। बहादुरी के कार्य के लिए ग्रामीणों ने रणधीर की पीठ थपथपाकर उसकी प्रशंसा की है। ग्रामीण प्योरलाल, तरुण कुमार, रवि कुमार, सुरेश कुमार, छंगाराम सहित वहां मौजूद ग्रामीणों ने रणधीर सिंह की प्रशंसा कर कहना है कि जिला प्रशासन को रणधीर सिंह को सम्मानित करना चाहिए।
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